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बरवाडीह की नदी में सड़ा आलू फेंकने से फैला प्रदूषण, लोगों में गहरा आक्रोश

#लातेहार #पर्यावरण_प्रदूषण : आदर्श नगर धड़धड़ी नदी में सड़ा आलू फेंके जाने से जल दूषित, ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग।

लातेहार जिले के बरवाडीह में गुरुवार को आदर्श नगर धड़धड़ी मुख्य नदी में भारी मात्रा में सड़ा आलू फेंके जाने की घटना सामने आई है। इस हरकत से नदी का पानी दूषित हो गया, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने एक व्यापारी पर पिकअप वाहन से सड़ा आलू नदी में डालने का आरोप लगाया है। घटना से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है।

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  • आदर्श नगर धड़धड़ी मुख्य नदी में सड़ा आलू फेंकने की घटना।
  • श्मशान घाट के पास पिकअप वाहन से डाला गया सड़ा आलू।
  • स्थानीय लोगों के विरोध पर आधा आलू डालकर व्यापारी फरार
  • नदी में पहले भी सड़ी सब्जी और कचरा फेंकने की शिकायत।
  • पानी प्रदूषित, बीमारी फैलने का खतरा।
  • ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। आदर्श नगर धड़धड़ी मुख्य नदी में गुरुवार की सुबह भारी मात्रा में सड़ा आलू डाल दिया गया, जिससे नदी का पानी दूषित हो गया। यह नदी स्थानीय लोगों के लिए न केवल नहाने, बल्कि मवेशियों के पानी पीने का भी प्रमुख स्रोत है। ऐसे में नदी में इस तरह की गंदगी फैलना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

श्मशान घाट के पास हुई घटना

स्थानीय लोगों के अनुसार, श्मशान घाट के पास सुबह के समय एक पिकअप वाहन से सड़ा आलू नदी में डाला जा रहा था। यह देख आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत इसका विरोध किया। विरोध के बावजूद संबंधित व्यापारी आधे से अधिक सड़ा आलू नदी में डाल चुका था। ग्रामीणों के तेवर सख्त होते देख वह शेष बचे सड़े आलू से लदे पिकअप वाहन को लेकर मौके से फरार हो गया।

इस पूरी घटना को लेकर इलाके में नाराजगी का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें इसकी भनक न लगती, तो पूरी खेप नदी में डाल दी जाती।

पहले भी होती रही है ऐसी हरकत

घटना के बाद आसपास के दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले भी इस नदी में सड़ा आलू, खराब सब्जियां और अन्य बेकार सामान लाकर फेंका जाता रहा है। इस तरह की गतिविधियों से नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगातार बिगड़ता जा रहा है और प्रदूषण तेजी से फैल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी की नियमित सफाई नहीं कराई जाती और ऊपर से इस तरह का कचरा फेंके जाने से नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता जा रहा है।

स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है कि इस नदी के पानी का उपयोग नहाने और मवेशियों के पानी पीने के लिए किया जाता है। दूषित पानी के संपर्क में आने से त्वचा रोग, पेट की बीमारियां और अन्य संक्रामक रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में बीमारी फैलने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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नदी की सफाई को लेकर सवाल

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि वर्षों से धड़धड़ी नदी की सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। बरसात के दिनों में यही नदी आसपास के इलाकों की जरूरतों को पूरा करती है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण इसकी हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।

लोगों का मानना है कि यदि नियमित सफाई और निगरानी की व्यवस्था होती, तो कोई भी व्यापारी या व्यक्ति इस तरह नदी में कचरा फेंकने की हिम्मत नहीं करता।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि नदी में सड़ा आलू और अन्य गंदगी फेंकने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही नदी के किनारे निगरानी बढ़ाने और चेतावनी बोर्ड लगाने की भी मांग उठी है।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल चेतावनी से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषियों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई ऐसी हरकत न कर सके।

न्यूज़ देखो: पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही उजागर

बरवाडीह की यह घटना दिखाती है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभी भी गंभीरता की कमी है। नदी जैसे प्राकृतिक संसाधनों को कचरा डंपिंग स्थल बना देना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरनाक है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

नदी बचेगी, तभी जीवन बचेगा

नदियां सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा होती हैं। इन्हें गंदगी से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं, खबर को साझा करें और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग करें, ताकि बरवाडीह की नदी फिर से स्वच्छ और सुरक्षित रह सके।

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