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तोलरा की बेटी आकांक्षा ने योगा स्पोर्ट्स में रचा राष्ट्रीय इतिहास, राज्य कैंप से नेशनल मंच तक पहुंची

#विश्रामपुर #योगा_खेल : ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर आकांक्षा ने राष्ट्रीय योगा स्पोर्ट्स में बनाई पहचान।

पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत तोलरा गांव की बेटी आकांक्षा तिवारी ने योगा स्पोर्ट्स में राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर झारखंड का नाम रोशन किया है। 50वीं सब जूनियर और जूनियर नेशनल योगा चैंपियनशिप में झारखंड टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने रजत पदक हासिल किया। एसजीएफएल ट्रायल में गोल्ड जीतने के बाद उनका चयन राज्य सरकार के विशेष प्रशिक्षण शिविर के लिए हुआ है। यह उपलब्धि ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए नई प्रेरणा बनकर सामने आई है।

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  • तोलरा गांव, विश्रामपुर प्रखंड की बेटी आकांक्षा की राष्ट्रीय उपलब्धि।
  • 50वीं नेशनल योगा चैंपियनशिप में झारखंड टीम से रजत पदक।
  • एसजीएफएल ट्रायल में गोल्ड के साथ झारखंड टीम में चयन।
  • राज्य सरकार के विशेष कैंप में राष्ट्रीय तैयारी होगी।
  • गांव, पंचायत और प्रखंड में खुशी की लहर

पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत तोलरा गांव की बेटी आकांक्षा तिवारी ने यह साबित कर दिया है कि अगर प्रतिभा को सही दिशा, सहयोग और अवसर मिले तो वह किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकती है। योगा स्पोर्ट्स जैसे अनुशासन और समर्पण से जुड़े खेल में आकांक्षा ने न केवल जिले और राज्य, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है।

ग्रामीण परिवेश से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

आकांक्षा तिवारी तोलरा गांव निवासी दीपक तिवारी, जो वर्तमान में पुलिस मुख्यालय रांची में कार्यरत हैं, की पुत्री हैं। ग्रामीण समाज में जहां अक्सर बेटियों को सीमित दायरे में रखने की सोच हावी रहती है, वहीं दीपक तिवारी ने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपनी बेटी को आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया। उन्होंने आकांक्षा को रांची में रहकर पढ़ाई और खेल दोनों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन आज वही निर्णय सैकड़ों बेटियों और अभिभावकों के लिए मिसाल बन गया है। आकांक्षा पिछले तीन वर्षों से लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं और इस दौरान उन्होंने सैकड़ों पुरस्कार, मेडल और शील्ड अपने नाम किए हैं।

राष्ट्रीय योगा चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन

रांची में आयोजित 50वीं सब जूनियर और जूनियर नेशनल योगा चैंपियनशिप में आकांक्षा ने झारखंड टीम का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतियोगिता में देशभर से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच झारखंड और पश्चिम बंगाल की टीम ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि महाराष्ट्र की टीम प्रथम स्थान पर रही।

आकांक्षा के प्रदर्शन को तकनीकी दक्षता, संतुलन, लचीलापन और आत्मविश्वास के लिए विशेष रूप से सराहा गया। उनके योगासन और प्रस्तुति ने निर्णायकों का ध्यान खींचा और टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई।

एसजीएफएल ट्रायल में गोल्ड मेडल

यह पहली बार नहीं है जब आकांक्षा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की हो। इससे पहले भी उनका चयन एसजीएफएल ट्रायल में हुआ था, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर झारखंड टीम में अपनी जगह पक्की की थी। लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण अब राज्य सरकार ने उनकी प्रतिभा को और निखारने के लिए विशेष कदम उठाया है।

राज्य सरकार के कैंप में होगा विशेष प्रशिक्षण

आकांक्षा के दादा गोखूल तिवारी ने बताया कि अब योगा स्पोर्ट्स में आकांक्षा की आगे की तैयारी झारखंड सरकार द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण कैंप में कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि आकांक्षा का प्रदर्शन इतना प्रभावशाली रहा है कि अब तक वह सैकड़ों मेडल और शील्ड प्राप्त कर चुकी हैं।

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गोखूल तिवारी ने यह भी कहा कि यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र की उपलब्धि है। सरकार के सहयोग से आकांक्षा को अब राष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।

गांव और प्रखंड में खुशी की लहर

आकांक्षा के चयन की खबर जैसे ही तोलरा गांव, पंचायत और पूरे विश्रामपुर प्रखंड में पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं और आकांक्षा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। लोगों का कहना है कि आकांक्षा ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो केवल सही मार्गदर्शन और समर्थन की।

बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी आकांक्षा

आकांक्षा की सफलता खास तौर पर बेटियों के लिए प्रेरणादायक है। जिस समाज में कभी बेटियों को घर की दहलीज तक सीमित रखने की सोच थी, उसी समाज की बेटी आज राष्ट्रीय मंच पर राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही है। यह बदलाव सोच, सहयोग और विश्वास का परिणाम है।

न्यूज़ देखो: जब अवसर मिलता है, तब प्रतिभा बोलती है

आकांक्षा तिवारी की कहानी यह दर्शाती है कि सरकारी सहयोग, पारिवारिक समर्थन और व्यक्तिगत अनुशासन मिलकर किस तरह राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी गढ़ सकते हैं। यह उपलब्धि खेल नीति, बेटियों की शिक्षा और ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए सकारात्मक संकेत है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सपनों को पंख देती एक सफलता

तोलरा की बेटी आकांक्षा ने यह साबित किया है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। जब बेटियों को विश्वास और अवसर मिलता है, तो वे पूरे समाज का सिर गर्व से ऊंचा कर देती हैं।
यह कहानी हर उस अभिभावक और हर उस बेटी के लिए संदेश है, जो आगे बढ़ना चाहती है।
आपकी राय क्या है? क्या ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को और अधिक मंच मिलने चाहिए—कमेंट करें, खबर साझा करें और प्रेरणा को आगे बढ़ाएं।

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Ram Niwas Tiwary

बिश्रामपुर, पलामू

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