
#रांची #नगरनिकायचुनाव : प्रतीक आवंटन आदेश जारी होने से चुनावी तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार।
झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने रांची से निर्वाचन प्रतीक आवंटन आदेश 2026 जारी करते हुए 150 चुनाव चिह्नों की सूची अधिसूचित की है। इन प्रतीकों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिससे शहरी चुनाव प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जा सके। आयोग का यह कदम मतदाताओं और उम्मीदवारों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव 2026 के लिए प्रतीक आवंटन आदेश जारी किया।
- कुल 150 चुनाव चिह्न तय, तीन श्रेणियों में विभाजित।
- महापौर व अध्यक्ष पद के लिए अलग प्रतीक सूची।
- वार्ड पार्षद उम्मीदवारों के लिए अलग पहचान चिह्न।
- सुरक्षित प्रतीकों की व्यवस्था भी लागू।
झारखंड में वर्ष 2026 में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं। इसी क्रम में राज्य निर्वाचन आयोग ने एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय लेते हुए निर्वाचन प्रतीक आवंटन आदेश 2026 जारी कर दिया है। यह आदेश न केवल चुनावी प्रक्रिया की रूपरेखा को स्पष्ट करता है, बल्कि शहरी लोकतंत्र को अधिक व्यवस्थित और मतदाता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है।
150 चुनाव चिह्नों की व्यापक सूची
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस बार कुल 150 चुनाव चिह्न निर्धारित किए गए हैं। इन प्रतीकों में पारंपरिक चुनाव चिह्नों के साथ-साथ आधुनिक और नए प्रतीक भी शामिल हैं। माचिस की डिब्बी, कलम, कुर्सी जैसे आम प्रतीकों से लेकर रोबोट जैसे आधुनिक प्रतीकों को शामिल करना आयोग की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें मतदाता की पहचान और समझ को केंद्र में रखा गया है।
आयोग का मानना है कि विविध और स्पष्ट प्रतीकों से मतदाता बिना भ्रम के अपने पसंदीदा उम्मीदवार को पहचान सकेंगे, खासकर उन क्षेत्रों में जहां साक्षरता का स्तर अलग-अलग है।
तीन श्रेणियों में प्रतीकों का वर्गीकरण
प्रतीक आवंटन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए आयोग ने इन 150 प्रतीकों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है। प्रत्येक श्रेणी में 50-50 प्रतीक शामिल किए गए हैं।
महापौर और अध्यक्ष पद के लिए पहली श्रेणी
पहली श्रेणी में वे चुनाव चिह्न शामिल हैं, जो नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के महापौर एवं अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित किए गए हैं। ये प्रतीक मुक्त श्रेणी के अंतर्गत होंगे और उम्मीदवारों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवंटित किए जाएंगे। इस व्यवस्था से शीर्ष पदों के चुनाव में स्पष्टता और समानता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
वार्ड पार्षद उम्मीदवारों के लिए दूसरी श्रेणी
दूसरी श्रेणी विशेष रूप से वार्ड पार्षद पद के उम्मीदवारों के लिए तैयार की गई है। आयोग का कहना है कि अलग प्रतीक सूची होने से स्थानीय स्तर पर मतदाताओं को प्रत्याशियों की पहचान करने में आसानी होगी। वार्ड स्तर पर अक्सर उम्मीदवारों की संख्या अधिक होती है, ऐसे में स्पष्ट और अलग प्रतीकों से मतदान प्रक्रिया सरल और सुगम बनेगी।
सुरक्षित प्रतीकों की विशेष व्यवस्था
तीसरी श्रेणी में सुरक्षित चुनाव चिह्न शामिल किए गए हैं। इन प्रतीकों का उपयोग विशेष परिस्थितियों में किया जाएगा। यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध मुक्त प्रतीकों से अधिक हो जाती है, तो शेष उम्मीदवारों को इसी सुरक्षित सूची से क्रमवार प्रतीक आवंटित किए जाएंगे।
यह व्यवस्था चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की संभावना को कम करने में सहायक होगी। आयोग के अनुसार, यह एक बैकअप सिस्टम की तरह काम करेगा, जिससे प्रतीक आवंटन में किसी तरह की बाधा न आए।
चुनावी पारदर्शिता की दिशा में कदम
निर्वाचन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतीकों का स्पष्ट और श्रेणीबद्ध निर्धारण चुनावी पारदर्शिता को मजबूत करेगा। इससे न केवल प्रत्याशियों के बीच समान अवसर सुनिश्चित होगा, बल्कि मतदाताओं का भरोसा भी चुनाव प्रक्रिया पर और मजबूत होगा।
शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी और मतदाताओं की संख्या को देखते हुए आयोग की यह पहल समयानुकूल और व्यावहारिक मानी जा रही है।
न्यूज़ देखो: चुनावी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की पहल
निर्वाचन प्रतीक आवंटन आदेश 2026 यह दर्शाता है कि राज्य निर्वाचन आयोग नगर निकाय चुनावों को लेकर पूरी तरह गंभीर और तैयार है। प्रतीकों का आधुनिक और व्यवस्थित चयन मतदाता अनुभव को बेहतर बनाएगा। अब अगला महत्वपूर्ण चरण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और आचार संहिता से जुड़ा होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र को मजबूत बनाने में आपकी भूमिका अहम
नगर निकाय चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने शहर और मोहल्ले के भविष्य को दिशा देने का अवसर होते हैं। सही जानकारी, सजग मतदान और जागरूक भागीदारी से ही मजबूत शहरी लोकतंत्र संभव है।
इस महत्वपूर्ण निर्णय पर आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और अधिक से अधिक लोगों को जागरूक बनाने में योगदान दें।




