चैनपुर के लाइफ लाइन हॉस्पिटल में अवैध गर्भपात का खुलासा, पुलिस ने अस्पताल पर जड़ा ताला

चैनपुर के लाइफ लाइन हॉस्पिटल में अवैध गर्भपात का खुलासा, पुलिस ने अस्पताल पर जड़ा ताला

author Aditya Kumar
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#चैनपुर #अवैध_अस्पताल : छापेमारी में बिना डिग्री इलाज और गर्भपात के आरोप सामने आए।

चैनपुर बस स्टैंड के पास संचालित लाइफ लाइन हॉस्पिटल में पुलिस छापेमारी के दौरान अवैध गर्भपात और बिना वैध योग्यता चिकित्सा संचालन के आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और एक युवती को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। संचालक को दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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  • लाइफ लाइन हॉस्पिटल में पुलिस ने देर रात छापेमारी की।
  • 21 वर्षीय युवती के अवैध गर्भपात का आरोप सामने आया।
  • अस्पताल के मुख्य गेट पर पुलिस ने ताला जड़ा
  • संचालक ओमप्रकाश सिंह दस्तावेज पेश करने नहीं पहुंचे।
  • युवती को सीएचसी चैनपुर में भर्ती कराया गया।
  • बिना विशेषज्ञ डॉक्टर संचालन पर गंभीर सवाल उठे।

चैनपुर अनुमंडल मुख्यालय स्थित बस स्टैंड के समीप संचालित लाइफ लाइन हॉस्पिटल में गुरुवार रात पुलिस ने छापेमारी कर कथित अवैध चिकित्सा गतिविधियों का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान एक 21 वर्षीय युवती के गर्भपात किए जाने का आरोप सामने आया। पुलिस ने तत्काल अस्पताल को बंद कर मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। युवती की स्थिति को देखते हुए उसे सरकारी एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर भेजा गया। मामले के बाद क्षेत्र में निजी क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

गुप्त सूचना पर पुलिस की छापेमारी

जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 9 बजे पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि लाइफ लाइन हॉस्पिटल में अवैध तरीके से चिकित्सा कार्य किया जा रहा है।

सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अरविंद कुमार दल-बल के साथ अस्पताल पहुंचे और छापेमारी की। मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और दस्तावेजों की जांच शुरू की गई।

थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने कहा: “सूचना के आधार पर तत्काल कार्रवाई की गई है।”

युवती को अस्पताल से किया गया रेस्क्यू

छापेमारी के दौरान अस्पताल में मौजूद 21 वर्षीय युवती ने पुलिस को बताया कि उसका गर्भपात किया गया है।

युवती की तबीयत नाजुक बताई गई, जिसके बाद पुलिस ने बिना देर किए सरकारी एंबुलेंस से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर भेजा, जहां उसका इलाज शुरू कराया गया।

संचालक को नोटिस, फिर फरार

पुलिस ने अस्पताल संचालक ओमप्रकाश सिंह को शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक रजिस्ट्रेशन और मेडिकल डिग्री के साथ थाने में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

हालांकि तय समय तक संचालक पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। स्थानीय स्तर पर उसके फरार होने की चर्चा है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा: “दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, आगे विधिसम्मत कार्रवाई होगी।”

बिना विशेषज्ञ डॉक्टर संचालन के आरोप

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि अस्पताल में न तो कोई एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात था।

आरोप है कि संचालक स्वयं को डॉक्टर बताकर इलाज कर रहा था, जबकि उसकी योग्यता पर गंभीर सवाल उठे हैं। यदि यह सत्य पाया जाता है तो यह मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।

सरकारी डॉक्टर की मौजूदगी पर चर्चा

छापेमारी के दौरान सीएचसी के डॉ. प्रभात कुमार के अस्पताल में मौजूद होने की चर्चा भी सामने आई। उनकी भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

बताया गया कि उन्होंने युवती की स्थिति को ब्लीडिंग से जुड़ा मामला बताया। हालांकि मामले की आधिकारिक चिकित्सीय पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

(इस संबंध में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है।)

कानूनों के उल्लंघन का मामला

यदि बिना अनुमति केंद्र में गर्भपात और अवैध चिकित्सा संचालन सिद्ध होता है, तो यह गंभीर कानूनी मामला बन सकता है। गर्भसमापन केवल अधिकृत केंद्रों और पात्र चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित नियमों के तहत किया जा सकता है।

पुलिस ने संकेत दिया है कि मामले में संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सीलिंग प्रक्रिया

थाना प्रभारी ने बताया कि अस्पताल को फिलहाल बंद कर दिया गया है। आगे मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में विधिवत सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की नियमित जांच हो, ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य सेवा नहीं, जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

यदि किसी संस्थान में बिना वैध योग्यता और नियमों के इलाज हो रहा है, तो यह सीधे जनता की जान से खिलवाड़ है। चैनपुर की यह कार्रवाई बताती है कि निगरानी तंत्र मजबूत होना कितना जरूरी है। प्रशासन को जिलेभर के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का सत्यापन अभियान चलाना चाहिए। लोगों की मजबूरी को कमाई का साधन बनाने वालों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

इलाज के नाम पर धोखा पहचानें

किसी भी अस्पताल में इलाज से पहले उसकी मान्यता जरूर जांचें।
योग्य डॉक्टर और वैध पंजीकरण की जानकारी लें।
संदिग्ध गतिविधि दिखे तो प्रशासन को तुरंत सूचित करें।
स्वास्थ्य सेवा भरोसे का विषय है, समझौते का नहीं।
जागरूक नागरिक ही ऐसे खेल रोक सकते हैं।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, शेयर करें और लोगों को सतर्क करें।

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Written by

डुमरी, गुमला

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