खलारी में कैप्टन अशोक गिरि एवं बिनोद गिरि की माता स्व. राजमती देवी का श्राद्ध कर्म श्रद्धापूर्वक संपन्न

खलारी में कैप्टन अशोक गिरि एवं बिनोद गिरि की माता स्व. राजमती देवी का श्राद्ध कर्म श्रद्धापूर्वक संपन्न

author Jitendra Giri
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#खलारी #रांची #श्राद्धकर्म : स्टेशन रोड राय में विधिवत ब्रह्मभोज और पितृ तर्पण का आयोजन हुआ।

रांची जिले के खलारी क्षेत्र अंतर्गत स्टेशन रोड राय में बुधवार को स्वर्गीय राजमती देवी के श्राद्ध कर्म एवं ब्रह्मभोज का आयोजन श्रद्धा और भावुक वातावरण में संपन्न हुआ। वे कैप्टन अशोक गिरि एवं जन वितरण प्रणाली दुकानदार बिनोद गिरि की माता थीं। वैदिक विधि-विधान से आयोजित इस कर्मकांड में परिजन, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में शुभचिंतक शामिल हुए। आयोजन ने पारिवारिक मूल्यों, संस्कारों और सामूहिक संवेदना को मजबूती से सामने रखा।

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  • स्टेशन रोड राय, खलारी स्थित निवास पर श्राद्ध कर्म एवं ब्रह्मभोज संपन्न।
  • कैप्टन अशोक गिरि एवं बिनोद गिरि की माता थीं स्व. राजमती देवी
  • महेश पंडित द्वारा वैदिक विधि-विधान से कर्मकांड संपन्न कराया गया।
  • बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार एवं शुभचिंतक हुए शामिल।
  • दिवंगत को श्रद्धांजलि देते हुए पितृ तर्पण एवं प्रार्थना की गई।
  • परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे सामाजिक एवं पारिवारिक जन।

रांची जिले के खलारी क्षेत्र में बुधवार को शोक और श्रद्धा के वातावरण में स्वर्गीय राजमती देवी के श्राद्ध कर्म एवं ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्टेशन रोड राय स्थित उनके आवास पर आयोजित हुआ, जहां पूरे विधि-विधान के साथ पितृ तर्पण किया गया। स्व. राजमती देवी कैप्टन अशोक गिरि एवं जन वितरण प्रणाली के दुकानदार बिनोद गिरि की माता थीं। आयोजन में परिवार के सदस्यों के साथ-साथ बड़ी संख्या में शुभचिंतक उपस्थित रहे, जिन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ श्राद्ध कर्म

श्राद्ध कर्म का संचालन प्रसिद्ध कर्मकांडी महेश पंडित द्वारा किया गया। मंत्रोच्चारण और वैदिक अनुष्ठान के बीच पूरे वातावरण में शांति, भक्ति और करुणा का भाव व्याप्त रहा। परिजनों ने परंपरानुसार पितृ तर्पण कर स्व. राजमती देवी के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट की। ब्रह्मभोज के माध्यम से आगंतुकों ने दिवंगत आत्मा को स्मरण करते हुए पुण्य लाभ अर्जित किया।

सरल, सौम्य और संस्कारवान जीवन की स्मृतियां

परिजनों के अनुसार स्व. राजमती देवी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। उनका जीवन सादगी, धार्मिक आस्था और पारिवारिक मूल्यों से परिपूर्ण रहा। वे परिवार को जोड़कर रखने वाली मजबूत स्तंभ के रूप में जानी जाती थीं। उनके सौम्य व्यवहार और ममतामयी स्वभाव को स्मरण करते हुए उपस्थित लोग भावुक नजर आए।

परिवारजनों की उपस्थिति ने बढ़ाया आयोजन का महत्व

श्राद्ध कर्म के अवसर पर परिवार की बेटियां संगीता देवी एवं बबीता देवी, बहुएं जयमाला देवी एवं विनती देवी, पौत्र सौरभ कुमार, गौरव कुमार, आयुष कुमार सहित परिवार के धर्मेंद्र गिरि, प्रदीप गिरि और अन्य सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और परिचितजन भी पहुंचे, जिन्होंने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।

सामाजिक सहभागिता और संवेदना का उदाहरण

इस आयोजन ने एक बार फिर यह दर्शाया कि दुख की घड़ी में समाज किस प्रकार एकजुट होकर परिवार के साथ खड़ा होता है। उपस्थित लोगों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान हो।

न्यूज़ देखो: पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक एकता की मिसाल

श्राद्ध कर्म जैसे आयोजन भारतीय समाज की गहरी सांस्कृतिक और मानवीय परंपराओं को दर्शाते हैं। यह खबर बताती है कि आधुनिक समय में भी लोग अपने संस्कारों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहे हैं। ऐसे अवसर सामाजिक एकजुटता और संवेदना को मजबूत करते हैं। प्रशासन या समाज के स्तर पर इन परंपराओं का सम्मान बना रहना आवश्यक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संस्कारों को संजोए रखें, संवेदनाओं को जीवित रखें

परिवार और समाज की मजबूती हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से ही संभव है। दुख की घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बनना ही सच्ची मानवता है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भी अपने मूल्यों को समझने और अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
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Written by

खलारी, रांची

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