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Gumla

मेहनत का रंग: टमाटर की खेती से चमका जारी प्रखंड का चटकपुर गांव, सैकड़ों ग्रामीणों को मिला रोजगार

#गुमला #कृषि_उन्नति : चटकपुर में टमाटर की खेती से किसानों की बढ़ी आमदनी, मजदूरों की जिंदगी में आई खुशहाली
  • जारी प्रखंड के चटकपुर गांव में 100 एकड़ तक फैली टमाटर की फसल ने दिखाई समृद्धि की राह।
  • गोविंदपुर और आसपास के गांवों के किसानों की साझा मेहनत से टमाटर की खेती बनी सफलता की मिसाल।
  • शुरुआती नुकसान के बाद अच्छे बाजार भाव से किसानों को हुआ मुनाफा।
  • इस खेती से 200 से अधिक मजदूरों को मिला रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला सहारा।
  • किसानों का कहना – “अब गांव में खुशहाली लौट आई है, सबकी मेहनत रंग लाई।”

गुमला जिले के जारी प्रखंड स्थित चटकपुर गांव इन दिनों कृषि नवाचार और मेहनत की मिसाल बन गया है। इस वर्ष यहां टमाटर की खेती ने गांव की तस्वीर ही बदल दी है। लगभग 80 से 100 एकड़ जमीन पर टमाटर की फसल लहलहा रही है। गोविंदपुर, श्रीनगर, कोड़ी, करमटोली और टोगो गांवों के किसानों ने मिलकर इस सामूहिक खेती को अंजाम दिया, जिससे न केवल उनकी आय बढ़ी बल्कि मजदूरों को भी भरपूर काम मिला।

किसानों की मेहनत बनी समृद्धि का आधार

चटकपुर के किसान लंबे समय से पारंपरिक खेती कर रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने जोखिम उठाते हुए बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती का निर्णय लिया। शुरुआत में जब बाजार में टमाटर के दाम कम थे, तब किसानों को थोड़ी निराशा हुई। लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद कीमतों में सुधार आया और मुनाफा बढ़ने लगा।

किसान जाकिर खान ने बताया:

“पहले दाम कम मिलने से चिंता थी, पर अब बाजार में टमाटर का अच्छा भाव मिल रहा है। इस बार की फसल ने उम्मीद से ज्यादा फायदा दिया है।”

मौसम और कीटों से जूझते रहे किसान

बीच के दिनों में मौसम की अनिश्चितता और दागी कीड़े की समस्या ने किसानों को परेशान किया। कई खेतों में फसल को नुकसान भी हुआ। लेकिन किसानों ने स्थानीय कृषि विभाग की सलाह लेकर जैविक छिड़काव किया, जिससे नुकसान कम हुआ और उत्पादन फिर से पटरी पर लौट आया।

नूरुल अंसारी ने बताया कि टमाटर की खेती में नई तकनीक और समय पर दवा का उपयोग करने से फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है। उनका कहना है कि इस मॉडल को अपनाकर अन्य पंचायतें भी आर्थिक रूप से मजबूत हो सकती हैं।

मजदूरों को मिला भरपूर रोजगार

टमाटर की खेती ने न केवल किसानों को फायदा पहुंचाया बल्कि आसपास के गांवों के 200 से 300 मजदूरों को रोजगार भी दिया। खेतों में निराई-गुड़ाई, तोड़ाई, पैकिंग और बाजार तक परिवहन का काम स्थानीय मजदूरों को मिला, जिससे उनकी रोजी-रोटी सुनिश्चित हुई।

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स्थानीय मजदूर अजय तिग्गा ने बताया:

“पहले हम काम की तलाश में बाहर जाते थे, लेकिन अब गांव में ही रोजगार मिल रहा है। इससे परिवार के साथ रहकर भी आमदनी हो रही है।”

सामूहिक प्रयास से बदली गांव की तस्वीर

चटकपुर गांव में टमाटर की खेती अब सामूहिक सफलता का प्रतीक बन चुकी है। गांव के युवा और किसान मिलकर फसल की देखभाल करते हैं, जिससे हर किसी को लाभ मिलता है। इससे सामाजिक एकजुटता भी बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आई है।

किसान नेता कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष राजेश टोप्पो ने कहा कि यह सफलता पूरी तरह किसानों की मेहनत और एकजुटता का नतीजा है। उनका कहना है कि अगर सरकार उचित समर्थन और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा दे, तो यह क्षेत्र राज्य का टमाटर हब बन सकता है।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण नवाचार से बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल

चटकपुर गांव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सामूहिक प्रयास और सही दिशा में की गई मेहनत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है। किसानों ने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर टमाटर उत्पादन के जरिए नया अध्याय रचा है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खेती में नई सोच, गांव में नई रोशनी

चटकपुर के किसानों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और एकजुटता से कोई भी गांव आत्मनिर्भर बन सकता है। अब समय है कि हम भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें और किसानों के प्रयासों का सम्मान करें।
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