पीरटांड़ में मां तारा बस का शीशा अचानक फूटा: तीन यात्री घायल, बड़ी दुर्घटना टली

पीरटांड़ में मां तारा बस का शीशा अचानक फूटा: तीन यात्री घायल, बड़ी दुर्घटना टली

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #सड़क_हादसा : छछन्दो में तेज दबाव से मां तारा बस का शीशा टूटा – चालक, उपचालक और महिला यात्री घायल, डॉक्टर ने मौके पर की मदद
  • पीरटांड़ प्रखंड के छछन्दो में मां तारा बस का सामने का शीशा अचानक टूट गया।
  • हादसे में बस चालक, उपचालक और एक महिला यात्री घायल हुए।
  • टूटे कांच के टुकड़ों से चेहरे और हाथ-पैर पर गहरे जख्म आए।
  • डॉ. एल. एन. दास ने मौके पर फर्स्ट एड देकर घायलों का प्राथमिक इलाज किया।
  • चालक ने सूझबूझ से बस को सड़क किनारे रोककर बड़ा हादसा टाल दिया
  • घटना के समय बस में करीब 40 यात्री सवार थे।

सोमवार की सुबह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड के छछन्दो में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रांची जा रही मां तारा बस का सामने का शीशा अचानक तेज हवा के दबाव से टूटकर बिखर गया। इस हादसे में चालक, उपचालक और चालक के पीछे बैठे एक महिला यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन चालक की सूझबूझ ने सभी की जान बचा ली।

बस में मचा हड़कंप, शीशे के टुकड़े उड़ते रहे

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस जब छछन्दो के पास पहुंची तो अचानक तेज हवा के दबाव से सामने का बड़ा शीशा टूट गया। टुकड़े हवा में उड़ते हुए बस के भीतर जा गिरे, जिससे चालक, उपचालक और महिला यात्री घायल हो गए। चालक के घुटने और हाथ, उपचालक के हाथ, और महिला के चेहरे पर गहरे जख्म आए। इसके बावजूद चालक ने हिम्मत नहीं हारी और तुरंत बस को नियंत्रित कर सड़क किनारे सुरक्षित रोक दिया

डॉक्टर ने दिखाई मानवता

हादसे के समय बस में सवार डॉ. एल. एन. दास, जो गिरिडीह सदर प्रखंड और सेंट्रल जेल के पूर्व चिकित्सा प्रभारी रह चुके हैं, ने तत्काल मानवता की मिसाल पेश की। उन्होंने अपने बैग में रखे फर्स्ट एड किट से घायलों का प्राथमिक उपचार किया और उन्हें राहत दी। यात्रियों ने डॉक्टर की इस तत्परता की सराहना की।

डॉ. एल. एन. दास ने कहा: “स्थिति अचानक बनी थी, लेकिन तुरंत प्राथमिक उपचार देने से घायलों को काफी राहत मिली। बड़ी दुर्घटना टल गई, यह सबसे बड़ी राहत की बात है।”

चालक की सूझबूझ से बची कई जानें

हादसे के वक्त बस की रफ्तार तेज थी और उसमें लगभग 40 यात्री सवार थे। शीशा टूटने से बस का संतुलन बिगड़ सकता था, लेकिन चालक ने खुद घायल होने के बावजूद धैर्य और सतर्कता दिखाते हुए बस को संभाल लिया। यात्रियों का कहना है कि अगर चालक घबराता, तो वाहन पलट सकता था और दर्जनों जानें खतरे में पड़ जातीं।

प्रशासन से जांच की मांग

स्थानीय यात्रियों और ग्रामीणों ने घटना की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि तेज हवा के बावजूद बसों के शीशों का इस तरह टूटना सामान्य नहीं है। संभवतः शीशा कमजोर या पहले से क्षतिग्रस्त रहा होगा। यात्रियों ने परिवहन विभाग से आग्रह किया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बसों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए।

न्यूज़ देखो: सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर बड़ा सवाल

यह घटना एक चेतावनी है कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। सौभाग्य से इस बार चालक की सूझबूझ और डॉक्टर की तत्परता से जानें बच गईं, लेकिन प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि बसों की तकनीकी जांच और रखरखाव नियमित रूप से हो। यात्रियों की सुरक्षा से बड़ा कोई प्राथमिकता नहीं हो सकती।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सावधानी ही सुरक्षा की कुंजी

यह घटना बताती है कि सड़क पर जिम्मेदारी और सतर्कता कितनी अहम है। चालक, यात्री और परिवहन विभाग – तीनों को अपनी भूमिका समझनी होगी। सुरक्षित यात्रा केवल भाग्य नहीं, बल्कि सजगता और तैयारी से संभव है।
सुरक्षा अपनाएं, सतर्क रहें। अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को साझा करें ताकि हर बस यात्रा सुरक्षित बन सके।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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