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लोहबंधा में मरहूम शेख़ मो० युसूफ अंसारी कादरी का सातवां सालाना उर्स श्रद्धा और अकीदत के साथ संपन्न

#पलामू #सालाना_उर्स : लोहबंधा गांव में ईद मिलादुन्नबी की महफ़िल के साथ धार्मिक आयोजन।

पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड अंतर्गत लोहबंधा गांव में मरहूम शेख़ मो० युसूफ अंसारी कादरी का सातवां सालाना उर्स श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उनके मजार पर चादरपोशी, फातेहा और जश्ने ईद मिलादुन्नबी की महफ़िल का आयोजन हुआ। बाहर से आए ओलमा और शायरों ने नात व मनकबत के माध्यम से इस्लामी संदेश दिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य इस्लामी तालिमात, भाईचारे और अमन के पैगाम को आम लोगों तक पहुंचाना रहा।

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  • लोहबंधा गांव में मरहूम शेख़ मो० युसूफ अंसारी कादरी का सातवां सालाना उर्स आयोजित।
  • मजार पर चादरपोशी और फातेहा के साथ की गई विशेष दुआ।
  • ईद मिलादुन्नबी की महफ़िल में ओलमाओं और शायरों की प्रभावशाली तकरीर।
  • मौलाना महबूब आलम ने इस्लामी तालिमात पर अमल की अपील की।
  • सैकड़ों की संख्या में स्थानीय एवं बाहरी अकीदतमंद हुए शामिल।

पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड क्षेत्र स्थित महुडंड पंचायत के लोहबंधा गांव में मरहूम शेख़ मो० युसूफ अंसारी कादरी का सातवां सालाना उर्स धार्मिक श्रद्धा और सामूहिक अकीदत के साथ मनाया गया। इस आयोजन में न केवल स्थानीय ग्रामीण बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।

सालाना उर्स के अवसर पर मरहूम की मजार पर विधिवत चादरपोशी की गई और फातेहा पढ़ी गई। इसके बाद उनके इशाले सवाब के लिए जश्ने ईद मिलादुन्नबी की भव्य महफ़िल सजाई गई, जिसमें कुरआन की तिलावत, नात, मनकबत और तकरीर के माध्यम से इस्लामी शिक्षाओं का संदेश दिया गया।

कुरआन की तिलावत और नात से हुई शुरुआत

जश्ने ईद मिलादुन्नबी की महफ़िल की शुरुआत हाफिज़ व कारी अनिस रज़ा द्वारा कुरआन पाक की तिलावत से की गई। इसके बाद उन्होंने नात पाक पढ़कर पूरे माहौल को रूहानी बना दिया। तिलावत और नात की गूंज से महफ़िल में मौजूद लोगों के दिलों में अकीदत और श्रद्धा का भाव साफ झलकने लगा।

ओलमाओं और शायरों ने बांधा समां

महफ़िल में बाहर से आए ओलमाओं और शायरों ने एक से बढ़कर एक नात और मनकबत पेश की। कुरआन और हदीस के हवाले देते हुए वक्ताओं ने इस्लाम के पैगाम को सरल शब्दों में लोगों तक पहुंचाया।
शायर-ए-इस्लाम समशाद हैदर पलामू वी साहब ने अपनी नात और मनकबत के जरिए महफ़िल को गुलजार बनाए रखा। उनकी शायरी पर मौजूद अकीदतमंदों ने बार-बार सुभानल्लाह और नारे तकबीर की सदाएं बुलंद कीं।

मौलाना महबूब आलम का प्रेरक संदेश

इस नेक मौके पर मौलाना महबूब आलम ने अपनी तकरीर में इस्लामी तालिमात पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा:

मौलाना महबूब आलम ने कहा:
“कुरआन शरीफ इंसानियत और भाईचारे का पैगाम देता है। मुसलमानों को चाहिए कि वे कुरआन और हदीस की इस्लामी शिक्षाओं तथा नबी के फरामीन के मुताबिक अपनी जिंदगी गुजारें।”

उन्होंने आगे कहा कि कौम और मोहल्ले की तरक्की के लिए आपसी एकता, मोहब्बत और भाईचारा बेहद जरूरी है। अगर समाज संगठित रहेगा, तो हर तरह की सामाजिक और नैतिक चुनौतियों का सामना आसानी से किया जा सकता है।

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ईद मिलादुन्नबी की महफ़िल में उमड़ा जनसैलाब

ईद मिलादुन्नबी की इस महफ़िल में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। नात और तकरीर के दौरान लोग पूरी तन्मयता से शामिल हुए और धार्मिक जज्बे के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया। महफ़िल के दौरान माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा।

देश में अमन और भाईचारे की दुआ

कार्यक्रम के अंतिम चरण में नबी की बारगाह में सलाम पढ़ा गया। इसके साथ ही मरहूमीन के इशाले सवाब और पूरे मुल्क में अमन, शांति, एकता और भाईचारा कायम रहने की विशेष दुआ की गई। दुआ के दौरान हर आंख नम और हर दिल अमन की कामना करता नजर आया।

अध्यक्षता और संचालन

ईद मिलादुन्नबी की इस महफ़िल की अध्यक्षता इसहाक अनवर ने की, जबकि नेकाबत हाफिज़ व कारी अनिस रज़ा द्वारा की गई। दोनों ने कार्यक्रम को अनुशासित और मर्यादित ढंग से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई।

उपस्थित गणमान्य लोग

इस अवसर पर मौलवी इसहाक अनवर, मौलवी युसूफ अंसारी, जहांगीर अंसारी, मकसूद आलम, शिक्षक अकबर अंसारी, पत्रकार मसउद आलम, तैयब आलम, मनउवर आलम, हफीज अंसारी, वसीर आलम, तौसीफ रज़ा, मोजाहिद अंसारी, आरिफ अंसारी, समशाद आलम सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: धार्मिक आयोजनों से मजबूत होता है सामाजिक ताना-बाना

लोहबंधा में आयोजित यह सालाना उर्स केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं। सवाल यह है कि क्या हम इन शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में उतार पा रहे हैं? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मोहब्बत और एकता ही समाज की असली ताकत

धार्मिक आयोजन हमें इंसानियत, अमन और भाईचारे की राह दिखाते हैं।
जरूरत है इन मूल्यों को सिर्फ सुनने की नहीं, बल्कि अपनाने की।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और समाज में शांति व सौहार्द का संदेश आगे बढ़ाएं।

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