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बानो प्रखंड में बीडीओ का औचक निरीक्षण, नशे में मिले प्रधानाध्यापक पर 24 घंटे में स्पष्टीकरण का आदेश

#बानो #प्रशासनिक_कार्रवाई : सुदूर सीमांत क्षेत्रों के विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों में लापरवाही पर बीडीओ ने दिखाई सख्ती।

बानो प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों में सोमवार को बीडीओ नईमुद्दीन अंसारी ने विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक प्रधानाध्यापक नशे की हालत में पाए गए, जबकि एक आंगनबाड़ी केंद्र अव्यवस्थित मिला। मामले में 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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  • जोरपोंडा, बॉन्डो टोली, जोरोबाड़ी, कोहिपाट, कांटा व मरानी सहित कई संस्थानों का निरीक्षण।
  • राजकीय प्राथमिक विद्यालय मरानी में 30 में से केवल 15 छात्र उपस्थित।
  • प्रधानाध्यापक राम स्वरूप महतो नशे की हालत में पाए गए।
  • आंगनबाड़ी केंद्र कोहिपाट में साफ-सफाई का अभाव, केंद्र जाम मिला।
  • संबंधित शिक्षकों व सेविकाओं से 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने का निर्देश।

बानो (सिमडेगा) प्रखंड मुख्यालय से दूर राज्य सीमांत क्षेत्र में स्थित कई विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों का सोमवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) नईमुद्दीन अंसारी ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान शिक्षा और पोषण व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आई। बीडीओ ने साफ-सफाई, बच्चों की उपस्थिति, मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता तथा मेनू आधारित भोजन व्यवस्था की बारीकी से जांच की।

मरानी विद्यालय में गंभीर अनियमितता

निरीक्षण के क्रम में राजकीय प्राथमिक विद्यालय मरानी में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। विद्यालय में कुल 30 नामांकित छात्रों में से मात्र 15 छात्र उपस्थित मिले। इससे शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए।

सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक राम स्वरूप महतो निरीक्षण के दौरान नशे की हालत में पाए गए। निरीक्षण पंजी की मांग करने पर पंजी प्रस्तुत नहीं की जा सकी। बच्चों एवं ग्रामीणों से पूछताछ में यह बात सामने आई कि प्रधानाध्यापक प्रतिदिन नशे की हालत में विद्यालय आते हैं और नियमित पढ़ाई नहीं होती।

ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से इस स्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी है।

इस पर बीडीओ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रधानाध्यापक को 24 घंटे के भीतर स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा—

“शिक्षा व्यवस्था में इस प्रकार की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उच्चाधिकारियों को सूचित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

आंगनबाड़ी केंद्र कोहिपाट भी अव्यवस्थित

निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र कोहिपाट में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। केंद्र में साफ-सफाई का अभाव था और दरवाजा जाम मिला, जिससे यह प्रतीत हुआ कि केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है।

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जबकि यह केंद्र 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए शालापूर्व शिक्षा और पोषण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में अव्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए चिंता का विषय है।

आंगनबाड़ी सेविका आरती देवी एवं सहायिका मार्गरेट मड़की के कार्य में लापरवाही पाए जाने पर बीडीओ ने दोनों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उच्चाधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई की जाएगी।

अन्य विद्यालयों को दिए सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान जोरपोंडा, बॉन्डो टोली, जोरोबाड़ी, कांटा समेत अन्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को भी साफ-सफाई, बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा गुणवत्तापूर्ण मेनू आधारित भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

बीडीओ ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा जब जमीनी स्तर पर ईमानदारी से कार्य किया जाए। उन्होंने सभी संबंधित कर्मियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाने की हिदायत दी।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

प्रखंड विकास पदाधिकारी नईमुद्दीन अंसारी ने दो टूक कहा कि बच्चों के भविष्य, शिक्षा और पोषण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रखंड क्षेत्र के सभी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी।

“बच्चों का अधिकार सर्वोपरि है। शिक्षा और पोषण व्यवस्था में कोताही करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।”

न्यूज़ देखो: जवाबदेही तय करना जरूरी

सरकारी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारना केवल कागजी निर्देशों से संभव नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करने से ही बदलाव आएगा। बानो में हुआ यह औचक निरीक्षण प्रशासन की सक्रियता का संकेत है। अब देखना होगा कि कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों का भविष्य सर्वोपरि

शिक्षा और पोषण हर बच्चे का अधिकार है।
अगर कहीं लापरवाही दिखे तो आवाज उठाना भी समाज का दायित्व है।
प्रशासन की सख्ती तभी सफल होगी जब समुदाय भी सजग रहेगा।
आइए, मिलकर सुनिश्चित करें कि हमारे क्षेत्र के विद्यालय बेहतर बनें।

क्या आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्या है? अपनी राय कमेंट में साझा करें और खबर को आगे बढ़ाएं।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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