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छत्तरपुर में आदिवासी समाज की बैठक में धर्मांतरण और आरक्षण पर उठा मुद्दा, 24 मई को दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन का आह्वान

#पलामू #आदिवासी_आरक्षण : धर्मांतरण कर चुके लोगों को एसटी आरक्षण से बाहर करने की मांग उठी।

पलामू जिले के छत्तरपुर प्रखंड में जनजाति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में आयोजित बैठक में आदिवासी समाज ने धर्मांतरण और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की। बिरसा मुंडा दुर्गा पूजा स्थल मसीहानी में हुई इस बैठक में बड़ी संख्या में समुदाय के लोग जुटे। बैठक में 24 मई 2026 को दिल्ली में प्रस्तावित शक्ति प्रदर्शन में भाग लेने का आह्वान किया गया।

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  • छत्तरपुर प्रखंड के मसीहानी में जनजाति सुरक्षा मंच की बैठक आयोजित।
  • धर्मांतरण कर चुके लोगों को एसटी आरक्षण से बाहर करने की मांग उठी।
  • 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किला मैदान में शक्ति प्रदर्शन की घोषणा।
  • बैठक में जिला प्रभारी राजेश्वर उरांव ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की बात कही।
  • छत्तरपुर क्षेत्र से 500 से अधिक आदिवासी समुदाय के लोग दिल्ली जाने का निर्णय

पलामू जिले के छत्तरपुर प्रखंड में रविवार को आदिवासी समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें धर्मांतरण और अनुसूचित जनजाति आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक जनजाति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में बिरसा मुंडा दुर्गा पूजा स्थल, मसीहानी में आयोजित की गई, जहां क्षेत्र के कई गांवों से आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के अधिकारों और आरक्षण के लाभों को लेकर समाज में चिंता बढ़ रही है। उनका कहना था कि इस विषय पर व्यापक चर्चा और जागरूकता जरूरी है, ताकि समाज अपने अधिकारों के प्रति संगठित और सजग रह सके।

धर्मांतरण और आरक्षण पर उठी बहस

बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनजाति सुरक्षा मंच के पलामू जिला प्रभारी राजेश्वर उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य जनजातीय समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए बनाया गया था।

राजेश्वर उरांव ने कहा: “हमारा उद्देश्य यह है कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों को समझे और उनके संरक्षण के लिए संगठित होकर आवाज उठाए। समाज को जागरूक करना समय की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और विभिन्न राज्यों में बैठकें और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

24 मई को दिल्ली में प्रस्तावित शक्ति प्रदर्शन

बैठक में यह जानकारी दी गई कि इस मांग को लेकर 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किला मैदान में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले देशभर के आदिवासी समुदाय के लोग इसमें भाग लेंगे।

इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार के समक्ष विभिन्न मांगों को रखने की योजना बनाई गई है। बैठक में उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे अपने-अपने गांवों में बैठक कर अधिक से अधिक लोगों को इस आंदोलन के बारे में जानकारी दें।

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राजेश्वर उरांव ने कहा: “हम चाहते हैं कि देशभर का आदिवासी समाज एक मंच पर आए और अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाए।”

स्थानीय स्तर पर भी तेज हो रही तैयारियां

बैठक के दौरान बैजनाथ सिंह ने कहा कि आजादी के कई दशक बाद भी आदिवासी समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा और पहल जरूरी है।

बैजनाथ सिंह ने कहा: “समाज को अपने अधिकारों और भविष्य के प्रति जागरूक रहना होगा। यदि हम संगठित रहेंगे तो अपनी आवाज को मजबूत तरीके से रख सकेंगे।”

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि छत्तरपुर क्षेत्र से 500 से अधिक लोग दिल्ली जाकर प्रस्तावित कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके लिए गांव स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाने की भी बात कही गई।

बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे मौजूद

बैठक में क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राजेश्वर उरांव, अवधेश उरांव, बैजनाथ सिंह, लक्ष्मण सिंह, अशोक सिंह, उपेंद्र सिंह खरवार (मीडिया प्रभारी), पप्पू कुमार उरांव, कुलदीप सिंह खरवार, बबलू उरांव, कमलेश उरांव, सरजू उरांव, रवि उरांव, सुरेश उरांव और उपेंद्र उरांव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

उपस्थित लोगों ने इस मुद्दे पर समाज के भीतर संवाद और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि समाज के हित से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाना चाहिए।

न्यूज़ देखो: आरक्षण और पहचान के सवाल पर बढ़ती बहस

छत्तरपुर में हुई यह बैठक इस बात का संकेत है कि आदिवासी समाज के भीतर आरक्षण और पहचान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा तेज हो रही है। समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा इस विषय पर जागरूकता अभियान और बैठकें आयोजित की जा रही हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और नीति निर्माताओं की ओर से इस विषय पर क्या प्रतिक्रिया आती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संवाद और जागरूकता से मजबूत होता है समाज

किसी भी समाज के अधिकार और पहचान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और जागरूकता बेहद जरूरी होती है। जब लोग एकजुट होकर अपने विचार रखते हैं तो लोकतंत्र मजबूत होता है और समस्याओं के समाधान का रास्ता भी निकलता है।

जरूरी है कि समाज के लोग शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से अपनी बात रखें और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशें। जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज की नींव बनते हैं।

आप इस विषय पर क्या सोचते हैं, अपनी राय जरूर साझा करें। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और समाज से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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