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ओरसा घाटी बस हादसे में मृतकों की संख्या दस हुई, ब्रेक फेल और सड़क की खामी पर उठे सवाल

#लातेहार #सड़क_हादसा : महुआडांड़ थाना क्षेत्र में शादी में जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त, कई गंभीर घायल।

लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र की ओरसा घाटी में रविवार को हुए भीषण बस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर दस हो गई है। हादसा उस समय हुआ जब छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक रिजर्व बस वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थी। ब्रेक फेल होने के कारण बस गहरी घाटी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे मौके पर और इलाज के दौरान कई लोगों की मौत हो गई। घटना ने सड़क सुरक्षा, ओवरलोडिंग और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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  • ओरसा घाटी, महुआडांड़ थाना क्षेत्र में रविवार को हुआ भीषण बस हादसा।
  • कुल 10 लोगों की मौत, जिनमें 4 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल।
  • सभी मृतक छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के निवासी।
  • लगभग 40 घायलों को रेफर, 35 से अधिक का इलाज महुआडांड़ में।
  • बस की क्षमता 45, लेकिन 90 से अधिक यात्री सवार थे।
  • सड़क निर्माण में तकनीकी खामी और अधिक ढलान का आरोप।

लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ओरसा घाटी में रविवार को हुई बस दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक कुल दस लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अनुमंडल पदाधिकारी विपिन कुमार दुबे ने बताया कि पांच लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी, जबकि पांच अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के बाद इलाके में मातम का माहौल है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

बताया गया कि सभी मृतक छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रहने वाले थे। ये सभी लोग एक रिजर्व बस पर सवार होकर बलरामपुर से महुआडांड़ प्रखंड के लोध गांव में आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे थे। इसी दौरान ओरसा घाटी में बस का ब्रेक फेल हो गया, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

मृतकों की हुई पहचान

प्रशासन की ओर से सभी मृतकों की पहचान कर ली गई है। हादसे में जान गंवाने वालों में सीतापति देवी, प्रेमा देवी, सोनामती देवी, रेशन्ति चेरवा, सुखना भुइयां, विजय नगेसिया, लीलावती सोनवानी, रमेश मनिका, फगुआ राम और परशुराम सोनवानी शामिल हैं। इनमें चार महिलाएं और छह पुरुष हैं। हादसे की सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कई जनप्रतिनिधि भी महुआडांड़ पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

घायलों का इलाज और रेस्क्यू

हादसे में घायल हुए लोगों में से लगभग 40 लोगों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है, जबकि 35 से अधिक घायलों का इलाज महुआडांड़ में ही चल रहा है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय अस्पतालों में अचानक इतने घायलों के पहुंचने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया, लेकिन प्रशासन की तत्परता से स्थिति को संभाल लिया गया।

सड़क निर्माण में तकनीकी खामी का आरोप

घटना के बाद सड़क की बनावट और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सरपंच संघ के अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने आरोप लगाया कि जिस सड़क पर यह दुर्घटना हुई, उसके निर्माण में भारी तकनीकी फॉल्ट है।

सरपंच संघ के अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने कहा: “सड़क में किसी भी सूरत में 15 डिग्री से अधिक ढलान नहीं होना चाहिए, लेकिन यहां लगभग 30 डिग्री का ढलान है। इसी वजह से बस का ब्रेक फेल हुआ और यह हादसा हुआ।”

उन्होंने कहा कि एक सामान्य व्यक्ति भी इस तकनीकी खामी को आसानी से पहचान सकता है, फिर भी विभागीय अभियंताओं ने इसे कैसे स्वीकृति दी, यह समझ से परे है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सड़क निर्माण की इन खामियों को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो भविष्य में भी ऐसी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

ओवरलोडिंग भी बनी हादसे की वजह

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस बस में क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि बस की बैठने की क्षमता 45 लोगों की थी, लेकिन उसमें 90 से अधिक यात्री बैठे हुए थे। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान इस तरह की ओवरलोडिंग आम बात हो गई है, लेकिन प्रशासन को इस पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए।

एसडीएम की तत्परता से बचीं कई जानें

हादसे के बाद एसडीएम विपिन कुमार दुबे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत और बचाव कार्य को तेज किया। उन्होंने आसपास के अन्य प्रखंडों के स्वास्थ्य कर्मियों, लातेहार जिला मुख्यालय और गुमला जिले से भी एंबुलेंस और चिकित्सीय सुविधाएं मंगवाईं। इसके अलावा इलाके में संचालित सभी निजी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ को भी अलर्ट कर दिया गया।

छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी एंबुलेंस, चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ को बुलाया गया। प्रशासन की सक्रियता का ही परिणाम रहा कि एक घंटे के भीतर 25 से अधिक एंबुलेंस मौके पर पहुंच गईं और घायलों को समय रहते प्राथमिक इलाज के बाद रेफर किया जा सका।

एसडीएम विपिन कुमार दुबे ने कहा: “हमारी प्राथमिकता घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना था। सभी विभागों के समन्वय से राहत कार्य किया गया, जिससे कई लोगों की जान बच सकी।”

न्यूज़ देखो: सुरक्षा, जवाबदेही और सुधार की जरूरत

ओरसा घाटी बस हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की कई कमजोरियों को उजागर करता है। ओवरलोडिंग, सड़क निर्माण में तकनीकी खामियां और पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी—ये सभी इस हादसे के बड़े कारण बनकर सामने आए हैं। अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इन खामियों की जिम्मेदारी लेंगे और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हादसों से सबक लें, सुरक्षा को प्राथमिकता बनाएं

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर किया है कि सड़क सुरक्षा और नियमों की अनदेखी कितनी जानलेवा हो सकती है। प्रशासन, विभाग और आम नागरिक—सभी की साझा जिम्मेदारी है कि ओवरलोडिंग और असुरक्षित सड़कों पर आवाज उठाएं। नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।

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