लोहरदगा में गंगा दशहरा की तैयारियां शुरू, मंदिर में बच्चियों ने शुरू किया आरती अभ्यास

लोहरदगा में गंगा दशहरा की तैयारियां शुरू, मंदिर में बच्चियों ने शुरू किया आरती अभ्यास

author News देखो Team
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#लोहरदगा #गंगा_दशहरा : सिद्धिदात्री दुर्गा मंदिर में बच्चियों का उत्साहपूर्ण आरती अभ्यास प्रारंभ।

लोहरदगा जिले में गंगा दशहरा पर्व को लेकर धार्मिक तैयारियां शुरू हो गई हैं। वीर शिवाजी चौक स्थित सिद्धिदात्री दुर्गा मंदिर परिसर में बच्चियों द्वारा आरती अभ्यास का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उन्हें मां गंगा के महत्व और धार्मिक परंपराओं की जानकारी दी गई। यह पहल बच्चों में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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  • सिद्धिदात्री दुर्गा मंदिर, वीर शिवाजी चौक में शुरू हुआ अभ्यास।
  • गंगा दशहरा को लेकर बच्चियों ने किया आरती अभ्यास
  • अशोक कसकर और पुजारी हरिहर शास्त्री ने दी जानकारी।
  • मां गंगा को बताया पवित्रता और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक
  • बच्चियों को पूजा विधि और धार्मिक परंपराओं का प्रशिक्षण

लोहरदगा जिले में आगामी गंगा दशहरा पर्व को लेकर धार्मिक माहौल बनने लगा है। इसी क्रम में मंगलवार को शहर के वीर शिवाजी चौक स्थित सिद्धिदात्री दुर्गा मंदिर प्रांगण में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां बच्चियों ने उत्साहपूर्वक आरती अभ्यास की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ना और उन्हें सांस्कृतिक मूल्यों की जानकारी देना है।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला, जहां बच्चियों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ आरती की तैयारी की। यह अभ्यास गंगा दशहरा के दिन होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए किया जा रहा है।

बच्चियों में दिखा उत्साह और श्रद्धा

आरती अभ्यास के पहले दिन बच्चियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने सामूहिक रूप से आरती के विभिन्न चरणों का अभ्यास किया और पूजा की विधियों को सीखा। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बना रहा।

धार्मिक महत्व की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के प्रभारी अशोक कसकर और मंदिर के पुजारी हरिहर शास्त्री ने बच्चियों को मां गंगा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

हरिहर शास्त्री ने कहा: “मां गंगा शीतलता, पवित्रता और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक हैं। उनका स्मरण मात्र ही मन को शांति प्रदान करता है।”

उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा की उत्पत्ति भगवान विष्णु के चरणों से हुई, इसलिए उन्हें ‘विष्णुपदी’ कहा जाता है। बाद में वे ब्रह्मा जी के कमंडल में समाहित होकर स्वर्ग में प्रवाहित होती रहीं।

भागीरथ और भगवान शिव की कथा

कार्यक्रम के दौरान बच्चियों को गंगा अवतरण की कथा भी सुनाई गई। बताया गया कि राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं। लेकिन उनके तेज प्रवाह से पृथ्वी को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर उनके वेग को नियंत्रित किया।

यह कथा बच्चों के लिए न केवल धार्मिक ज्ञान का स्रोत बनी, बल्कि उन्हें धैर्य, समर्पण और आस्था का संदेश भी मिला।

पूजा विधि और परंपराओं का प्रशिक्षण

बच्चियों को केवल आरती ही नहीं, बल्कि संपूर्ण पूजा विधि और धार्मिक परंपराओं की भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि गंगा दशहरा के दिन किस प्रकार पूजा की जाती है और किस तरह से विधिवत कार्यक्रम में भाग लेना चाहिए।

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझे और उसे आगे बढ़ाए।

न्यूज़ देखो: परंपरा से जुड़ती नई पीढ़ी

लोहरदगा में इस तरह की पहल यह दर्शाती है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने के लिए बच्चों को प्रारंभ से ही जोड़ना जरूरी है। जहां एक ओर आधुनिकता का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं इस तरह के आयोजन संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। क्या ऐसे प्रयास अन्य क्षेत्रों में भी नियमित रूप से किए जाएंगे, यह देखना अहम होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संस्कृति से जुड़ें, परंपराओं को आगे बढ़ाएं

हमारी पहचान हमारी संस्कृति और परंपराओं से ही बनती है।
नई पीढ़ी को इन मूल्यों से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।
छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं।
अपने बच्चों को भी ऐसे आयोजनों में शामिल करें और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ें।

आइए, मिलकर अपनी विरासत को संजोएं और आगे बढ़ाएं।
इस खबर को शेयर करें, अपनी राय कमेंट में दें और जागरूकता फैलाएं।

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