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स्थानीय मजदूरों के हक की लड़ाई तेज, बालमुकुंद स्पांज आयरन के खिलाफ 17 फरवरी को विरोध मार्च की तैयारी

#गिरिडीह #श्रमिक_आंदोलन : भाकपा माले की टीम ने गंगापुर-सिरसिया पहुंचकर ग्रामीणों से आंदोलन को लेकर समर्थन जुटाया।

गिरिडीह प्रखंड के गादी श्रीरामपुर पंचायत अंतर्गत गंगापुर-सिरसिया में बालमुकुंद स्पांज आयरन प्रा. लि. के खिलाफ प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर हलचल तेज हो गई है। आगामी 17 फरवरी 2026 को होने वाले इस विरोध मार्च की तैयारी के तहत भाकपा माले की टीम गांव पहुंची। ग्रामीणों ने स्थानीय मजदूरों को रोजगार से वंचित किए जाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। इस पहल को क्षेत्र में मजदूर अधिकारों से जुड़े अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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  • 17 फरवरी 2026 को बालमुकुंद स्पांज आयरन प्रा. लि. के खिलाफ विरोध मार्च प्रस्तावित।
  • भाकपा माले की टीम ने गंगापुर-सिरसिया में ग्रामीणों से किया जनसंपर्क।
  • ग्रामीणों ने स्थानीय मजदूरों को काम न देने का लगाया गंभीर आरोप।
  • आंदोलन करने पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने की भी बात सामने आई।
  • मौके पर मसूदन कोल्ह, गुलाब कोल्ह, अरविंद टुडू सहित कई नेता उपस्थित।

गिरिडीह जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय मजदूरों के रोजगार का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। बालमुकुंद स्पांज आयरन प्रा. लि. के खिलाफ प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर भाकपा माले ने जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पार्टी की टीम गादी श्रीरामपुर पंचायत के गंगापुर-सिरसिया गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी गईं। बैठक के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला, पुरुष और युवा उपस्थित रहे।

विरोध मार्च को लेकर गांव-गांव संपर्क अभियान

भाकपा माले की टीम ने ग्रामीणों को 17 फरवरी 2026 को प्रस्तावित विरोध मार्च की जानकारी दी और उनसे सक्रिय सहभागिता की अपील की। टीम के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन स्थानीय मजदूरों के अधिकार और सम्मानजनक रोजगार की मांग को लेकर किया जा रहा है। गांववासियों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा करते हुए शारीरिक और आर्थिक रूप से सहयोग का आश्वासन दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से वे फैक्ट्री में काम की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। इस कारण आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा:

ग्रामीणों ने कहा: “जब भी हम लोग फैक्ट्री में काम मांगने जाते हैं, तो यह कहकर भगा दिया जाता है कि लोकल मजदूरों को काम नहीं दिया जाएगा। हमने कई बार आंदोलन किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, उल्टा हम पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।”

ग्रामीणों का यह भी कहना था कि बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि स्थानीय युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है।

भाकपा माले नेताओं की मौजूदगी

इस मौके पर भाकपा माले के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने ग्रामीणों की बातों को गंभीरता से सुना। बैठक में उपस्थित प्रमुख नेताओं में कॉमरेड मसूदन कोल्ह, गुलाब कोल्ह, अरविंद टुडू, धूमा टुडू और लखन कोल्ह शामिल थे।

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नेताओं ने कहा कि स्थानीय मजदूरों के साथ हो रहे कथित अन्याय को लेकर पार्टी लगातार आवाज उठाती रही है और आगे भी आंदोलन के माध्यम से दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी

बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और युवा भी मौजूद थे। महिलाओं ने कहा कि परिवार के पुरुषों को काम नहीं मिलने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। युवाओं ने रोजगार की कमी को क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बताया।

ग्रामीणों का मानना है कि अगर स्थानीय उद्योगों में ही स्थानीय लोगों को काम नहीं मिलेगा, तो पलायन बढ़ेगा और सामाजिक समस्याएं और गहराएंगी।

आंदोलन से क्या है अपेक्षा

भाकपा माले का कहना है कि विरोध मार्च के माध्यम से प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन का ध्यान स्थानीय मजदूरों की मांगों की ओर आकृष्ट किया जाएगा। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आगे और व्यापक आंदोलन किया जा सकता है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाएगा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल होगी।

न्यूज़ देखो: स्थानीय रोजगार बनाम औद्योगिक नीति

गंगापुर-सिरसिया में उठी यह आवाज केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के स्थानीय मजदूरों की पीड़ा को दर्शाती है। उद्योगों के विकास के साथ स्थानीय रोजगार सुनिश्चित करना प्रशासन और प्रबंधन दोनों की जिम्मेदारी है। यदि आरोप सही हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि विरोध मार्च के बाद प्रशासन और कंपनी प्रबंधन क्या कदम उठाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मजदूर अधिकारों के लिए एकजुटता की जरूरत

स्थानीय युवाओं और मजदूरों का हक तभी सुरक्षित रहेगा, जब वे संगठित होकर अपनी बात मजबूती से रखेंगे। रोजगार केवल आजीविका नहीं, बल्कि सम्मान और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।
आप भी ऐसे मुद्दों पर जागरूक बनें और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज उठाएं।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और स्थानीय रोजगार के अधिकार की इस लड़ाई को मजबूती दें।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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