भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भाई दूज पर्व डुमरी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भाई दूज पर्व डुमरी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

author News देखो Team
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#डुमरी #भाईदूज_पर्व : शिव मंदिर परिसर में भक्ति और प्रेम का संगम – बहनों ने भाइयों की दीर्घायु और समृद्धि की कामना की
  • डुमरी प्रखंड मुख्यालय स्थित शिव मंदिर परिसर में भाई दूज पर्व पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया।
  • बहनों ने भाइयों के दीर्घायु, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हुए तिलक और आरती की।
  • भक्ति और स्नेह से भरे वातावरण में मंदिर परिसर गूंजता रहा पारंपरिक गीतों से।
  • गाय के गोबर से जमीनी प्रतिमा बनाकर बहनों ने प्रायश्चित और आराधना की परंपरा निभाई।
  • समाज में पारिवारिक एकता और सौहार्द बढ़ाने वाला पर्व बताया गया।

डुमरी (गुमला)। भाई और बहन के अटूट स्नेह, त्याग और अपनत्व का पर्व भाई दूज गुरुवार को डुमरी प्रखंड में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रखंड मुख्यालय स्थित शिव मंदिर परिसर में सुबह से ही महिलाओं और युवतियों की भीड़ उमड़ी रही। बहनों ने स्नान-पूजन कर अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और दीर्घायु की मंगल कामना की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, प्रेम और आस्था का अद्भुत वातावरण बना रहा।

पारंपरिक रीतियों के साथ बहनों ने निभाई परंपरा

इस अवसर पर बहनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए गाय के गोबर से जमीनी प्रतिमा बनाई और उसे डंडे से कूटा, जो पाप-प्रायश्चित का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि किसी बहन से भूलवश अपने भाई के प्रति कोई कठोर वचन या श्राप निकल गया हो, तो इस विधि के माध्यम से उसका प्रायश्चित होता है। पूजा के दौरान बहनों ने रंगीनी के कांटे से अपनी जीभ में चुभन देकर इस परंपरा का पालन किया।

एक श्रद्धालु बहन प्रज्ञा कुमारी ने कहा: “यह पर्व केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और परिवार के बंधन को और मजबूत करने का माध्यम है।”

पूरे शिव मंदिर परिसर में पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई देती रही। महिलाएं समूह में बैठकर भक्ति गीत और लोकगीत गाती रहीं, वहीं भाई-बहनों ने प्रसाद वितरण कर इस दिन को यादगार बना दिया।

समाज में प्रेम और एकता का प्रतीक

ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे पर्व समाज में आपसी प्रेम, पारिवारिक एकता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ाने का कार्य करते हैं। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में एकता और स्नेह का संदेश देता है।

डुमरी पंडिताइन ने बताया: “भाई दूज जैसे पर्व हमारी संस्कृति की आत्मा हैं, जो हमें अपने संबंधों की पवित्रता और जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं।”

शिव मंदिर के अलावा डुमरी प्रखंड के कई गांवों में भी महिलाओं ने समूह में भाई दूज पर्व का आयोजन किया। कुछ स्थानों पर पूजा के बाद सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम भी हुआ।

उपहारों और आशीर्वाद का अद्भुत संगम

इस अवसर पर भाइयों ने भी अपनी बहनों को स्नेह और आभार स्वरूप उपहार भेंट किए। मिठाइयों के साथ हंसी-खुशी का माहौल पूरे दिन बना रहा। कई स्थानों पर छोटे बच्चों ने भी अपने भाई-बहन के रिश्ते को यादगार बनाने के लिए रंगोली और दीप सजाए।

पर्व के दौरान मंदिर परिसर में स्थानीय युवाओं ने व्यवस्था संभाली ताकि पूजा सुचारू रूप से संपन्न हो सके। दिनभर भक्ति, उल्लास और प्रेम का रंग पूरे डुमरी क्षेत्र में छाया रहा।

न्यूज़ देखो: संस्कृति के रंग में रचा-बसा डुमरी का भाई दूज उत्सव

डुमरी में भाई दूज का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि यह समाज में प्रेम और एकता का सजीव उदाहरण बन गया। इस पर्व ने यह संदेश दिया कि रिश्तों की गरिमा और परंपराओं की शक्ति से ही समाज सशक्त बनता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

रिश्तों में अपनापन ही सबसे बड़ा त्यौहार

भाई दूज का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रेम, कर्तव्य और सम्मान से बड़ा कोई धर्म नहीं। आइए, इस परंपरा को आगे बढ़ाएं और अपने रिश्तों में सच्चाई, भरोसा और आदर का दीप जलाएं।
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