
#बरवाडीह #शिक्षा_व्यवस्था : वर्षों पुराने भवन की छत पर भारी स्ट्रक्चर निर्माण से बढ़ी चिंता, दरारें बनीं खतरे की घंटी
- कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के आवासीय भवन की छत पर हो रहा है स्ट्रक्चर कमरों का निर्माण।
- भवन के पिछले हिस्से में फाउंडेशन में लगभग छह इंच तक की दरार आने की पुष्टि।
- दरार वाले हिस्से में बालू-मिट्टी की भराई होने की बात, आधार की मजबूती संदिग्ध।
- छत पर सैकड़ों टन वजनी लोहे के स्ट्रक्चर से अतिरिक्त कमरों का निर्माण जारी।
- कनीय अभियंता का गैर-जिम्मेदाराना बयान, कहा—“हमें जानकारी नहीं, देखना होगा।”
- स्थानीय लोगों व अभिभावकों ने उच्च स्तरीय तकनीकी जांच और निर्माण कार्य पर रोक की मांग की।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय अंतर्गत स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में चल रहा निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। विद्यालय के आवासीय भवन के सुदृढ़ीकरण और भवन की छत (स्लैब) पर स्ट्रक्चर कमरों के निर्माण को लेकर तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिससे वहां अध्ययनरत और निवासरत छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है।
यह विद्यालय सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग की बालिकाओं के लिए आवासीय शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां छात्राएं न केवल पढ़ाई करती हैं बल्कि दिन-रात इसी भवन में रहती भी हैं। ऐसे में भवन की संरचनात्मक मजबूती पर उठ रहे सवाल बेहद गंभीर माने जा रहे हैं।
वर्षों पुराने भवन में आई खतरनाक दरारें
स्थानीय सूत्रों और भवन की स्थिति से जुड़े जानकारों के अनुसार, विद्यालय भवन के पिछले हिस्से में, जहां सीढ़ी स्थित है, वहां फाउंडेशन यानी दीवार में करीब छह इंच तक की दरार आ गई है। बताया जा रहा है कि यह हिस्सा धीरे-धीरे खिसक चुका है। यह स्थिति अपने आप में किसी बड़े हादसे का संकेत मानी जा रही है।
दरारें केवल सतही नहीं बताई जा रही हैं, बल्कि भवन के आधार से जुड़ी हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में भवन के धंसने या गिरने जैसी गंभीर दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसका सीधा असर विद्यालय में रह रही सैकड़ों छात्राओं पर पड़ सकता है।
कमजोर आधार पर भारी स्ट्रक्चर, लापरवाही का आरोप
स्थानीय जानकारों ने यह भी आरोप लगाया है कि जहां दरारें आई हैं, वहां भीतर बालू और मिट्टी की भराई की गई है। इस प्रकार की भराई को अस्थायी और कमजोर आधार माना जाता है। ऐसे में उसी भवन की छत पर लोहे के भारी स्ट्रक्चर से अतिरिक्त कमरों का निर्माण किया जाना गंभीर तकनीकी लापरवाही को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छत पर बनने वाले इन स्ट्रक्चर कमरों का वजन सैकड़ों टन तक हो सकता है। यदि भवन की नींव और दीवारें पहले से कमजोर हैं, तो अतिरिक्त भार पूरे ढांचे के संतुलन को बिगाड़ सकता है। इससे न केवल दरारें और बढ़ सकती हैं, बल्कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
कनीय अभियंता का बयान बना सवालों की वजह
जब इस गंभीर मामले पर संबंधित कनीय अभियंता से प्रतिक्रिया ली गई, तो उनका बयान और भी चौंकाने वाला सामने आया। अभियंता ने कहा—
“इसके बारे में हमें जानकारी नहीं है, देखना होगा, हम नहीं देखे हैं।”
इस बयान ने विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस निर्माण कार्य में छात्राओं की जान दांव पर लगी हो, उस पर तकनीकी अधिकारी का इस तरह अनभिज्ञता जताना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अभियंता को निर्माण स्थल की स्थिति की जानकारी ही नहीं है, तो फिर निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की निगरानी कैसे हो रही है, यह अपने आप में बड़ा प्रश्न है।
अभिभावकों और ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
भवन की स्थिति सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि कस्तूरबा गांधी विद्यालय गरीब और वंचित परिवारों की बच्चियों के लिए है, जहां सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
अभिभावकों ने मांग की है कि—
- निर्माण कार्य की तत्काल उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
- जब तक भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रमाणित न हो, तब तक छत पर चल रहे निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए।
- दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की चुप्पी बढ़ा रही चिंता
अब तक इस पूरे मामले पर प्रखंड या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे लोगों में यह आशंका और गहरी हो गई है कि कहीं इस गंभीर मुद्दे को भी अन्य मामलों की तरह नजरअंदाज न कर दिया जाए।
स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में किसी दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा।


न्यूज़ देखो: लापरवाही या इंतजार किसी हादसे का?
बरवाडीह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का मामला केवल एक निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि बच्चियों की सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी का प्रश्न है। दरारें साफ चेतावनी दे रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने हुए हैं। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? इस सवाल का जवाब जल्द मिलना चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चियों की सुरक्षा से समझौता नहीं
आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली बच्चियां समाज की सबसे संवेदनशील जिम्मेदारी होती हैं।
निर्माण में लापरवाही भविष्य की पीढ़ी को खतरे में डाल सकती है।
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