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जिस हाथ से कभी अनुशासन मिला, आज उसी हाथ से सम्मान की माला — उत्क्रमित मध्य विद्यालय दरूआ में भावनाओं से भरा ऐतिहासिक पल

#पाण्डु #शिक्षा_सम्मान : पूर्व छात्र और पत्रकार तीर्थ राज दुबे को उनके ही गुरुजनों ने विद्यालय प्रांगण में किया सम्मानित
  • उत्क्रमित मध्य विद्यालय दरूआ में भावनात्मक और प्रेरणादायक सम्मान समारोह आयोजित।
  • विद्यालय के पूर्व छात्र एवं पत्रकार तीर्थ राज दुबे को गुरुजनों द्वारा सम्मानित किया गया।
  • सम्मान के दौरान गुरु-शिष्य संबंधों की गहरी भावनात्मक झलक देखने को मिली।
  • तीर्थ राज दुबे ने अपने शिक्षकों रविन्द्र लाल, बैजनाथ मेहता और शोभा मैडम को बताया जीवन का मार्गदर्शक।
  • कार्यक्रम के दौरान मेधावी विद्यार्थियों को मेडल वितरण भी किया गया।
  • विद्यालय परिवार और बच्चों के लिए यह पल बना प्रेरणा और गर्व का क्षण

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय दरूआ का प्रांगण उस समय इतिहास का साक्षी बना, जब इसी विद्यालय के पूर्व छात्र और वर्तमान में पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके तीर्थ राज दुबे को उनके ही गुरुजनों द्वारा सम्मानित किया गया। यह दृश्य केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कार और सम्मान के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण बन गया।

जिस विद्यालय की कक्षाओं में बैठकर उन्होंने अक्षर ज्ञान प्राप्त किया, जहाँ कभी छोटी-सी गलती पर गुरुजनों की डांट और अनुशासन ने उन्हें जीवन की राह सिखाई, आज उसी विद्यालय में उन्हीं हाथों से सम्मान की माला पहनाया जाना भावनाओं से भर देने वाला क्षण था। यह पल न केवल तीर्थ राज दुबे के लिए, बल्कि विद्यालय परिवार, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत गौरवपूर्ण रहा।

भावनाओं से भरा सम्मान समारोह

सम्मान के समय तीर्थ राज दुबे अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। कुछ क्षणों के लिए वे निःशब्द खड़े रहे, आंखें नम थीं और शब्द मानो साथ छोड़ चुके थे। पूरा प्रांगण तालियों की गूंज और भावनात्मक माहौल से भर गया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि गुरु और शिष्य का रिश्ता समय, पद या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सम्मान, संस्कार और आत्मीयता से मजबूत होता है।

तीर्थ राज दुबे ने कहा: “जिस हाथ से कभी अनुशासन मिला था, आज उसी हाथ से सम्मान की माला पहनाई गई। एक शिष्य के जीवन में इससे बड़ा गर्व और क्या हो सकता है।”

गुरुजनों का ऋण जीवन भर रहेगा

अपने संबोधन में तीर्थ राज दुबे ने भावुक स्वर में कहा कि शिक्षक रविन्द्र लाल, बैजनाथ मेहता और शोभा मैडम ने उन्हें केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान नहीं दिया, बल्कि जीवन को समझने, संघर्ष करने और सही दिशा में आगे बढ़ने की सीख भी दी। उन्होंने कहा कि आज जो भी पहचान उन्हें मिली है, वह गुरुजनों की मेहनत, डांट, स्नेह और आशीर्वाद का ही परिणाम है।

उन्होंने बताया कि विद्यालय में बिताए गए वे दिन आज भी उनके जीवन की सबसे मजबूत नींव हैं, जिन्होंने उन्हें आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना सिखाई।

विद्यार्थियों के लिए बना प्रेरणादायक पल

सम्मान समारोह के दौरान तीर्थ राज दुबे के हाथों से विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और गर्व साफ झलक रहा था। उनके लिए यह पल किसी प्रेरणा से कम नहीं था, क्योंकि उनके सामने खड़ा व्यक्ति कभी उन्हीं की तरह इसी विद्यालय का छात्र रहा है और आज समाज में एक पहचान बना चुका है।

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इस दृश्य ने बच्चों को यह संदेश दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत के साथ गुरुजनों का मार्गदर्शन मिले, तो किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।

शिक्षकों ने जताया गर्व

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने कहा कि जब विद्यालय का कोई छात्र आगे चलकर समाज में अपनी पहचान बनाता है और फिर उसी विद्यालय में लौटकर बच्चों को प्रेरित करता है, तो यह पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय होता है। ऐसे क्षण शिक्षकों के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होते हैं।

कृतज्ञता के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंत में पत्रकार तीर्थ राज दुबे ने अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा:

“ऐसे गुरुजनों को मेरी ओर से, एक शिष्य और एक पत्रकार के रूप में, कोटि-कोटि नमन और धन्यवाद।”

यह सम्मान समारोह न केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि का उत्सव था, बल्कि शिक्षा, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा की अमिट शक्ति का सजीव उदाहरण भी बना।

न्यूज़ देखो: गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल

उत्क्रमित मध्य विद्यालय दरूआ में हुआ यह सम्मान समारोह यह दिखाता है कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि संस्कार और संबंधों की नींव है। ऐसे पल समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

गुरु का सम्मान, समाज का गौरव

जब शिष्य अपने गुरु को नहीं भूलता, तब समाज मजबूत होता है।
इस प्रेरणादायक खबर को साझा करें, अपने गुरुजनों को याद करें और कमेंट में अपने अनुभव जरूर लिखें।

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Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

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