#गुमला #हत्या_कांड : शादी में जा रही वृद्ध महिला की घात लगाकर हत्या से सनसनी फैली।
गुमला जिले के पालकोट थाना क्षेत्र के पंडरापानी गांव में एक बुजुर्ग महिला की कुल्हाड़ी से हत्या की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मृतका मंगरी देवी शादी समारोह में शामिल होने जा रही थीं, तभी जंगल के पास उन पर हमला हुआ। घटना के पीछे डायन-बिसाही की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और ग्रामीणों में भय का माहौल है।
- मंगरी देवी की कुल्हाड़ी (टांगी) से निर्मम हत्या, घटना पंडरापानी गांव, पालकोट थाना क्षेत्र की।
- शादी समारोह में शामिल होने जा रही थीं, जंगल के पास घात लगाकर हमला किया गया।
- मृतका का क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे इलाके में फैली दहशत और सनसनी।
- हत्या के पीछे डायन-बिसाही से जुड़ा शक, ग्रामीणों में आक्रोश।
- पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की, आरोपियों की तलाश जारी।
पालकोट थाना क्षेत्र के उमड़ा पंचायत स्थित पंडरापानी गांव में हुई इस दर्दनाक हत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। बघिमा अम्बाटोली गांव निवासी वृद्ध महिला मंगरी देवी एक सामाजिक कार्यक्रम, यानी शादी समारोह में शामिल होने के लिए जा रही थीं, तभी रास्ते में घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर टांगी से हमला कर दिया। जंगल के समीप उनका क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि ग्रामीण समाज में फैली कुप्रथाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
मिली जानकारी के अनुसार, मृतका मंगरी देवी उमड़ा पंचायत के पंडरापानी गांव में आयोजित एक शादी समारोह में भाग लेने के लिए घर से निकली थीं। रास्ते में खेल मैदान के समीप स्थित जंगल के पास कुछ अज्ञात हमलावर पहले से घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही वह उस स्थान से गुजरीं, उन पर टांगी से हमला कर दिया गया। हमले की क्रूरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महिला का शव क्षत-विक्षत अवस्था में पाया गया।
घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों ने शव को देखा और तुरंत स्थानीय लोगों को सूचना दी। देखते ही देखते पूरे गांव में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। इस नृशंस हत्या ने ग्रामीणों के मन में भय और असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।
मृतका की पहचान और सामाजिक पृष्ठभूमि
मृतका की पहचान बघिमा अम्बाटोली गांव निवासी मंगरी देवी के रूप में हुई है, जो एक बुजुर्ग महिला थीं और स्थानीय समाज में सामान्य जीवन व्यतीत कर रही थीं। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, वह शांत स्वभाव की महिला थीं और किसी से उनका कोई विवाद नहीं था। ऐसे में अचानक इस तरह की निर्मम हत्या ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थीं और किसी प्रकार की शंका या खतरे की कोई जानकारी पहले नहीं थी। इस घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल है।
डायन-बिसाही की आशंका से जुड़ा एंगल
स्थानीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि हत्या के पीछे डायन-बिसाही से जुड़ी कुप्रथा हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में अब भी इस तरह की अंधविश्वासी मानसिकता के कारण महिलाओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से किसी कारण की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस एंगल को भी गंभीरता से जांच में शामिल किया गया है।
डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाएं समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं और कई बार निर्दोष लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी और अंधविश्वास इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा देते हैं।
पुलिस की जांच और कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पालकोट थाना की पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आसपास के इलाके में छानबीन की जा रही है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान के लिए ग्रामीणों से पूछताछ भी की जा रही है।
पुलिस अधिकारी पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए हत्या के सभी संभावित कारणों की जांच कर रहे हैं। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक हुई वारदात है। जंगल के पास घात लगाकर हमला किए जाने से यह आशंका और मजबूत होती है कि हमलावर पहले से योजना बनाकर बैठे थे।
इलाके में दहशत और जन प्रतिक्रिया
इस जघन्य हत्या के बाद पंडरापानी गांव सहित पूरे पालकोट क्षेत्र में भय का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि दिनदहाड़े इस तरह की घटना से उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिलाएं और बुजुर्ग अब अकेले बाहर निकलने से डर महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। साथ ही, ग्रामीणों ने अंधविश्वास से जुड़ी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।
सामाजिक दृष्टि से गंभीर संकेत
यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीण समाज में मौजूद अंधविश्वास और सामाजिक असुरक्षा की गहरी समस्या को उजागर करती है। डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाएं आज भी कई क्षेत्रों में महिलाओं के लिए खतरा बनी हुई हैं। प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाए।
साथ ही, यह घटना महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है। सार्वजनिक स्थानों, खासकर सुनसान इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक हो जाती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
न्यूज़ देखो: अंधविश्वास और कानून व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल
पालकोट की यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों की भयावह सच्चाई को भी सामने लाती है। यदि डायन-बिसाही की आशंका सही साबित होती है, तो यह प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी है। क्या ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच अब सबसे बड़ी कसौटी होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक समाज ही रोक सकता है ऐसी भयावह घटनाएं
ऐसी घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि अंधविश्वास और हिंसा के खिलाफ सामूहिक आवाज कितनी जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक संवाद को मजबूत करना समय की मांग है।
यदि हम चुप रहेंगे, तो कुरीतियां और अपराध दोनों बढ़ेंगे।
सुरक्षा, संवेदनशीलता और जागरूकता ही ऐसे अपराधों को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।
आइए, समाज में फैल रहे अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाएं, पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करें और न्याय की मांग को मजबूत करें। अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और जागरूक समाज निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।