
#विश्रामपुर #पलामू #सरस्वती_पूजा : एक सप्ताह की कड़ी मेहनत से पंडाल को मिलता है अनूठा और आकर्षक स्वरूप।
पलामू जिले के विश्रामपुर नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत रेहला में सरस्वती पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भारतीय स्टेट बैंक के सामने स्थित संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल परिसर में हर वर्ष की तरह इस बार भी भव्य और आकर्षक पूजा पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। एक सप्ताह पहले से जुटे कारीगरों और मजदूरों की मेहनत से यह पंडाल क्षेत्र में आस्था, कला और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र बनता जा रहा है।
- संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल, रेहला में सरस्वती पूजा का भव्य आयोजन।
- एक सप्ताह पहले से कारीगरों की टीम पंडाल निर्माण में जुटी।
- बाहर से बुलाए गए अनुभवी मजदूरों की कारीगरी से पंडाल को विशेष पहचान।
- निदेशक साइमन मैथ्यू ऐश्ले की देखरेख में सजावट और आयोजन।
- दूसरे रात्रि में जागरण कार्यक्रम, भक्तिमय वातावरण का निर्माण।
विश्रामपुर नगर परिषद क्षेत्र में सरस्वती पूजा का नाम आते ही रेहला स्थित संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल का पंडाल स्वतः ही चर्चा में आ जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी विद्यालय प्रांगण में भव्य पूजा पंडाल को अंतिम रूप देने के लिए मजदूर और कारीगर पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं। विद्यालय परिसर में सुबह से देर शाम तक हथौड़ी, रंग, कपड़े और सजावटी सामग्रियों के बीच कारीगर अपनी कला का जादू बिखेरते नजर आते हैं।
मजदूरों की मेहनत से आकार लेता है आकर्षक पंडाल
सरस्वती पूजा से लगभग एक सप्ताह पहले ही पंडाल निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाता है। बाहर से बुलाए गए अनुभवी कारीगर बारीक नक्काशी, सृजनात्मक डिजाइन और आकर्षक रंग संयोजन के माध्यम से पंडाल को एक अलग पहचान देते हैं। मजदूरों की टीम दिन-रात मेहनत कर यह सुनिश्चित करती है कि पंडाल न केवल सुंदर दिखे, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित भी हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल का पंडाल हर वर्ष विश्रामपुर नगर परिषद क्षेत्र में अव्वल माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कारीगरों की मेहनत और प्रबंधन की सूझबूझ।
निदेशक साइमन मैथ्यू ऐश्ले की विशेष भूमिका
विद्यालय के निदेशक साइमन मैथ्यू ऐश्ले इस पूरे आयोजन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। वे हर वर्ष बाहर से अनुभवी कारीगरों को आमंत्रित कर पंडाल की सजावट में नई सोच और नवीनता लाने का प्रयास करते हैं। उनकी पहल से पंडाल में पारंपरिक आस्था के साथ आधुनिक कलाकारी का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि निदेशक का व्यवहार बेहद सरल और सहयोगात्मक है, जिसका सकारात्मक असर विद्यालय के वातावरण और आयोजनों पर भी पड़ता है। यही कारण है कि सरस्वती पूजा के अवसर पर विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ बड़ी संख्या में पूजा पंडाल पहुंचते हैं।
बच्चों और अभिभावकों के लिए बना आकर्षण का केंद्र
पूजा पंडाल में विशेष रूप से तैयार किए गए सेल्फी प्वाइंट इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनते हैं। बच्चे और अभिभावक यहां फोटो शूट कर इस यादगार पल को संजोते नजर आते हैं। विद्यालय परिसर में दिनभर चहल-पहल बनी रहती है और श्रद्धालुओं की आवाजाही से पूरा क्षेत्र उत्सवमय माहौल में डूब जाता है।
शिक्षा के साथ सामाजिक और धार्मिक सहभागिता
संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। निदेशक साइमन मैथ्यू ऐश्ले शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में विश्वास रखते हैं। इसी सोच के तहत सरस्वती पूजा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामुदायिक सहभागिता का माध्यम बनाया जाता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि विद्यालय की यही सक्रियता उसे क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाती है और समाज के हर वर्ग से सकारात्मक जुड़ाव बनाए रखती है।
जागरण कार्यक्रम से भक्तिमय होता है माहौल
सरस्वती पूजा के दूसरे रात्रि को आयोजित होने वाला जागरण कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। भजन-कीर्तन और धार्मिक संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु इस जागरण में शामिल होने पहुंचते हैं, जिससे रेहला और आसपास का इलाका रौनक से भर जाता है।
मजदूरों की कला को मिलता है सम्मान
इस आयोजन के माध्यम से उन मजदूरों और कारीगरों की मेहनत भी सामने आती है, जो अपनी कला से पंडाल को जीवंत रूप देते हैं। कई मजदूरों का कहना है कि संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल में काम करने का अनुभव उनके लिए खास होता है, क्योंकि यहां उनकी मेहनत और कारीगरी को सम्मान मिलता है।

न्यूज़ देखो: परंपरा, कला और समाज का सुंदर संगम
संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल रेहला का सरस्वती पूजा पंडाल यह दर्शाता है कि जब शिक्षा संस्थान सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाते हैं, तो वे समाज में सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। मजदूरों की मेहनत, प्रबंधन की सोच और श्रद्धालुओं की सहभागिता मिलकर इस आयोजन को विशेष बनाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ श्रम का सम्मान जरूरी
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