
#खलारीरांची #चैतीछठ : नहाय-खाय से आरंभ महापर्व में व्रतियों ने पवित्रता के साथ संकल्प लिया।
रांची जिले के खलारी क्षेत्र में चार दिवसीय चैती छठ महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। पहले दिन श्रद्धालुओं ने नदी और तालाबों में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और व्रत का संकल्प लिया। आने वाले दिनों में खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ यह पर्व संपन्न होगा। यह पर्व लोक आस्था और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है।
- खलारी क्षेत्र में नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व का शुभारंभ।
- व्रतियों ने नदी और तालाबों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया।
- पहले दिन अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू का प्रसाद ग्रहण कर लिया संकल्प।
- दूसरे दिन खरना अनुष्ठान के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होगा।
- तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य, चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य।
- पूरे क्षेत्र में गूंज रहे पारंपरिक छठ गीत, वातावरण हुआ भक्तिमय।
रांची जिले के खलारी क्षेत्र में चैत नवरात्र के दौरान मनाया जाने वाला लोक आस्था का महान पर्व चैती छठ पूजा रविवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। इस अवसर पर सुबह से ही छठ व्रतियों के घरों में पारंपरिक गीतों की मधुर ध्वनि सुनाई देने लगी, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बन गया। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और शुद्धता के साथ इस पर्व का पालन कर रहे हैं।
नहाय-खाय के साथ व्रत का संकल्प
महापर्व के पहले दिन रविवार को छठ व्रतियों ने नदी एवं तालाबों में स्नान कर भगवान सूर्य को जल अर्पित किया। इसके बाद घरों में शुद्धता के साथ प्रसाद तैयार किया गया, जिसमें अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी शामिल रही। इस प्रसाद को ग्रहण कर व्रतियों ने चार दिवसीय कठिन व्रत का संकल्प लिया।
नहाय-खाय के दिन शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि पूरे व्रत के दौरान पवित्रता बनी रहे।
खरना के साथ शुरू होगा निर्जला व्रत
दूसरे दिन सोमवार को छठ व्रती दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को खरना का अनुष्ठान करेंगी। इस दिन सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य की पूजा कर व्रती केवल एक बार दूध और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगी।
एक व्रती महिला ने कहा: “छठ महापर्व हमारे लिए आस्था और अनुशासन का पर्व है, जिसमें नियमों का पालन बहुत जरूरी होता है।”
खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा, जो इस पर्व का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
संध्या और उषा अर्घ्य के साथ होगा समापन
तीसरे दिन मंगलवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगी। इसके लिए घाटों पर विशेष तैयारी की जा रही है, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटेंगे।
चौथे दिन बुधवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही इस चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा। इसके बाद व्रती प्रसाद वितरण कर पारण करेंगी और व्रत पूर्ण होगा।
छठ गीतों से गूंजा पूरा क्षेत्र
चैती छठ के आरंभ के साथ ही खलारी क्षेत्र में पारंपरिक छठ गीतों की गूंज सुनाई देने लगी है। सुबह-शाम घरों और घाटों पर श्रद्धालु गीत गाकर भगवान सूर्य की आराधना कर रहे हैं।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को भी मजबूत करता है।
न्यूज़ देखो: आस्था और अनुशासन का अनोखा संगम
चैती छठ महापर्व यह दर्शाता है कि भारतीय समाज में आज भी परंपराओं और आस्था का गहरा प्रभाव है। व्रतियों द्वारा कठोर नियमों और अनुशासन के साथ इस पर्व का पालन करना एक मिसाल है। यह पर्व पर्यावरण, स्वच्छता और सामूहिकता का भी संदेश देता है। क्या स्थानीय स्तर पर घाटों की सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है, इस पर ध्यान देना जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
श्रद्धा के साथ जिम्मेदारी निभाएं और परंपराओं को सहेजें
छठ महापर्व हमें न केवल आस्था, बल्कि अनुशासन और स्वच्छता का भी संदेश देता है। इस दौरान घाटों और आसपास के क्षेत्रों को साफ-सुथरा रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।यदि आप भी इस पर्व में शामिल हो रहे हैं, तो नियमों का पालन करें और दूसरों को भी जागरूक करें।छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।






