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सदन में गूंजी पंचायत सहायकों की आवाज, बिश्रामपुर विधायक ने की ठोस नीतिगत मांग

#रांची #विश्रामपुर : विधानसभा सत्र में बिश्रामपुर विधायक ने पंचायत सहायकों के नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और सेवा सुरक्षा पर तत्काल निर्णय की जरूरत बताई।
  • बिश्रामपुर विधायक नरेश प्रसाद सिंह ने सदन में पंचायत सहायकों का मुद्दा उठाया।
  • नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि, सेवा सुरक्षा पर सरकार से शीघ्र निर्णय की मांग।
  • बीमारी व दुर्घटना के दौरान सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की अपील।
  • लंबित फाइलों के तत्काल निपटारे का आग्रह।
  • पंचायत सहायक संघ ने विधायक के प्रयास की सराहना की।

विधानसभा के चालू सत्र में बिश्रामपुर के विधायक नरेश प्रसाद सिंह ने पंचायत सहायकों की लम्बे समय से लंबित मांगों को मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के संचालन में पंचायत सहायकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए उनके मानदेय, नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और आपातकालीन सहायता पर सरकार को अब निर्णायक कदम उठाना चाहिए। इस मुद्दे पर सदन में विधायक की आवाज स्पष्ट और प्रभावी दिखाई दी, जिसे पंचायत सहायकों ने उम्मीद की किरण के रूप में देखा है।

विधायक ने क्यों उठाई पंचायत सहायकों की मांग?

विधायक नरेश प्रसाद सिंह ने सदन में कहा कि पंचायत सहायक गांवों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का पहला आधार होते हैं। वे जनगणना, विकास योजनाओं की रिपोर्टिंग, लाभुकों के चयन, पंचायत कार्यालय संचालन और ग्रामीण प्रशासन के दैनिक कार्यों में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
इसके बावजूद, मानदेय बेहद कम, सेवा अस्थिर और सुरक्षा के कोई मजबूत प्रावधान नहीं होने से पंचायत सहायक लगातार असंतोष और असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।

नियमितीकरण और मानदेय वृद्धि पर जोर

विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को जल्द से जल्द पंचायत सहायकों का नियमितीकरण करने की दिशा में निर्णय लेना चाहिए। साथ ही मानदेय बढ़ाकर उन्हें सम्मानजनक जीवनयापन का अवसर देना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पंचायत सहायकों को बीमारी, दुर्घटना या आकस्मिक परिस्थितियों में सरकारी सहायता मिले, ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिल सके।

लंबित फाइलों के त्वरित निपटारे की मांग

सदन में बोलते हुए विधायक ने कहा कि पंचायत सहायकों से संबंधित कई प्रस्ताव और फाइलें विभाग में वर्षों से लंबित हैं। यदि सरकार तुरंत कार्रवाई करे और इन फाइलों का निपटारा करे, तो हजारों पंचायत सहायकों को राहत मिलेगी।
यह कदम न केवल उनके कार्य के प्रति सम्मान प्रदर्शित करेगा, बल्कि पंचायतों के प्रशासनिक ढांचे को भी और मजबूत करेगा।

पंचायत सहायक संघ की प्रतिक्रिया

विधायक की यह पहल पंचायत सहायकों के बीच राहत और उत्साह का कारण बनी है। पंचायत सहायक संघ ने विधायक की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उनके हक़, अधिकार और सम्मान की लड़ाई में सकारात्मक बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।
संघ के कई सदस्यों ने उम्मीद व्यक्त की कि सरकार अब इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द निर्णय लेगी।

न्यूज़ देखो: पंचायत सहायकों की समस्याओं पर ठोस नीति की जरूरत

यह मामला दिखाता है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले पंचायत सहायक लंबे समय से असुरक्षा और कम वेतन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार यदि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाना चाहती है, तो इन्हें सिर्फ सहायक नहीं बल्कि ग्रामीण विकास के स्तंभ के रूप में देखना होगा। बेहतर नीतियां, सामाजिक सुरक्षा और समय पर मानदेय—इन्हीं से ग्रामीण शासन की गति मजबूत होगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पंचायत सहायकों की आवाज को मजबूत बनाना अब सभी की जिम्मेदारी

पंचायत सहायक गांवों में विकास की पहली कड़ी हैं। उनका सशक्त होना मतलब गांवों का सशक्त होना। यदि उनके हक़ और अधिकारों पर चर्चा सदन तक पहुंच चुकी है, तो समाज के रूप में हमें भी उनकी समस्याओं को समझना और सरकार तक पहुंचाना चाहिए।
आप क्या मानते हैं—क्या पंचायत सहायकों को तुरंत नियमित किया जाना चाहिए?
अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को शेयर करें और पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने के अभियान का हिस्सा बनें।

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Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

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