#चैनपुर #श्रमदान_मिशाल : भटौली गांव के लोगों ने जल संकट दूर करने को खुद उठाया कदम।
चैनपुर प्रखंड की रामपुर पंचायत अंतर्गत भटौली गांव के ग्रामीणों ने भीषण गर्मी और जल संकट के बीच श्रमदान कर खजूर ढोंढा पर 20 फीट लंबा बोरी बांध बना दिया। जलस्रोत सूखने से मवेशियों और खेती पर संकट गहरा गया था। ग्राम सभा के निर्णय के बाद ग्रामीणों ने बिना सरकारी मदद का इंतजार किए सामूहिक श्रम से यह कार्य पूरा किया। इस पहल से सिंचाई और पेयजल जैसी जरूरतों को राहत मिलने की उम्मीद है।
- भटौली गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान से बांध बनाया।
- खजूर ढोंढा पर 20 फीट लंबा बोरी बांध तैयार हुआ।
- भीषण गर्मी से जलस्रोत सूखने पर संकट गहराया था।
- लगभग 30 एकड़ भूमि की सिंचाई की उम्मीद।
- मवेशियों के लिए पानी की स्थायी व्यवस्था बनने की संभावना।
- ग्राम प्रधान राजेश बैगा सहित कई ग्रामीण कार्य में जुटे।
चैनपुर प्रखंड की रामपुर पंचायत स्थित राजस्व ग्राम भटौली में ग्रामीणों ने एकजुटता और आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल पेश की है। भीषण गर्मी के कारण इलाके के जलस्रोत सूख गए थे और लोगों के साथ-साथ मवेशियों के सामने भी पानी का संकट खड़ा हो गया था। सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय ग्रामीणों ने ग्राम सभा में निर्णय लेकर श्रमदान से खजूर ढोंढा पर 20 फीट लंबा बोरी बांध तैयार कर दिया। इस सामूहिक प्रयास की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
जल संकट ने बढ़ाई परेशानी
वर्तमान समय में पड़ रही तेज गर्मी के कारण गांव के आसपास के कई प्राकृतिक जलस्रोत सूख चुके थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि बैल, बकरी और अन्य मवेशियों के लिए पीने का पानी जुटाना मुश्किल हो गया था।
खेती पर भी इसका असर पड़ने लगा था। ग्रामीणों को नहाने-धोने और दैनिक उपयोग के लिए भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा था।
ग्राम सभा में लिया गया बड़ा निर्णय
समस्या को देखते हुए फिया फाउंडेशन की कार्यकर्ता रजनी केरकेट्टा ने ग्राम सभा के साथ बैठक की। बैठक में जल संकट के स्थायी समाधान पर चर्चा हुई।
सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सरकारी सहायता का इंतजार करने के बजाय गांव के लोग स्वयं श्रमदान कर बांध बनाएंगे।
ग्रामीणों ने कहा: “जब जरूरत बड़ी हो, तो गांव को खुद आगे आना पड़ता है।”
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर नाराजगी
ग्राम प्रधान राजेश बैगा ने बताया कि इस नाले पर बांध निर्माण के लिए कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मदद मांगी गई, पर समाधान नहीं मिला। इसी निराशा के बाद ग्रामीणों ने खुद पहल करने का फैसला लिया।
राजेश बैगा ने कहा: “अब हमने तय किया कि अपनी समस्या का समाधान खुद करेंगे।”
देखते ही देखते बन गया 20 फीट बांध
निर्णय के बाद पूरा गांव एकजुट हो गया। ग्रामीण अपने घरों से खाली बोरे, कुदाल, तगाड़ी और अन्य उपकरण लेकर खजूर ढोंढा पहुंचे।
लोगों ने बोरियों में बालू भरकर नाले के प्रवाह को रोका और सामूहिक श्रम से 20 फीट लंबा बांध तैयार कर दिया। बांध बनते ही पानी का जमाव शुरू हो गया।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि एक रात में ही नाला भर जाएगा और लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहेगा।
खेती और मवेशियों को मिलेगा लाभ
ग्रामीणों के अनुसार इस बांध से लगभग 30 एकड़ भूमि की सिंचाई संभव हो सकेगी। इससे खेती को राहत मिलेगी और गर्मी के मौसम में फसल बचाने में मदद मिलेगी।
साथ ही मवेशियों के लिए पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था बनेगी। गांव की महिलाओं और परिवारों को दैनिक उपयोग के पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
ग्रामीण एकता की सराहना
मौके पर मौजूद फिया फाउंडेशन के प्रखंड समन्वयक ललित कुमार महतो ने ग्रामीणों के हौसले की सराहना की।
उन्होंने कहा कि यदि ग्राम सभा मजबूत हो और लोग संगठित रहें, तो बड़े कार्य भी श्रमदान से पूरे किए जा सकते हैं।
ललित कुमार महतो ने कहा: “हर काम के लिए सरकार का मुंह ताकना जरूरी नहीं, एकजुट गांव बहुत कुछ कर सकता है।”
इन लोगों ने निभाई अहम भूमिका
इस सामूहिक श्रमदान में ग्राम प्रधान राजेश बैगा, मनीष लोहार, देवंती देवी, जितेंद्र रतिया, सुखदेव रतिया, अंजनी देवी, शुकर्मानी देवी, सुषमा देवी, नीलम देवी, रजनी केरकेट्टा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
ग्रामीणों ने श्रम, समय और संसाधन देकर यह साबित कर दिया कि सामूहिक शक्ति सबसे बड़ी ताकत है।
न्यूज़ देखो: जब गांव जागता है, तब बदलाव खुद बनता है
भटौली गांव की यह पहल बताती है कि विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, जनसहभागिता से भी आता है। जहां व्यवस्था कमजोर पड़ती है, वहां जागरूक समाज रास्ता निकाल लेता है। प्रशासन को ऐसे गांवों को प्रोत्साहन, तकनीकी मदद और संसाधन देना चाहिए ताकि स्थानीय मॉडल पूरे जिले में फैल सकें। यह कहानी आत्मनिर्भर भारत की जमीनी तस्वीर है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मिलकर बदलें गांव की तकदीर
समस्या आए तो निराश न हों, समाधान खोजें।
ग्राम सभा को मजबूत करें और सामूहिक निर्णय लें।
श्रमदान केवल काम नहीं, सामाजिक एकता की पहचान है।
पानी, जंगल और जमीन की रक्षा सबकी जिम्मेदारी है।
अपने गांव की जरूरतों पर मिलकर काम शुरू करें।
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