
#पोखरीकलां #धार्मिकजलसा : विभिन्न राज्यों से आए उलेमा ने अमन, तालिम और इंसानियत का संदेश दिया।
- पोखरी कलां, बरवाडीह में जमाले तैयबा कांफ्रेंस का भव्य आयोजन।
- कार्यक्रम का उद्घाटन विधायक रामचंद्र सिंह, हाजी मुमताज अली एवं कमेटी ने संयुक्त रूप से किया।
- उलेमा ने बच्चों को बेहतर तालिम देने पर विशेष जोर दिया।
- मौलाना गुलाम जिलानी, जमजम वैशालवी सहित कई राज्यों के वक्ताओं ने तकरीर पेश की।
- समाज में मोहब्बत, इंसानियत और एकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
- कार्यक्रम में सैकड़ों लोग और अल्पसंख्यक समुदाय के विभिन्न पदाधिकारी मौजूद रहे।
बरवाडीह प्रखंड के पोखरी कलां में शुक्रवार को जमाले तैयबा कमिटी की ओर से आयोजित जलसा सह दस्तारबंदी कार्यक्रम उत्साह और अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आगाज़ मनिका विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामचंद्र सिंह, हाजी मुमताज अली तथा कमिटी सदस्यों ने संयुक्त रूप से फिता काटकर किया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, विभिन्न राज्यों के उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता और समुदाय के प्रतिनिधि कार्यक्रम में उपस्थित हुए।
इस जलसे का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर धार्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को स्थापित करना तथा समाज में मोहब्बत और शांति का संदेश देना था।
उलेमा का संबोधन—बेहतर तालिम ही समाज के विकास की कुंजी
कार्यक्रम में उपस्थित उलेमा और वक्ताओं ने अपने संबोधन में शिक्षा, नैतिकता और एकता पर विशेष जोर दिया।
विधायक रामचंद्र सिंह ने बच्चों की शिक्षा को समाज की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि गरीबी मिटाने और बेहतर भविष्य की राह तालिम से होकर गुजरती है।
मौलाना गुलाम जिलानी का संदेश
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध अलिम मौलाना गुलाम जिलानी अजहरी ने कहा:
“एक नेक इंसान बनाने के लिए बच्चों को बेहतर तालिम देना जरूरी है। अच्छी शिक्षा ही समाज से बुराइयों को खत्म कर सकती है।”
उन्होंने कहा कि जब परिवार और समाज बच्चों को मजबूत शिक्षा और नैतिक संस्कार देंगे, तभी वे अच्छे नागरिक बनकर समाज को संवार सकते हैं।
मोहब्बत और इंसानियत पर जोर
कार्यक्रम में बिहार के मशहूर शायर जमजम वैशालवी, कोलकाता के मौलाना शहबाज नूरी, रहूल अमीन जबलपुरी और अन्य वक्ताओं ने एक से बढ़कर एक शायरियां और तकरीरें पेश कीं।
उलेमा ने कहा कि:
“इस्लाम मोहब्बत का पैगाम देता है, नफरत का नहीं।
एक-दूसरे की मदद करना ही इंसानियत है।”
उन्होंने राजनीतिक विवादों और व्यक्तिगत नाराजगी को समाज में ना फैलाने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक एकता, भाईचारा और सहयोग ही समुदाय की सबसे बड़ी ताकत है।
बड़ी संख्या में समुदाय और कमेटी के सदस्य शामिल
कार्यक्रम में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष नसीम अंसारी, शेर मोहम्मद अली, लाडले हसन, सफीक साहब, मंसूर अंसारी, समसूल अंसारी, ऐनामूल अंसारी, अनवर अंसारी, ऐनूल होदा, हदीश अंसारी, गुलाब अंसारी, दिलवार अंसारी, गैयास साहब, फिरोज अंसारी, रहीम साहब, सुभानी साहब, इमरोज़ अंसारी, सोएब अंसारी, रईस अंसारी, प्यारे हसन, मारूफ अंसारी, मंशुर आलम सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक प्रतिनिधि और कमिटी के सैकड़ों लोग मौजूद थे।
दस्तारबंदी कार्यक्रम ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण दस्तारबंदी सेरेमनी रहा, जिसमें कई बच्चों को अमन और ईमान की राह पर चलने की प्रेरणा दी गई। उपस्थित उलेमा ने बच्चों को नेक रास्ते पर चलने, बड़ों का सम्मान करने और शिक्षा को प्राथमिकता देने की हिदायत दी।

न्यूज़ देखो: सामाजिक और शैक्षणिक संदेश का प्रभाव
पोखरी कलां का यह जलसा न केवल धार्मिक कार्यक्रम था, बल्कि शिक्षा, इंसानियत और सामाजिक एकता पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा।
ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक सोच, पारस्परिक सहयोग और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
सरकार और समाज दोनों का प्रयास हो कि शिक्षा और भाईचारे का दायरा और अधिक विस्तृत हो।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा, एकता और इंसानियत—समाज की सबसे बड़ी पूंजी
अगर हर समुदाय बच्चों को बेहतर तालिम, सही मार्गदर्शन और नैतिक शिक्षा दे, तो समाज में अमन और भाईचारा स्वतः मजबूत होगा।
धार्मिक कार्यक्रम तभी सार्थक बनते हैं, जब वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दें।
आप इस तरह के सामाजिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों को कितना जरूरी मानते हैं?
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