पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय हॉस्टल में खलारी के एलएलएम छात्र की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप

पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय हॉस्टल में खलारी के एलएलएम छात्र की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप

author Jitendra Giri
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#खलारी #संदिग्ध_मौत : पटना में एलएलएम छात्र की मौत पर परिवार ने आत्महत्या की बात नकारते हुए साजिश की आशंका जताई

रांची के खलारी निवासी एलएलएम छात्र मयंक राज की पटना स्थित विश्वविद्यालय हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से सनसनी फैल गई है। पुलिस जहां इसे आत्महत्या का मामला बता रही है, वहीं परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग उठाई है।

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  • 26 वर्षीय मयंक राज की पटना के विश्वविद्यालय हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत।
  • मृतक चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में एलएलएम का छात्र था।
  • पिता राजेश कुमार, सीसीएल रोहिणी परियोजना में कार्यरत, सूचना मिलते ही पहुंचे पटना।
  • कमरे का दरवाजा तोड़कर पुलिस ने फंदे से लटका हुआ पाया शव।
  • परिजनों ने आत्महत्या से इनकार कर जताई हत्या की आशंका और निष्पक्ष जांच की मांग।

रांची जिले के खलारी प्रखंड अंतर्गत रोहिणी परियोजना क्षेत्र निवासी 26 वर्षीय युवक मयंक राज की पटना में हुई संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मयंक पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में एलएलएम का छात्र था और विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था। मंगलवार की सुबह हॉस्टल में हुई इस घटना के बाद परिवार, स्थानीय क्षेत्र और विश्वविद्यालय परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

हॉस्टल के कमरे में संदिग्ध हालत में मिला शव

प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार की सुबह जब काफी देर तक मयंक राज के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो साथी छात्रों को संदेह हुआ। कई बार आवाज देने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर मामले की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया और दरवाजा तोड़ा गया।

दरवाजा खुलने पर पुलिस ने मयंक का शव कमरे के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया। तत्काल उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया और छात्र-छात्राओं के बीच शोक का माहौल बन गया।

सूचना मिलते ही पटना पहुंचे पिता और परिजन

घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के पिता राजेश कुमार, जो सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के एनके एरिया अंतर्गत रोहिणी परियोजना में कार्यरत हैं, परिजनों के साथ तत्काल पटना पहुंचे। अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मयंक का अंतिम संस्कार पटना में ही कर दिया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों और परिचितों में गहरा शोक देखा गया। परिजनों का कहना है कि यह उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।

परिजनों ने आत्महत्या की बात को किया खारिज

मृतक के परिजनों ने साफ तौर पर आत्महत्या की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि मयंक मानसिक रूप से बेहद मजबूत और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्र था। उनका कहना है कि वह पढ़ाई में गंभीर था और भविष्य को लेकर स्पष्ट योजनाएं बना रहा था, ऐसे में आत्महत्या जैसा कदम उठाना उसके स्वभाव के विपरीत है।

परिवार ने यह भी कहा कि प्रेम प्रसंग से जुड़ी किसी भी तरह की चर्चा पूरी तरह निराधार है। परिजनों के अनुसार मयंक का किसी विवाद या तनाव से कोई संबंध नहीं था और वह सामान्य जीवन जी रहा था।

हत्या की साजिश का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

परिजनों ने आरोप लगाया है कि मयंक की साजिश के तहत हत्या की गई है और पूरे मामले को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

परिवार का कहना है कि जब तक हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, घटनास्थल की परिस्थितियां, छात्र गतिविधियों और अन्य सभी पहलुओं की बारीकी से जांच नहीं की जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की भी मांग की है।

सुसाइड नोट मिलने की बात पर भी उठे सवाल

पुलिस की ओर से कमरे से एक सुसाइड नोट मिलने की बात कही जा रही है, लेकिन परिजनों ने इसकी प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब तक हस्तलेखन की जांच, फॉरेंसिक जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का मिलान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी दस्तावेज को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

इस पहलू को लेकर भी परिवार ने पुलिस से वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि किसी प्रकार की सच्चाई छिपी न रह जाए और दोषियों की पहचान हो सके।

क्षेत्र और विश्वविद्यालय में शोक का माहौल

मयंक राज की असामयिक मौत की खबर से खलारी और रोहिणी परियोजना क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों और परिचितों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वहीं विश्वविद्यालय परिसर में भी मातम का माहौल देखा गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र की असामयिक मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उस दिन की परीक्षा स्थगित कर दी। साथ ही छात्रों के बीच मनोवैज्ञानिक सहयोग और परामर्श की आवश्यकता पर भी चर्चा शुरू हुई है।

छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर उठे गंभीर सवाल

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि शैक्षणिक परिसरों में छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। हॉस्टल सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और छात्र सहायता तंत्र की मजबूती की आवश्यकता अब और अधिक महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में नियमित काउंसलिंग, सुरक्षा निगरानी और संकट प्रबंधन तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और किसी भी संदिग्ध स्थिति में समय रहते हस्तक्षेप संभव हो।

न्यूज़ देखो: जांच से ही सामने आएगी सच्चाई

खलारी के छात्र की संदिग्ध मौत ने कई संवेदनशील सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब केवल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही मिल सकता है। परिवार की शंका, पुलिस की प्रारंभिक जानकारी और घटनास्थल की परिस्थितियों के बीच संतुलित जांच बेहद जरूरी है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हर पहलू की गहन पड़ताल कर सच्चाई सामने लाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सच सामने आना ही पीड़ित परिवार को दिलाएगा न्याय

ऐसी दुखद घटनाओं में संवेदनशीलता और पारदर्शिता दोनों आवश्यक हैं।
प्रशासन और समाज को मिलकर पीड़ित परिवार का साथ देना चाहिए।
निष्पक्ष जांच ही विश्वास और न्याय की सबसे बड़ी आधारशिला होती है।
आइए, इस मामले में सच्चाई सामने लाने की मांग को मजबूती दें।
इस खबर को साझा करें और न्याय की आवाज को आगे बढ़ाएं।

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Written by

खलारी, रांची

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