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मदानभेड़ और रामसिंगा की गूंज के साथ दुमका में 136वें राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव का भव्य आगाज

#दुमका #हिजला_मेला : आठ दिवसीय परंपरागत महोत्सव का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ।

दुमका में 13 फरवरी से 136वें राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के साथ हुई। ग्राम प्रधान इमानवेल हांसदा ने फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया और परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। आठ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में सांस्कृतिक, खेलकूद और कृषि प्रदर्शनी कार्यक्रम शामिल हैं। प्रशासन ने मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा है।

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  • दुमका में 13 से 20 फरवरी तक आयोजित 136वां राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव
  • ग्राम प्रधान इमानवेल हांसदा ने फीता काटकर किया उद्घाटन।
  • दिसोम मरांग बुरू की विधिवत पूजा के साथ परंपरा का निर्वाह।
  • अनुमंडल पदाधिकारी कौशल कुमार ने कृषि प्रदर्शनी व खेल कार्यक्रम की शुरुआत की।
  • उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य दोहराया।

दुमका की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव का 136वां संस्करण इस वर्ष पूरे पारंपरिक वैभव के साथ शुरू हुआ। 13 फरवरी से प्रारंभ यह आठ दिवसीय मेला 20 फरवरी तक चलेगा। उद्घाटन समारोह में पारंपरिक वाद्य यंत्र मदानभेड़ और रामसिंगा की गूंज ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया। बड़ी संख्या में ग्रामीण, कलाकार, छात्र-छात्राएं और प्रशासनिक अधिकारी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

परंपरा के अनुरूप ग्राम प्रधान ने किया उद्घाटन

हिजला मेले की सबसे विशिष्ट परंपरा यह है कि इसका उद्घाटन किसी जनप्रतिनिधि द्वारा नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान द्वारा किया जाता है। इस वर्ष भी ग्राम प्रधान इमानवेल हांसदा ने फीता काटकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। उद्घाटन से पूर्व हिजला परिसर स्थित दिसोम मरांग बुरू की पूजा-अर्चना कर परंपरा का निर्वाह किया गया।

पूजा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए समुदाय के लोगों ने प्रकृति और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह आयोजन जनजातीय संस्कृति और आस्था की गहरी जड़ों को दर्शाता है।

शोभा यात्रा और सांस्कृतिक उल्लास

उद्घाटन से पहले मूक-बधिर विद्यालय हिजला से मेला परिसर तक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में छात्र-छात्राएं, पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक धुनों के बीच निकली यह यात्रा पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना गई।

कई विद्यालयों और आवासीय स्कूलों के विद्यार्थियों ने पारंपरिक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। जनजातीय लोकनृत्य की झलकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक गीतों ने मेले की गरिमा को और बढ़ाया।

कृषि प्रदर्शनी और खेलकूद की शुरुआत

अनुमंडल पदाधिकारी कौशल कुमार ने कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने क्रीड़ा ध्वज फहराकर और तीर चलाकर खेलकूद कार्यक्रमों की शुरुआत कराई। इस अवसर पर स्थानीय किसानों और प्रतिभागियों ने अपनी कृषि उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन किया।

अनुमंडल पदाधिकारी कौशल कुमार ने कहा: “हिजला मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि नवाचार को बढ़ावा देने का मंच भी है।”

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कृषि प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीजों और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिससे किसानों को नई जानकारी और प्रेरणा मिले।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि हिजला मेला परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य इस ऐतिहासिक मेले को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।

उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा: “हम हिजला मेले की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए इसे वैश्विक मंच पर स्थापित करना चाहते हैं।”

उन्होंने बताया कि मेले के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक संध्याएं, खेल प्रतियोगिताएं और विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान

मेला क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से पुलिस बल की तैनाती, भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा सुविधा और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। आगंतुकों की सुविधा के लिए विभिन्न विभागों की ओर से सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं।

मेले में दूर-दराज से आने वाले लोगों को देखते हुए यातायात प्रबंधन और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने सभी आगंतुकों से नियमों का पालन करने और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

न्यूज़ देखो: सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान की दिशा

136वां हिजला मेला यह साबित करता है कि परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शक्ति भी है। ग्राम प्रधान द्वारा उद्घाटन की परंपरा इस आयोजन को विशिष्ट बनाती है। यदि प्रशासन और समाज मिलकर प्रयास करें तो यह मेला अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर

हिजला मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी पहचान का उत्सव है।
यह हमें हमारी परंपराओं, कला और सामुदायिक एकता से जोड़ता है।
ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी संस्कृति को सहेज सकते हैं।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराना हम सबकी जिम्मेदारी है।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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