
#हजारीबाग #जेल_फरारी : जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से फरार तीन सजायाफ्ता कैदी महाराष्ट्र में दबोचे गए।
हजारीबाग के जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से 31 दिसंबर 2025 की रात फरार हुए तीन सजायाफ्ता कैदियों को हजारीबाग पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी विशेष जांच टीम की सतत निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और अंतरराज्यीय समन्वय के बाद संभव हो सकी। कैदियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुए फरारी की थी, जिसे राज्य की सबसे सुरक्षित जेल से भागना माना गया। यह कार्रवाई पुलिस की त्वरित जांच और प्रभावी अपराध नियंत्रण का उदाहरण मानी जा रही है।
- 31 दिसंबर 2025 को जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, हजारीबाग से फरार हुए थे तीन कैदी।
- महाराष्ट्र के सोलापुर जिला अंतर्गत करमाला थाना क्षेत्र से हुई गिरफ्तारी।
- फरारी के बाद झारखंड, बिहार और महाराष्ट्र में चला सघन सर्च अभियान।
- तीन SIT टीमों का गठन कर तकनीकी और मैदानी जांच की गई।
- तीनों कैदी पोक्सो समेत गंभीर मामलों में सजा काट रहे थे।
हजारीबाग जिले के जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से फरार हुए तीन सजायाफ्ता कैदियों को लेकर चली लगभग दस दिनों की चुनौतीपूर्ण पुलिस कार्रवाई आखिरकार सफल रही। 31 दिसंबर 2025 की रात जेल से भागे इन कैदियों को हजारीबाग पुलिस ने महाराष्ट्र राज्य के सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र से विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने न केवल पुलिस की कार्यकुशलता को साबित किया, बल्कि केंद्रीय कारा से फरारी जैसी गंभीर घटना पर उठे सवालों का भी आंशिक जवाब दिया है।
फरारी की पूरी घटना कैसे हुई
पुलिस अधीक्षक कार्यालय, हजारीबाग के अनुसार 31 दिसंबर 2025 की रात करीब 01:30 बजे तीन सजायाफ्ता कैदियों ने जेल के सेक्टर-06 स्थित वार्ड संख्या-04 से फरारी की। तीनों कैदियों ने पहले से कमजोर की गई खिड़की के लोहे के रॉड को तोड़ा, फिर लाल रंग की बेडशीट को फाड़कर रस्सीनुमा बनाया और नीचे उतरे। इसके बाद वे आंतरिक दीवार फांदकर बाहरी हिस्से तक पहुंचे और करीब 10 मिनट तक गौशाला क्षेत्र में छिपे रहे।
इसके बाद लोहे के हुक, चादर और लकड़ी के डंडे की मदद से बाहरी चारदीवारी पार कर तीनों कैदी फरार हो गए। घटना के बाद केंद्रीय कारा प्रशासन की ओर से लोहसिंघना थाना कांड संख्या 196/2025 दर्ज कराया गया।
फरार कैदियों की पहचान
गिरफ्तार किए गए तीनों सजायाफ्ता कैदी धनबाद जिले के निवासी हैं—
1. देवा भुईयां उर्फ देव कुमार भुईयां, पिता शंभू भुईयां, सेंदरा नंबर-10, थाना लोयाबाद, जिला धनबाद।
2. राहुल रजवार, पिता जगन रजवार, निवासी मोदीडीह नया बाजार, थाना जोगता, जिला धनबाद।
3. जितेंद्र रवानी, पिता जतर रवानी, निवासी गोधर, रवानी बस्ती, थाना केंदुआडीह, जिला धनबाद।
तीनों कैदी क्रमशः 20 वर्ष, 27 वर्ष और आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे और अलग-अलग पोक्सो मामलों में दोषसिद्ध थे।
SIT टीमों का गठन और जांच की रणनीति
घटना की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग पुलिस ने इसे राज्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर अमित आनंद (भा.पु.से.) के नेतृत्व में तीन विशेष जांच टीमों (SIT) का गठन किया गया।
- पहली टीम तकनीकी शाखा के सहयोग से मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रेल पर काम कर रही थी।
- दूसरी टीम कैदियों के फरारी मार्ग का भौतिक ट्रेल खंगाल रही थी।
- तीसरी टीम झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी।
महाराष्ट्र तक कैसे पहुंचे कैदी
पुलिस जांच में सामने आया कि फरारी के बाद तीनों कैदी पहले सिंदूर चौक पहुंचे, फिर टोटो और पिकअप वाहन से इचाक, बरकठा, बरही और कोडरमा होते हुए गया पहुंचे। वहां से ट्रेन पकड़कर क्यूल और जसीडीह गए, जहां उन्होंने पुणे जाने वाली ट्रेन का दो दिन तक इंतजार किया।
4 जनवरी 2026 को तीनों ने जसीडीह–पुणे एक्सप्रेस पकड़ी और 6 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र के दौंड जंक्शन पर उतरे। वहां से बस और पैदल यात्रा कर वे सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र के कोरडी चौक पहुंचे, जहां एक पूर्व परिचित ईंट भट्ठा मालिक के यहां मजदूरी करने लगे।
गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड
सूचना के आधार पर गठित SIT ने करमाला थाना क्षेत्र के कोरडी ईंट-भट्ठा से तीनों कैदियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें हजारीबाग लाया गया है। पुलिस के अनुसार तीनों से फरारी में प्रयुक्त साधनों और सहयोगियों को लेकर गहन पूछताछ की जा रही है।
आपराधिक इतिहास ने बढ़ाई चिंता
गिरफ्तार कैदियों में देवा भुईयां का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है, जिसमें हत्या के प्रयास, लूट, अपहरण और कई पोक्सो मामले दर्ज हैं। वह वर्ष 2021 में धनबाद जेल से भी फरार हो चुका था। वहीं जितेंद्र रवानी और राहुल रजवार भी कई गंभीर मामलों में आरोपित रहे हैं।
न्यूज़ देखो: सबसे सुरक्षित जेल से फरारी पर बड़ा सवाल
यह घटना झारखंड की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, हजारीबाग पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अंतरराज्यीय समन्वय ने यह साबित किया है कि अपराधियों को लंबे समय तक कानून से छिपना आसान नहीं। अब निगाह इस पर है कि जेल प्रशासन की जवाबदेही कैसे तय होती है और सुरक्षा में क्या सुधार किए जाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सतर्कता और जवाबदेही ही सुरक्षा की कुंजी
जेल से फरारी जैसी घटनाएं केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा हैं। जरूरी है कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, लेख को आगे बढ़ाएं और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने में सहभागी बनें।




