
#झारखंड #मानवहाथीसंघर्ष : विधानसभा में विधायक भूषण बाड़ा ने उठाया मुद्दा — राज्य में करीब 600 हाथियों की मौजूदगी स्वीकार।
झारखंड विधानसभा में मंगलवार को बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष का गंभीर मुद्दा उठाया गया। सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से राज्य के कई जिलों में बढ़ती घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा। सरकार ने स्वीकार किया कि वर्ष 2019 से 2026 के बीच हाथियों के हमले में 474 से अधिक लोगों की मौत हुई है। राज्य में फिलहाल लगभग 600 हाथियों की मौजूदगी बताई गई है।
- सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने विधानसभा में उठाया मानव-हाथी संघर्ष का मुद्दा।
- 2019 से 2026 तक हाथियों के हमले में 474 से अधिक लोगों की मौत दर्ज।
- सरकार ने स्वीकार किया — झारखंड में लगभग 600 हाथियों की मौजूदगी।
- रामगढ़, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, पलामू, लातेहार, सिमडेगा, गुमला, खूंटी सहित कई जिले प्रभावित।
- समस्या से निपटने के लिए QRT टीम, वॉच टावर, हमर हाथी ऐप और जागरूकता अभियान शुरू।
- जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक से प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को लाने की योजना।
झारखंड में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष का मुद्दा मंगलवार को विधानसभा में जोरदार तरीके से गूंजा। सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र के विधायक भूषण बाड़ा ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से इस गंभीर समस्या को सदन में उठाया और सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में लगातार हाथियों के गांवों में घुसने, फसलों को नुकसान पहुंचाने और लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सरकार ने विधानसभा में दिए गए जवाब में स्वीकार किया कि मानव-हाथी संघर्ष राज्य में एक गंभीर समस्या का रूप लेता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2026 के बीच हाथियों के हमले में 474 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जो प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है।
कई जिलों में बढ़ रही हाथियों की गतिविधियां
विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक भूषण बाड़ा ने बताया कि झारखंड के कई जिलों में हाथियों के झुंड लगातार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से रामगढ़, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, पलामू, लातेहार, सिमडेगा, गुमला और खूंटी जैसे जिलों में हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि रात के समय हाथियों के झुंड खेतों और गांवों में पहुंच जाते हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहता है। कई जगहों पर किसानों की फसलें भी बर्बाद हो रही हैं, जिससे आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
जंगलों की कटाई और विकास परियोजनाओं का असर
विधानसभा में चर्चा के दौरान यह भी बताया गया कि जंगलों की कटाई, खनन गतिविधियां, शहरीकरण और कृषि विस्तार के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास और गलियारे प्रभावित हो रहे हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण, रेलवे लाइन का विस्तार और अन्य विकास परियोजनाओं के कारण भी हाथियों के पारंपरिक आवागमन के रास्ते बाधित हुए हैं।
जब जंगलों में भोजन और पानी की कमी होती है तो हाथियों के झुंड भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ जाते हैं। यही कारण है कि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
राज्य में लगभग 600 हाथियों की मौजूदगी
सरकार ने विधानसभा को बताया कि वर्तमान में झारखंड में लगभग 600 हाथियों की मौजूदगी है। इतनी बड़ी संख्या में हाथियों के होने के कारण कई क्षेत्रों में उनका आवागमन सामान्य है, लेकिन जब वे आबादी वाले इलाकों में पहुंचते हैं तो स्थिति गंभीर हो जाती है।
सरकार का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए वन विभाग द्वारा कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
त्वरित प्रतिक्रिया दल और वॉच टावर की व्यवस्था
सरकार ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की तैनाती की गई है। यह टीम हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने और ग्रामीणों को सतर्क करने का काम करती है।
इसके अलावा कई गांवों में वॉच टावर बनाए गए हैं ताकि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मशाल, टॉर्च और अन्य सामग्री भी वितरित की गई है।
ग्रामीणों को समय पर जानकारी देने के लिए एफएम रेडियो और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भी अलर्ट जारी किया जा रहा है।
हमर हाथी ऐप और आधुनिक तकनीक का उपयोग
वन विभाग ने हाथियों की गतिविधियों की जानकारी देने के लिए हमर हाथी ऐप भी विकसित किया है। इस ऐप के माध्यम से ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलती है और वे समय रहते सतर्क हो सकते हैं।
इसके साथ ही सरकार आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने की भी योजना बना रही है। इसमें थर्मल ड्रोन, नाइट विजन बाइनाकुलर, रेडियो कॉलर और एआई आधारित अलर्ट सिस्टम शामिल हैं।
इन तकनीकों के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों को ट्रैक करना और लोगों को समय पर चेतावनी देना आसान हो सकेगा।
कर्नाटक से लाए जाएंगे प्रशिक्षित कुमकी हाथी
सरकार ने विधानसभा में यह भी जानकारी दी कि भविष्य में इस समस्या से निपटने के लिए कर्नाटक से प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को लाने की योजना बनाई जा रही है।
कुमकी हाथी विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं और इनका उपयोग जंगली हाथियों को नियंत्रित करने और उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने के लिए किया जाता है।
सरकार का मानना है कि इन प्रशिक्षित हाथियों की मदद से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री स्तर पर भी हुई उच्चस्तरीय बैठक
मानव-हाथी संघर्ष से हो रही जनहानि को देखते हुए इस विषय पर मुख्यमंत्री स्तर पर भी उच्चस्तरीय बैठक की गई है। बैठक में वन विभाग और अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाथियों के हमले से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
न्यूज़ देखो: विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
मानव-हाथी संघर्ष केवल एक वन्यजीव समस्या नहीं बल्कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का बड़ा सवाल भी है। जंगलों के लगातार घटने और हाथियों के पारंपरिक रास्तों के बाधित होने से यह समस्या और बढ़ रही है। ऐसे में केवल तात्कालिक उपाय नहीं बल्कि दीर्घकालिक योजना बनाना भी जरूरी है, जिसमें जंगल संरक्षण, सुरक्षित गलियारों का निर्माण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को समान महत्व दिया जाए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति और इंसान के बीच संतुलन बनाना हम सबकी जिम्मेदारी
वन्यजीवों का संरक्षण और मानव जीवन की सुरक्षा दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे और वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्ते संरक्षित होंगे तो इस तरह के संघर्षों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
समाज, प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञों को मिलकर इस दिशा में गंभीर पहल करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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