
#सिमडेगा #रसोइयासंयोजिकाआंदोलन : लंबित मांगों को लेकर संघ का प्रतिनिधिमंडल जनप्रतिनिधि से मिला।
सिमडेगा जिले में अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर डटी रसोइया-संयोजिका संघ की प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को जिला परिषद सदस्य सह महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष जोसिमा खाखा से मुलाकात की। इस दौरान विधायक भूषण बाड़ा के नाम ज्ञापन सौंपकर मानदेय वृद्धि, नियमित भुगतान और सेवा शर्तों में सुधार की मांग उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए शीघ्र हस्तक्षेप की अपील की।
- सिमडेगा में हड़ताल पर डटी रसोइया-संयोजिका संघ की प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात।
- जिला परिषद सदस्य जोसिमा खाखा को सौंपा गया विधायक भूषण बाड़ा के नाम ज्ञापन।
- संघ की प्रमुख मांगें मानदेय वृद्धि, नियमित भुगतान और सेवा शर्तों में सुधार।
- सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग, लंबे समय से लंबित मुद्दों पर नाराजगी।
- मुलाकात के दौरान विश्वकर्मा, अनिता देवी, रजनी लुगून और संध्या देवी सहित सदस्याएं रहीं मौजूद।
सिमडेगा जिले में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर डटी रसोइया-संयोजिका संघ ने गुरुवार को आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए जनप्रतिनिधियों से संपर्क तेज कर दिया। इसी क्रम में संघ की एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला परिषद सदस्य सह महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष जोसिमा खाखा से मुलाकात की और विधायक भूषण बाड़ा के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों से अवगत कराते हुए जल्द समाधान की मांग की। संघ का कहना है कि सरकार द्वारा कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे रसोइया-संयोजिकाओं में निराशा का माहौल है।
लंबे समय से लंबित हैं मानदेय और सेवा शर्तों से जुड़ी मांगें
रसोइया-संयोजिका संघ की ओर से प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वे पिछले लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन से लगातार संपर्क कर रहे हैं। लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
संघ की मुख्य मांगों में मानदेय वृद्धि, मानदेय का नियमित भुगतान, तथा सेवा शर्तों में सुधार शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि रसोइया-संयोजिकाएं विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सम्मान और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
संघ के सदस्यों का कहना है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार को अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है। इसी कारण अब आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।
विधायक भूषण बाड़ा के नाम सौंपा गया ज्ञापन
प्रतिनिधिमंडल ने अपनी समस्याओं को लेकर विधायक भूषण बाड़ा के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने सरकार से जल्द सकारात्मक पहल करने की मांग की है।
संघ की सदस्याओं का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से उनकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी और जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि रसोइया-संयोजिकाएं लंबे समय से विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन उनके मानदेय और कार्य परिस्थितियों को लेकर पर्याप्त सुधार नहीं किया गया है।
जोसिमा खाखा ने दिया आश्वासन
मुलाकात के दौरान जिला परिषद सदस्य सह महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष जोसिमा खाखा ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगों को विधायक तक पहुंचाया जाएगा।
जोसिमा खाखा ने कहा: “रसोइया-संयोजिकाओं की समस्याओं को विधायक भूषण बाड़ा तक अवश्य पहुंचाया जाएगा और सरकार के समक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाने का प्रयास किया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि विधायक भूषण बाड़ा पहले भी इस मुद्दे को लेकर गंभीर रहे हैं और पूर्व में विधानसभा सत्र के दौरान रसोइया-संयोजिकाओं की समस्याओं को उठाया गया था। उस समय सरकार की ओर से मानदेय वृद्धि और अन्य मांगों पर विचार करने का आश्वासन भी दिया गया था।
हालांकि बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उन्होंने कहा कि अब फिर से इस विषय को सरकार के समक्ष मजबूती से रखने का प्रयास किया जाएगा ताकि रसोइया-संयोजिकाओं को उनका अधिकार मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल में कई सदस्याएं रहीं मौजूद
इस मुलाकात के दौरान रसोइया-संयोजिका संघ की कई सदस्याएं मौजूद रहीं। इनमें प्रदेश सचिव विश्वकर्मा, अनिता देवी, रजनी लुगून, और संध्या देवी सहित संघ की अन्य सदस्याएं शामिल थीं।
सभी सदस्याओं ने एक स्वर में अपनी मांगों के जल्द समाधान की अपील की और कहा कि यदि उनकी समस्याओं पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
संघ की ओर से यह भी कहा गया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं और उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी।

न्यूज़ देखो: जमीनी स्तर के कर्मियों की आवाज कब सुनेगी व्यवस्था
रसोइया-संयोजिकाएं विद्यालयों में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, जो शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इसके बावजूद लंबे समय से उनकी मानदेय और सेवा शर्तों से जुड़ी मांगें लंबित रहना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इस मुद्दे को फिर से उठाया जाना उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर कब ठोस निर्णय लेती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकार और सम्मान के लिए उठती आवाज को समझना जरूरी
समाज के हर वर्ग का सम्मान और सुरक्षा लोकतंत्र की मजबूती का आधार है।
रसोइया-संयोजिकाएं शिक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी समस्याओं का समाधान होना आवश्यक है।
जब जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों की आवाज सुनी जाती है, तभी व्यवस्था में भरोसा मजबूत होता है।
ऐसे मुद्दों पर समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि संवाद और समाधान का रास्ता निकाला जाए।
यदि आपके क्षेत्र में भी जनहित से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आ रहा है, तो उसे उठाना और जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जिम्मेदार व्यवस्था के लिए अपनी आवाज मजबूत बनाएं।






