हुसैनाबाद में नवजात बच्चियों के परित्याग से मची सनसनी: इंसानियत हुई शर्मसार

हुसैनाबाद में नवजात बच्चियों के परित्याग से मची सनसनी: इंसानियत हुई शर्मसार

author Yashwant Kumar
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#हुसैनाबाद #मानवतापरप्रश्न : नहर और झाड़ियों से मिली दो नवजात बच्चियां — एक जीवित, एक मृत — जिले में मचा शोक और आक्रोश
  • हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में लगातार दो दिनों में नवजात बच्चियों के परित्याग की घटनाओं से जनमानस स्तब्ध।
  • घोड़बंधा गांव की नहर से एक दिन की नवजात बच्ची जीवित अवस्था में बरामद, अस्पताल में उपचार जारी।
  • मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र के लटपौरी गांव के पास झाड़ियों से 10–15 दिन की नवजात का शव मिला।
  • दोनों घटनाओं से क्षेत्र में मानवता पर सवाल और आक्रोश का माहौल।
  • ग्रामीणों ने दोषियों की पहचान और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पलामू जिले के हुसैनाबाद क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाली घटनाओं ने पूरे समाज को शर्मसार कर दिया है। रविवार को हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के बड़ेपुर पंचायत के घोड़बंधा गांव के समीप नहर से एक एक दिन की नवजात बच्ची जीवित अवस्था में बरामद की गई। ग्रामीणों ने मासूम को तुरंत नहर से निकालकर स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों द्वारा उसका जीवन बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है।

मोहम्मदगंज में झाड़ियों से मिली नवजात का शव

यह दर्दनाक घटना तब और भी भयावह हो गई जब दो दिन पहले ही मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र के लटपौरी गांव के पास झाड़ियों में 10 से 15 दिन की नवजात बच्ची का शव बरामद हुआ था। जानकारी के अनुसार, राहगीरों ने रेलवे ट्रैक किनारे झाड़ियों में कुछ संदिग्ध देखा और पास जाकर देखा तो वहां एक नवजात बच्ची निर्जीव अवस्था में पड़ी थी। सूचना मिलने पर मोहम्मदगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

समाज में आक्रोश और पीड़ा

दोनों घटनाओं ने जिले में शोक और आक्रोश का वातावरण पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यह केवल अपराध नहीं बल्कि मानवता के पतन की मिसाल है। जिस समाज में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं नवजात बच्चियों को इस तरह फेंक देना पूरे समाज के लिए कलंक है।

एक स्थानीय महिला ने कहा: “जिस बच्ची को गोद में उठाकर प्यार मिलना चाहिए, उसे नहर और झाड़ियों में छोड़ देना पाप से भी बड़ा अपराध है।”

ग्रामीणों ने कहा कि यह घटनाएं समाज की संवेदनहीनता और नैतिक गिरावट की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने प्रशासन से दोषियों की पहचान कर कड़ी सजा देने की मांग की है ताकि भविष्य में कोई ऐसी घृणित हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

प्रशासनिक जांच और जनचेतना की आवश्यकता

दोनों मामलों की पुलिस जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि घटनाओं की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं सामाजिक संगठनों और महिला आयोग से भी इस मामले में सक्रिय भूमिका की अपेक्षा की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज में मानसिक और सामाजिक जागरूकता आवश्यक है।

न्यूज़ देखो: बेटियों के साथ अमानवीय व्यवहार पर समाज को सोचना होगा

इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या हम वास्तव में ‘बेटी बचाओ’ के सिद्धांत पर अमल कर रहे हैं या यह केवल नारे तक सीमित है। समाज के हर वर्ग को यह समझना होगा कि नवजात बच्ची का जीवन भी उतना ही मूल्यवान है जितना किसी अन्य का। ऐसे कृत्य न केवल कानून के खिलाफ हैं बल्कि मानवता के मूल भाव को भी ठेस पहुंचाते हैं।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बेटियों को सम्मान दें, संवेदना नहीं अपराध बनें

अब समय आ गया है कि हम समाज में जागरूकता की लौ जलाएँ और हर बेटी के जन्म को उत्सव बनाएं, अपराध नहीं। जो लोग ऐसे कृत्यों को अंजाम देते हैं, वे इंसानियत को कलंकित करते हैं। आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हर बच्ची को सुरक्षा, प्यार और सम्मान मिलेगा। अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस खबर को शेयर कर जागरूकता फैलाएं।

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Written by

हुसैनाबाद, पलामू

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