
#हुसैनाबाद #नया_सत्र : वैदिक हवन और भक्ति कार्यक्रम से विद्यार्थियों में जागी सकारात्मक ऊर्जा।
पलामू के हुसैनाबाद स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, जपला में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ वैदिक हवन और भक्ति कार्यक्रमों के साथ किया गया। विद्यार्थियों का तिलक और पुष्पों से स्वागत हुआ तथा सामूहिक सुंदरकांड पाठ आयोजित हुआ। प्रधानाचार्य कुशजी पाण्डेय ने शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्रभक्ति पर जोर दिया। आयोजन ने विद्यालय परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, जपला में सत्रारंभ आयोजन।
- विद्यार्थियों का तिलक और पुष्पों से स्वागत।
- वैदिक हवन, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ।
- कुशजी पाण्डेय ने संस्कार और राष्ट्रभक्ति पर दिया संदेश।
- सभी आचार्य-आचार्या की सक्रिय भागीदारी।
पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड अंतर्गत जपला स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ वैदिक परंपराओं के साथ अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। गुरुवार को सुबह 9 बजे विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों का तिलक और पुष्पों के साथ स्वागत किया गया, जिससे पूरे परिसर में उत्साह और उल्लास का माहौल बन गया।
यह आयोजन शिक्षा और संस्कार के समन्वय का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।
तिलक और स्वागत से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के मुख्य द्वार पर विद्यार्थियों के स्वागत से हुई। आचार्य-आचार्याओं ने बच्चों का तिलक लगाकर अभिनंदन किया, जिससे उनके मन में अपनत्व और नई ऊर्जा का संचार हुआ।
एक शिक्षक ने कहा: “नए सत्र की शुरुआत संस्कारों के साथ करने से बच्चों का मन सकारात्मक दिशा में बढ़ता है।”
वैदिक हवन और धार्मिक अनुष्ठान
स्वागत के बाद सरस्वती वंदना, हनुमान चालीसा और सामूहिक सुंदरकांड पाठ किया गया। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन का आयोजन किया गया।
सभी आचार्य-आचार्या, विद्यार्थी और कर्मचारी हवन में शामिल हुए और आहुति देकर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
प्रधानाचार्य का प्रेरणादायक संदेश
विद्यालय के प्रधानाचार्य कुशजी पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा—
“हवन के माध्यम से हम नकारात्मकता को त्याग कर सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हैं, जो पूरे वर्ष हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है।”
उन्होंने बताया कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और अनुशासन की भावना विकसित करना है।
शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर
प्रधानाचार्य ने कहा कि विद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है, ताकि वे समाज और राष्ट्र के लिए आदर्श नागरिक बन सकें।
पुरोहित और यजमान की भूमिका
इस कार्यक्रम में रणजीत मिश्रा ने पुरोहित के रूप में हवन का संचालन किया, जबकि प्रधानाचार्य कुशजी पाण्डेय स्वयं यजमान के रूप में उपस्थित रहे।
आचार्य-आचार्याओं की उपस्थिति
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
दीपक पाण्डेय, राजेश्वर सिंह यादव, छाया कुमारी, राजकुमार सिंह, रणजीत मिश्रा, अरविंद यादव, अभिषेक पाठक, मनोज सिंह, हर्षदा चौबे, अनुराधा मेहता, नीतीश मिश्रा शामिल रहे।
सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
आध्यात्मिक और प्रेरणादायी वातावरण
पूरे आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। विद्यार्थियों में नए सत्र को लेकर उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
नई शुरुआत का संदेश
यह आयोजन केवल सत्रारंभ नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में नई दिशा और प्रेरणा देने वाला अवसर साबित हुआ।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार की मजबूती
जपला का यह आयोजन दर्शाता है कि शिक्षा में संस्कारों का समावेश बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को न केवल ज्ञान, बल्कि जीवन मूल्यों की भी शिक्षा देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नई शुरुआत, नई ऊर्जा
नया सत्र नए अवसर लेकर आता है।
जरूरी है कि हम इसे सकारात्मक सोच के साथ अपनाएं।
संस्कार और अनुशासन से ही सफलता मिलती है।
आइए, हम सभी बच्चों को सही दिशा देने में योगदान दें।
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