Latehar

राशन संकट ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता, डीसी से गुहार लगाकर 200 से अधिक लाभुकों ने की खाद्यान्न आपूर्ति की मांग

#बरवाडीह #राशन_संकट : दो माह से सरकारी खाद्यान्न नहीं मिलने पर लाभुकों में आक्रोश बढ़ा।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला और अखरा ग्राम में राशन वितरण व्यवस्था चरमरा गई है। जन वितरण प्रणाली दुकानों के निलंबन के बाद 200 से अधिक राशनकार्ड धारक दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 का खाद्यान्न नहीं पा सके हैं। स्थिति से परेशान होकर लाभुकों ने उपायुक्त को संयुक्त आवेदन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मामला खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा होने के कारण गंभीर माना जा रहा है।

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  • बेतला और अखरा ग्राम के 200 से अधिक राशनकार्ड धारक प्रभावित।
  • दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 का राशन अब तक नहीं मिला।
  • जविप्र डीलर मो. कासिम अंसारी और मुकेश भूईंया की दुकान निलंबित।
  • लाभुकों ने लातेहार उपायुक्त को सौंपा संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन।
  • बरवाडीह प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने डीएसओ को भेजा प्रतिवेदन।

बरवाडीह प्रखंड के बेतला और अखरा ग्राम में जन वितरण प्रणाली की अनियमितता ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यहां के दो सौ से अधिक राशनकार्ड धारक पिछले दो माह से सरकारी खाद्यान्न से वंचित हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर लाभुकों ने लातेहार उपायुक्त को संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन सौंपते हुए दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 का लंबित राशन शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की है।

आवेदन में लाभुकों ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि बेतला क्षेत्र के जन वितरण प्रणाली डीलर मो. कासिम अंसारी एवं मुकेश भूईंया की दुकानों के निलंबन के बाद से राशन वितरण की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। इसका सीधा असर गरीब परिवारों पर पड़ा है, जो पूरी तरह सरकारी खाद्यान्न पर निर्भर हैं।

दो माह से खाद्यान्न से वंचित परिवार

लाभुकों के अनुसार दिसंबर माह से ही राशन मिलना बंद हो गया था, लेकिन जनवरी लगभग बीत जाने के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास आय का स्थायी स्रोत नहीं है और वे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए राशन दुकान पर निर्भर रहते हैं। दो माह से राशन नहीं मिलने के कारण कई घरों में भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कुछ परिवारों को उधार लेकर या मजदूरी करके भोजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जो लंबे समय तक संभव नहीं है।

डीलरों पर टाल-मटोल का आरोप

लाभुकों ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने राशन के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की, तो संबंधित डीलरों द्वारा टाल-मटोल रवैया अपनाया गया। कभी सर्वर की समस्या तो कभी आपूर्ति नहीं आने का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि दुकानों का निलंबन पहले ही हो चुका था, तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, ताकि गरीब परिवारों को परेशानी न हो। लेकिन ऐसा नहीं होने से लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर क्या कहा गया

मामले को लेकर बरवाडीह प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुमित कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में लातेहार जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) को प्रतिवेदन भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा कि उच्च स्तर से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, लाभुकों का कहना है कि केवल प्रतिवेदन भेजना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि जमीनी स्तर पर राशन वितरण शुरू नहीं हो जाता। उनका आग्रह है कि प्रशासन तत्काल वैकल्पिक डीलर के माध्यम से लंबित राशन का वितरण सुनिश्चित करे।

उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन में कौन-कौन शामिल

उपायुक्त को सौंपे गए संयुक्त आवेदन पर मुमताज अली, अमरुद्दीन अंसारी, मो. कादिर, मोमिन मियां, सुहैल अख्तर, बसारत मियां, सोहराब अली सहित दो सौ से अधिक राशनकार्ड धारकों के हस्ताक्षर हैं। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।

लाभुकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही राशन वितरण शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को विवश होंगे। उनका कहना है कि खाद्य सुरक्षा जैसे मूल अधिकार से वंचित रहना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल

यह मामला केवल बेतला और अखरा ग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। डीलर के निलंबन की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था न होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित निर्णय और जमीनी स्तर पर निगरानी जरूरी है, ताकि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न संकट का सामना न करना पड़े।

न्यूज़ देखो: गरीबों की थाली से जुड़ा गंभीर सवाल

बरवाडीह का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनशीलता की परीक्षा है। डीलर निलंबन के बाद भी राशन वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था न होना चिंता का विषय है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर सबसे कमजोर वर्ग पर पड़ेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से ठोस कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खाद्य सुरक्षा के लिए सजग रहना जरूरी

राशन जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना किसी भी नागरिक के लिए गंभीर मुद्दा है।
यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्याएं हैं, तो आवाज उठाएं और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करें।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों तक उनका हक पहुंचे।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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