सिसई के छरदा रोड पर भव्य गंगा आरती ने रचा आध्यात्मिक इतिहास, हजारों श्रद्धालु भक्ति में डूबे

सिसई के छरदा रोड पर भव्य गंगा आरती ने रचा आध्यात्मिक इतिहास, हजारों श्रद्धालु भक्ति में डूबे

author Udaychand Kumar
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#सिसई #गंगा_आरती : छरदा रोड स्थित मंदिर परिसर में भव्य आरती का आयोजन हुआ।

गुमला जिले के सिसई प्रखंड के छरदा रोड स्थित अंबिकेश्वर शिव मंदिर में सोमवार शाम भव्य गंगा आरती का आयोजन किया गया। बनारस की तर्ज पर आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर निर्माण के बाद यह पहला बड़ा धार्मिक आयोजन था, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में भजन, जागरण और भंडारा का भी आयोजन किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया।

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  • सिसई के छरदा रोड स्थित अंबिकेश्वर शिव मंदिर में भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ।
  • बनारस के तर्ज पर आयोजित आरती में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
  • पीयूष पाठक की टीम ने विधिवत गंगा आरती संपन्न कराई।
  • छोटे लक्खा (धनबाद) के भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।
  • पूरी रात जागरण व भंडारा का आयोजन, भक्तों ने लगाए जयकारे।

सिसई प्रखंड के छरदा रोड स्थित गुरूबाबू कॉम्प्लेक्स के पास बने नवनिर्मित अंबिकेश्वर शिव मंदिर में सोमवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार आयोजित गंगा आरती ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक माहौल में रंग दिया। बनारस की तर्ज पर हुई इस भव्य आरती में हजारों श्रद्धालु अपने परिवार के साथ शामिल हुए और देर रात तक भक्ति में डूबे रहे।

मंदिर निर्माण के बाद पहला बड़ा आयोजन

हाल ही में बने अंबिकेश्वर शिव मंदिर में नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना विधि-विधान के साथ की गई थी। इस मंदिर का निर्माण स्वर्गीय गुरूबाबू अंबिका प्रसाद की स्मृति में उनके पुत्र राजकिशोर प्रसाद शर्मा द्वारा कराया गया है। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन ने मंदिर को क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र बना दिया है।

बनारस की तर्ज पर संपन्न हुई गंगा आरती

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत रही बनारस की तर्ज पर आयोजित गंगा आरती। मुख्य पुजारी सुर्यनारायण पाठक के निर्देशन में आरती संपन्न हुई, जबकि बनारस के पीयूष पाठक की टीम ने इसे विशेष रूप से प्रस्तुत किया।

सुर्यनारायण पाठक ने कहा: “इस प्रकार की आरती से न केवल धार्मिक वातावरण मजबूत होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।”

आरती के दौरान पूरा परिसर “हर हर महादेव”, “जय श्री राम” और “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार ने वातावरण को अत्यंत दिव्य बना दिया।

भजन और जागरण में झूमे श्रद्धालु

गंगा आरती के बाद रात्रि में भव्य जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें रांची, धनबाद और हजारीबाग की टीमों ने भाग लिया। धनबाद के प्रसिद्ध भजन गायक छोटे लक्खा ने अपनी मधुर आवाज से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पूरी रात भक्ति गीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते रहे। कार्यक्रम के दौरान भक्तों के लिए विशेष भंडारे की भी व्यवस्था की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

सामाजिक और धार्मिक एकता का दिखा अद्भुत उदाहरण

इस आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ शामिल हुए। मुख्य यजमान के रूप में पीयूष मिश्रा सह रश्मि मिश्रा, रोहित मिश्रा सह श्रुति मिश्रा, मुकेश श्रीवास्तव डेविड सह उर्वशी देवी समेत कई गणमान्य लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।

इसके अलावा कार्यक्रम में गुरु बाबू राजकिशोर शर्मा, शंभू प्रसाद शर्मा, रोहित शर्मा, शैलेश शर्मा, नीलेश शर्मा, डॉ. मुकेश कुमार पाठक, सौरभ शर्मा, सुधीर ओहदार, पंकज साहु सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह और आस्था

कार्यक्रम में शामिल हुए श्रद्धालुओं ने इसे अविस्मरणीय अनुभव बताया। लोगों का कहना था कि इस तरह के आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देते हैं और समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।

रोहित शर्मा ने कहा: “यह मंदिर और इस तरह के आयोजन हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने का माध्यम हैं।”

न्यूज़ देखो: आस्था और संस्कृति का संगम बना सिसई

सिसई में आयोजित यह गंगा आरती सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामूहिक आस्था का प्रतीक बनकर उभरा है। इस आयोजन ने यह दिखाया कि छोटे क्षेत्रों में भी बड़े स्तर के धार्मिक आयोजन संभव हैं। ऐसे प्रयास न केवल समाज को जोड़ते हैं बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से भी जोड़ते हैं। सवाल यह है कि क्या इस तरह के आयोजन को नियमित रूप दिया जाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था से जुड़ें, संस्कृति को अपनाएं और समाज को मजबूत बनाएं

धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। ऐसे कार्यक्रम हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा देते हैं।

आप भी अपने क्षेत्र में इस तरह के सकारात्मक आयोजनों को बढ़ावा दें।
संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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Written by

सिसई, गुमला

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