#गिरिडीह #मजदूर_संघर्ष : छंटनीग्रस्त मजदूरों की बहाली को लेकर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी गई।
टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने असंगठित मजदूर मोर्चा और माले समर्थित अनिश्चितकालीन धरना छठे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी मजदूर छंटनीग्रस्त श्रमिकों को वापस काम पर रखने की मांग को लेकर फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ डटे हुए हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन श्रम मंत्री के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो गेट के सामने बड़ा धरना और प्रशासनिक स्तर पर शिकायत की जाएगी।
- बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ छठे दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना।
- छंटनीग्रस्त मजदूरों को वापस काम पर रखने की मांग तेज।
- राजेश सिन्हा ने श्रम मंत्री के निर्देशों की अवहेलना का लगाया आरोप।
- 20 मई को उपायुक्त से मुलाकात कर मुद्दा उठाने की घोषणा।
- 25 मई तक समाधान नहीं होने पर गेट जाम आंदोलन की चेतावनी।
- धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर रहे मौजूद।
बालमुकुंद फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ चल रहा मजदूरों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। टुंडी रोड स्थित फैक्ट्री के समक्ष असंगठित मजदूर मोर्चा और माले समर्थित अनिश्चितकालीन धरना छठे दिन भी जारी रहा। धरना दे रहे मजदूरों की मुख्य मांग छंटनी किए गए श्रमिकों को वापस काम पर रखने की है। आंदोलनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन श्रम कानूनों और सरकार के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है। कार्यक्रम में मजदूरों और स्थानीय लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
श्रम मंत्री के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
धरना स्थल पर माले नेताओं ने कहा कि विधानसभा में छंटनीग्रस्त मजदूरों का मुद्दा उठाया गया था। निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने इस मामले को विधानसभा में प्रमुखता से रखा था, जिसके बाद श्रम मंत्री ने गिरिडीह उपायुक्त को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे।
माले नेताओं का आरोप है कि इसके बावजूद बालमुकुंद फैक्ट्री प्रबंधन किसी प्रकार का सुधारात्मक कदम नहीं उठा रहा है और मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “श्रम मंत्री के दिशा-निर्देशों की अवहेलना की जा रही है। यदि प्रशासन स्तर पर समाधान नहीं निकला तो हम लिखित शिकायत के माध्यम से पूरे मामले को सरकार तक पहुंचाएंगे।”
उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा।
20 मई को उपायुक्त से मुलाकात की तैयारी
माले नेता कन्हाई पांडेय ने कहा कि 20 मई को गिरिडीह उपायुक्त से मुलाकात कर मजदूरों की समस्याओं को विस्तार से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
कन्हाई पांडेय ने कहा: “25 मई तक यदि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों की बात नहीं मानता है तो गेट के सामने बड़ा धरना दिया जाएगा, जिसकी जानकारी प्रशासन को पहले ही दे दी जाएगी।”
उन्होंने कहा कि माले और असंगठित मजदूर मोर्चा की केंद्रीय और राज्य कमिटी के निर्देश पर एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन और सरकार से मुलाकात करेगा।
मजदूरों की बहाली को लेकर आंदोलन तेज
धरना दे रहे मजदूरों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के कई मजदूरों को काम से हटा दिया गया है। आंदोलनकारियों ने इसे श्रम कानूनों का उल्लंघन बताते हुए मजदूर विरोधी कदम करार दिया।
नेताओं ने कहा कि मजदूर लंबे समय से फैक्ट्री में काम कर रहे थे और अचानक की गई छंटनी से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि जब तक मजदूरों को वापस काम पर नहीं लिया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
माले और असंगठित मजदूर मोर्चा के नेताओं ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन से श्रम कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने की अपील की।
बड़ी संख्या में शामिल हुए मजदूर और महिलाएं
धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर शामिल हुए। कार्यक्रम में कन्हैया पाण्डेय, किशोर राय, हुबलाल राय, दीपक गोस्वामी, सुनील ठाकुर, मधुसूदन कोल, तुलसी तुरी, नबीन पाण्डेय, पवन यादव, भिखारी राय, दिलचंद कोल, अरबिंद टुडू, भीम कोल, मोहन कोल, बाबूलाल बास्की, निमिया देवी, पार्वती देवी, सरिता देवी, ललिता देवी, जसमी देवी, सोनी देवी और करनी देवी सहित कई लोग मौजूद रहे।
धरना स्थल पर मजदूरों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
न्यूज़ देखो: मजदूरों की मांगों पर प्रशासन की परीक्षा
बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ लगातार जारी आंदोलन अब प्रशासन और श्रम विभाग के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि विधानसभा में उठे मुद्दों और श्रम मंत्री के निर्देशों के बावजूद समाधान नहीं निकलता है तो इससे मजदूरों में असंतोष और बढ़ सकता है। मजदूरों की बहाली और श्रम कानूनों के पालन को लेकर प्रशासन की सक्रिय भूमिका अब बेहद जरूरी दिखाई दे रही है। लोकतांत्रिक आंदोलनों को समय रहते सुनना और निष्पक्ष समाधान निकालना ही बेहतर विकल्प हो सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा जरूरी
हर मेहनतकश मजदूर अपने परिवार और समाज की रीढ़ होता है। यदि श्रमिकों की आवाज को नजरअंदाज किया जाएगा तो असंतोष बढ़ना तय है। इसलिए जरूरी है कि उद्योग और प्रशासन दोनों संवेदनशीलता के साथ समाधान की दिशा में कदम बढ़ाएं।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन लोगों के अधिकारों की अभिव्यक्ति का माध्यम है। मजदूरों की समस्याओं को सुनना और न्याय दिलाना सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
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