
#सिमडेगा #धार्मिक_महोत्सव : तामड़ा गांव में शिव मंदिर के वार्षिक उत्सव पर भव्य कलश यात्रा और 24 घंटे अखंड हरी कीर्तन का शुभारंभ
सिमडेगा सदर प्रखंड के तामड़ा गांव स्थित शिव मंदिर में तीसरे वार्षिक महोत्सव की शुरुआत श्रद्धा और उत्साह के साथ हुई। गुरुवार को भव्य कलश यात्रा और 24 घंटे के अखंड हरी कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।
- तामड़ा गांव, सिमडेगा सदर प्रखंड में शिव मंदिर का तीसरा वार्षिक महोत्सव प्रारंभ।
- गुरुवार प्रातः निकाली गई भव्य कलश यात्रा, महिलाओं और युवतियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी।
- 24 घंटे का अखंड हरी कीर्तन शुरू, “हरे राम, हरे कृष्ण” से गूंजा क्षेत्र।
- आचार्य विश्वनाथ मिश्र ने कराई विधिवत पूजा-अर्चना, यजमान रहे संजय केसरी।
- संध्या में भव्य भंडारा, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद।
सिमडेगा सदर प्रखंड अंतर्गत तामड़ा गांव स्थित शिव मंदिर में तीसरे वार्षिक महोत्सव के अवसर पर गुरुवार को धार्मिक कार्यक्रमों की विधिवत शुरुआत की गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्ति एवं आस्था से सराबोर हो गया। भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ हुए इस आयोजन ने गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
भव्य कलश यात्रा से हुई शुरुआत
प्रातः काल आयोजित कलश यात्रा महोत्सव का मुख्य आकर्षण रही। गांव की महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर सिर पर कलश धारण किया और मंदिर परिसर से निर्धारित मार्गों पर शोभायात्रा निकाली।
भक्ति गीतों और जयघोषों के बीच निकली इस कलश यात्रा ने पूरे तामड़ा गांव को उत्सवमय बना दिया। ग्रामीणों ने रास्ते में श्रद्धालुओं का स्वागत किया और वातावरण में धार्मिक उल्लास स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।
अखंड हरी कीर्तन से गूंजा वातावरण
कलश यात्रा के पश्चात 24 घंटे का अखंड हरी कीर्तन प्रारंभ किया गया। कीर्तन में आसपास के कई गांवों की मंडलियों ने भाग लिया। “हरे राम, हरे कृष्ण” के सामूहिक जयघोष से मंदिर परिसर और पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
कीर्तन मंडलियों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति संगीत प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु पूरे मनोयोग से कीर्तन में शामिल हुए और रातभर भजन-कीर्तन का सिलसिला चलता रहा।
विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान
महोत्सव के दौरान विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य विश्वनाथ मिश्र ने मुख्य भूमिका निभाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव की विशेष पूजा संपन्न कराई गई।
इस अवसर पर संजय केसरी ने यजमान के रूप में पूजा में भाग लिया और पूरे आयोजन को विधिपूर्वक संपन्न कराने में सहयोग किया। पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा और सभी ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
भव्य भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
संध्या समय भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के कई गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति और ग्रामीणों ने मिलकर भोजन वितरण की व्यवस्था संभाली।
भंडारे में अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
शुक्रवार को होगा समापन
कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हवन-पूजन और नगर भ्रमण के साथ किया जाएगा। इसके लिए भी विशेष तैयारियां की गई हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक और भव्य तरीके से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय दिखाई दे रहा है।
शिव मंदिर पूजा समिति और समस्त ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वार्षिक महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है।
सामाजिक समरसता का बना केंद्र
तामड़ा गांव का यह वार्षिक महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक भी है। गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी मिलकर आयोजन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है, वहीं गांवों में आपसी सहयोग और सौहार्द की भावना भी मजबूत होती है।

न्यूज़ देखो: आस्था और एकता का संगम बना तामड़ा का वार्षिक महोत्सव
तामड़ा गांव का शिव मंदिर महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का उदाहरण बनकर सामने आया है। कलश यात्रा, अखंड कीर्तन और भंडारे जैसे आयोजन ग्रामीण समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे कार्यक्रम संस्कृति और परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
धर्म और संस्कृति से जुड़कर ही मजबूत बनता है समाज
धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं।
आइए, अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोकर रखें।
ऐसे आयोजनों में भाग लेकर सामाजिक एकता को बढ़ावा दें।
नई पीढ़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना हमारी जिम्मेदारी है।
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