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दनगद्दी पर्यटन स्थल में डूबे स्कूली बच्चे का शव बरामद, गोताखोरों के साहस से अभियान सफल

#बोलबा #दुर्घटना_खोजबीन : दनगद्दी में डूबे छात्र का शव स्थानीय गोताखोरों की मदद से मिला।

बोलबा प्रखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दनगद्दी में डूबे एक स्कूली बच्चे का शव आज बरामद कर लिया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अगुवाई में अनुभवी गोताखोरों की टीम ने सुबह से सघन खोजबीन अभियान चलाया। कड़ी मशक्कत और जोखिम भरे प्रयासों के बाद शव को पानी से बाहर निकाला गया। यह घटना पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता की गंभीर आवश्यकता को दर्शाती है।

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  • दनगद्दी पर्यटन स्थल में डूबे स्कूली बच्चे का शव बरामद।
  • समसेरा मुखिया सह भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरजन बड़ाईक की अगुवाई में खोज अभियान।
  • स्थानीय गोताखोर कामेश्वर प्रधान के नेतृत्व में बनाई गई टीम।
  • कई गोताखोरों ने जान जोखिम में डालकर किया साहसिक प्रयास।
  • बोलबा प्रशासन और पुलिस बल मौके पर रहे मौजूद।

बोलबा प्रखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दनगद्दी में कल डूबे स्कूली बच्चे को लेकर चल रहा खोज अभियान आज सुबह सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। स्थानीय स्तर पर लगातार प्रयासों और समन्वय के बाद बच्चे का शव पानी से बाहर निकाला गया। शव बरामद होने की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया और परिजन गहरे दुख में डूब गए।

खोजबीन अभियान की शुरुआत

घटना की गंभीरता को देखते हुए आज सुबह दनगद्दी पर्यटन स्थल पर विशेष खोजबीन अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व समसेरा मुखिया सह भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरजन बड़ाईक ने किया। उनके मार्गदर्शन में बोलबा के स्थानीय गोताखोर कामेश्वर प्रधान के द्वारा अनुभवी गोताखोरों की एक टीम गठित की गई, जिसने पानी में उतरकर बच्चे की तलाश शुरू की।

गोताखोरों का साहसिक प्रयास

खोज अभियान के दौरान स्थानीय गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर साहसिक कार्य किया। पानी की गहराई और बहाव के बावजूद गोताखोर लगातार प्रयास करते रहे। इस अभियान में किशोर कुमार सिंह और गजाधर सिंह का भी सराहनीय योगदान रहा, जिन्होंने खोजबीन के दौरान टीम का सहयोग किया।

घंटों की मशक्कत के बाद सफलता

काफी देर तक चले सघन खोज अभियान और कठिन परिस्थितियों के बीच आखिरकार बच्चे का शव बरामद कर लिया गया। इस सफलता के पीछे गोताखोरों की सूझबूझ, अनुभव और अदम्य साहस प्रमुख रहा। स्थानीय लोगों ने गोताखोरों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।

साहस दिखाने वाले गोताखोरों के नाम

इस जोखिम भरे अभियान में शामिल गोताखोरों में कामेश्वर प्रधान, लोकनाथ सिंह, प्रेम प्रकाश केरकेट्टा, माघू लोहरा, रतिया लोहरा, लालमोहन सिंह, दीपक केरकेट्टा, अतुल लोहरा, विनय केरकेट्टा, लखन लोहरा, गंगा लोहरा, मदन सिंह और अगिंन्दर सिंह शामिल थे। इन सभी ने अपनी जान की परवाह किए बिना साहस और जिम्मेदारी का परिचय दिया।

परिजनों और ग्रामीणों की उपस्थिति

शव मिलने की सूचना मिलते ही ठेठईटांगर घोड़ी टोली गांव के ग्रामीण और मृतक के परिजन बड़ी संख्या में बोलबा थाना पहुंचे। इस दौरान प्रखंड प्रमुख ठेठईटांगर विपिन पंकज मिंज भी मौके पर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढ़स बंधाया। उन्होंने परिजनों को हर संभव सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।

प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी

घटना स्थल और थाना परिसर में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। मौके पर बोलबा अंचल अधिकारी सुधांशु पाठक, अंचल निरीक्षक सिद्धेश्वर पासवान, थाना प्रभारी देवीदास मुर्मू सहित पुलिस बल के जवान तैनात रहे। प्रशासन द्वारा आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि दनगद्दी जैसे पर्यटन स्थल पर अक्सर भीड़ रहती है, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। मासूम स्कूली बच्चे की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।

पर्यटन स्थलों की सुरक्षा पर सवाल

दनगद्दी पर्यटन स्थल पर हुई इस घटना ने एक बार फिर पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी संकेत, निगरानी और आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय मजबूत किए जाएं, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

समाज और प्रशासन की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, गोताखोरों और प्रशासन के बीच समन्वय देखने को मिला। हालांकि एक अनमोल जान नहीं बचाई जा सकी, लेकिन खोज अभियान में दिखी तत्परता और साहस समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।

न्यूज़ देखो: साहस, संवेदना और सुरक्षा की सीख

यह खबर स्थानीय गोताखोरों के साहस और सामाजिक जिम्मेदारी को उजागर करती है, जिन्होंने जान जोखिम में डालकर खोज अभियान को सफल बनाया। साथ ही यह प्रशासन और समाज के लिए चेतावनी भी है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

एक त्रासदी कई जिम्मेदारियां

हर दुर्घटना हमें सतर्कता और सुरक्षा के महत्व की याद दिलाती है। पर्यटन स्थलों पर जिम्मेदार व्यवहार, प्रशासनिक निगरानी और स्थानीय सहभागिता से ही ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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