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ओरसापाठ की सुबह ने बिखेरा जादू, जब बादल उतरे धरती पर और घाटियाँ बनीं जन्नत का नज़ारा

#महुआडांड़ #प्रकृति : लातेहार के ओरसापाठ गाँव की घाटियाँ ढकीं कोहरे और धूप के सुनहरे संगम में
  • महुआडांड़ प्रखंड के ओरसापाठ गाँव में इन दिनों सुबह का नज़ारा स्वर्ग जैसा प्रतीत होता है।
  • बादल इतने नीचे उतर आते हैं कि खेत, पेड़ और पहाड़ों की चोटियाँ सफेद कोहरे में खो जाती हैं।
  • स्थानीय लोगों ने कहा — “ऐसा दृश्य बरसों में एक-दो बार ही देखने को मिलता है।”
  • ठंडी हवा, हल्की धूप और मिट्टी की खुशबू ने मिलकर रचा प्रकृति का अद्भुत संगीत
  • इस मनोहारी दृश्य को देखने लोग आसपास के गाँवों से भी पहुँच रहे हैं
  • घाटियों में बिखरे इस नज़ारे ने पर्यटन और फोटोग्राफी प्रेमियों को भी आकर्षित किया है।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में स्थित ओरसापाठ गाँव इन दिनों अपनी अलौकिक सुंदरता से सबको मंत्रमुग्ध कर रहा है। सुबह-सुबह जब सूरज की पहली किरणें घाटियों को छूती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो धरती पर बादल उतर आए हों। कोहरे की परतें खेतों और जंगलों को अपने आगोश में ले लेती हैं और हर ओर एक रहस्यमयी धुंध फैल जाती है। हवा में घुली ठंडक और मिट्टी की खुशबू से पूरा वातावरण एक जादुई एहसास में डूब जाता है।

जब घाटियों ने ओढ़ी सफेद चादर

सुबह के वक्त ओरसापाठ की घाटियाँ कोहरे की मोटी चादर में लिपटी रहती हैं। धूप की सुनहरी किरणें जब उस चादर को भेदती हैं, तो एक मनमोहक दृश्य बनता है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि ऐसे दृश्य साल में केवल कुछ ही दिनों के लिए देखने को मिलते हैं, जब मौसम का मिजाज बिल्कुल बदल जाता है।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा: “इन दिनों सुबह घाटी में जब निकले, तो ऐसा लगा मानो बादल जमीन से मिल गया हो। यह दृश्य आत्मा को सुकून देता है।”

बादलों के बीच बसा एक जीवंत गाँव

ओरसापाठ के पहाड़ी रास्तों से जब सुबह का कुहासा गुजरता है, तो पेड़ों की टहनियों से गिरती ओस और चमकती धूप मिलकर प्रकृति की पेंटिंग बना देती हैं। गाँव के बच्चे इस समय खेतों और रास्तों पर दौड़ते नज़र आते हैं, मानो धुंध के बीच कोई खेल खेल रहे हों। यहाँ की शांति, स्वच्छ हवा और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं।

प्रकृति प्रेमियों के लिए नई खोज

लातेहार जिले का यह छोटा-सा गाँव अब प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। आसपास के क्षेत्रों से लोग केवल इस दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं। कई युवा सोशल मीडिया पर यहाँ की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जिससे ओरसापाठ का नाम अब धीरे-धीरे पर्यटन मानचित्र पर उभरने लगा है।

शांत हवा में छिपा जीवन का सुकून

ओरसापाठ की सुबह केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि एक अनुभव है — जो लोगों को आत्मा तक छू जाता है। यहाँ कुछ क्षण बिताने पर ऐसा लगता है मानो समय ठहर गया हो। शहरों की चहल-पहल से दूर, यहाँ की शांति मन को नई ऊर्जा और जीवन को एक नयी दृष्टि देती है।

न्यूज़ देखो: जब प्रकृति बन गई ध्यान और प्रेरणा का केंद्र

ओरसापाठ का यह दृश्य केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रकृति के साथ हमारा संबंध कितना गहरा है। जब हम उसकी ओर लौटते हैं, तो भीतर की थकान खुद-ब-खुद मिट जाती है। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि विकास के साथ-साथ प्रकृति की गोद में लौटना भी उतना ही जरूरी है
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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प्रकृति से जुड़ें, जीवन में लाएँ सुकून

ओरसापाठ जैसी जगहें हमें सिखाती हैं कि जीवन की असली सुंदरता सादगी और प्रकृति की निकटता में है। जब हम सुबह की ठंडी हवा में सांस लेते हैं और कोहरे के बीच सूरज की किरणों को निहारते हैं, तो मन शांति से भर उठता है। आइए, इस सर्दी में प्रकृति की ओर कदम बढ़ाएँ, उसकी सुंदरता का अनुभव करें और उसे संजोने का संकल्प लें।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और दूसरों को भी बताएं कि लातेहार की घाटियों में आज भी बसती है सच्ची जन्नत।

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Ramprawesh Gupta

महुवाडांड, लातेहार

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