लोहरदगा में नवसंवत्सर और नवरात्र पर रामोत्सव का भव्य शुभारंभ धर्म और मर्यादा का संदेश गूंजा

लोहरदगा में नवसंवत्सर और नवरात्र पर रामोत्सव का भव्य शुभारंभ धर्म और मर्यादा का संदेश गूंजा

author News देखो Team
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#लोहरदगा #रामोत्सव_नवसंवत्सर : भगवा ध्वज पूजन और हनुमान चालीसा पाठ से कार्यक्रम शुरू हुआ।

लोहरदगा में हिन्दू नववर्ष संवत्सर 2083 और नवरात्र के आगमन पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा रामोत्सव का शुभारंभ किया गया। वीर शिवाजी चौक स्थित सिद्धि दात्री दुर्गा मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक पाठ का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश देना रहा।

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  • लोहरदगा के सिद्धि दात्री दुर्गा मंदिर में रामोत्सव का शुभारंभ।
  • भगवा ध्वज पूजन, भारत माता आरती और हनुमान चालीसा पाठ आयोजित।
  • अनिल उराँव ने धर्म स्थापना और मर्यादा पर दिया संदेश।
  • कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की अहम भूमिका।
  • नौ दिनों तक रामोत्सव मनाने का निर्णय।
  • कई राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल।

लोहरदगा में हिन्दू नववर्ष संवत्सर 2083 और नवरात्र के अवसर पर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। वीर शिवाजी चौक स्थित सिद्धि दात्री दुर्गा मंदिर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेतृत्व में रामोत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम में पारंपरिक विधि-विधान और सामूहिक सहभागिता ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।

पारंपरिक विधि-विधान से हुआ रामोत्सव का शुभारंभ

रामोत्सव की शुरुआत भगवा ध्वज पूजन, भारत माता आरती और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ की गई। सिद्धि दात्री दुर्गा मंदिर के पुजारी द्वारा धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कराई गई।

पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।

धर्म और मर्यादा का संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उराँव ने कहा:

अनिल उराँव ने कहा: “मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और माता दुर्गा का अवतरण पापियों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था।”

उन्होंने आगे कहा:

“भगवान श्रीराम का जीवन हमें त्याग, समर्पण और समानता का संदेश देता है, जिसे हमें अपने जीवन में अपनाना चाहिए।”

उन्होंने माता दुर्गा के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि पापियों के विनाश के कारण उन्हें चंडी भी कहा जाता है, जो अन्याय के खिलाफ शक्ति का प्रतीक है।

भगवान श्रीराम के आदर्शों पर विशेष जोर

अनिल उराँव ने भगवान श्रीराम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पिता के वचन के लिए वनवास स्वीकार किया, माता सीता के प्रति समर्पण दिखाया और समाज में समानता का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि श्रीराम ने अपने आचरण से यह सिखाया कि समाज में ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी को समान सम्मान देना चाहिए।

भगवा ध्वज को बताया धर्म का प्रतीक

अपने संबोधन में उन्होंने भगवा ध्वज को हिन्दू धर्म की अक्षुण्यता और गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भगवा ध्वज को देखकर हर व्यक्ति के मन में गर्व और आत्मसम्मान की भावना जागृत होती है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित

इस आयोजन में नगर अध्यक्ष अनिल उराँव, भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष अजातशत्रु, विश्व हिंदू परिषद अध्यक्ष रीतेश कुमार, केंद्रीय महावीर मंडल अध्यक्ष विपुल तामेड़ा, भाजपा युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष बाल्मीकि कुमार, बजरंग दल जिला संयोजक पवन कुमार प्रजापति, नगर संयोजक राजकुमार साहू, जिला सह संयोजक निशांत कुमार वर्मा, नीरज साहू, नगर सह संयोजक अनुभव कुमार, विवेक कुमार, सुरक्षा प्रमुख प्रद्युमन पाठक, गौ रक्षा प्रमुख विकास यादव, सदस्य बिट्टू साहू, नीरज कुमार, सुभाष, लोकेश, रितेश मेहता, सूरज सिंह, आदर्श केशरी, अमरजीत कांस्यकार, राजकुमार, विकास प्रजापति, अमनदीप पाण्डेय, प्रकाश सिंह, अजय कुमार, आयुष राज, अंकित कुमार, अभिभावक लाल ओंकार नाथ साहदेव, विजय खत्री, अरुण कुमार, शंकर प्रजापति सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

नौ दिनों तक चलेगा रामोत्सव

समिति द्वारा जानकारी दी गई कि यह रामोत्सव नौ दिनों तक लगातार विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा, जिसमें अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

न्यूज़ देखो: संस्कृति और सामाजिक एकता का मजबूत संदेश

लोहरदगा में आयोजित यह रामोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने का एक प्रभावशाली माध्यम है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। हालांकि, बड़े आयोजनों में शांति और व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। क्या आने वाले दिनों में यह आयोजन और व्यापक स्तर पर लोगों को जोड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी संस्कृति से जुड़ें और समाज को मजबूत बनाएं

रामोत्सव जैसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा का संदेश है।

आइए, हम सभी मिलकर अपने समाज में भाईचारे, समानता और सद्भावना को बढ़ावा दें। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर अपने संस्कारों को मजबूत करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

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