
#सिमडेगा #सड़क_सुरक्षा : जिला मुख्यालय में आयोजित मैराथन दौड़ से यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता को मिला व्यापक समर्थन।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत 24 जनवरी 2026 को सिमडेगा जिला मुख्यालय में “रन फॉर रोड सेफ्टी” मैराथन का आयोजन किया गया। जीरो टोलरेंस एवं दुर्घटना मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं, नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। मैराथन प्रिंस चौक से अल्बर्ट एक्का स्टेडियम तक संपन्न हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाना रहा।
- राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत सिमडेगा जिला मुख्यालय में आयोजन।
- प्रिंस चौक से अल्बर्ट एक्का स्टेडियम तक निकाली गई मैराथन दौड़।
- युवाओं, नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी।
- पुलिस अधीक्षक सिमडेगा ने यातायात नियमों के पालन पर दिया जोर।
- कोलेबिरा विधायक भूषण बाड़ा और सिमडेगा विधायक विकसल कोंगाड़ी की उपस्थिति।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के अवसर पर सिमडेगा में आयोजित “रन फॉर रोड सेफ्टी” मैराथन कार्यक्रम ने जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक वातावरण तैयार किया। इस आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह संदेश गया कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक दायित्व है। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को यातायात नियमों के पालन और सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक किया गया। मैराथन के दौरान पूरे मार्ग पर उत्साह और अनुशासन का माहौल बना रहा।
मैराथन आयोजन का उद्देश्य और संदेश
इस मैराथन का मुख्य उद्देश्य लोगों को सड़क सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करना और आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी देना था। तेज गति, हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी, नशे में वाहन चलाना और यातायात नियमों का उल्लंघन जैसी आदतें सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनती हैं। कार्यक्रम के जरिए इन सभी पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया गया और सुरक्षित ड्राइविंग को जीवन रक्षा से जोड़ा गया।
युवाओं और नागरिकों की भागीदारी
मैराथन में बड़ी संख्या में युवाओं और युवतियों ने भाग लिया। इसके साथ ही आम नागरिकों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा का संदेश तभी प्रभावी होगा जब समाज का हर वर्ग इसमें सहभागी बने। प्रतिभागियों ने दौड़ के माध्यम से यह दिखाया कि जागरूकता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सक्रिय सहभागिता से आती है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उपस्थिति
कार्यक्रम में कोलेबिरा विधायक माननीय भूषण बाड़ा और सिमडेगा विधायक माननीय विकसल कोंगाड़ी की उपस्थिति ने आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। इसके साथ ही उपायुक्त महोदया, पुलिस अधीक्षक सिमडेगा, अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी और वरीय पुलिस पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इन सभी की मौजूदगी ने सड़क सुरक्षा अभियान को प्रशासनिक और सामाजिक समर्थन प्रदान किया।
पुलिस अधीक्षक का संदेश
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक सिमडेगा ने यातायात एवं सड़क सुरक्षा नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने नियमों के पालन को जीवन सुरक्षा से जोड़ते हुए नागरिकों से जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की।
पुलिस अधीक्षक सिमडेगा ने कहा: “सड़क सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा सवाल है। नियमों का पालन कर हम न केवल अपनी, बल्कि अपने परिवार और समाज की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।”
उन्होंने लोगों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करें और प्रशासन का सहयोग करें।
सड़क सुरक्षा की आवश्यकता और वर्तमान परिप्रेक्ष्य
आज के समय में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी हैं। तेज रफ्तार जीवनशैली और नियमों की अनदेखी इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में “रन फॉर रोड सेफ्टी” जैसे कार्यक्रम लोगों को सोचने पर मजबूर करते हैं कि थोड़ी सी सावधानी कैसे बड़े हादसों को टाल सकती है। सिमडेगा में यह आयोजन जिले के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है, जहां प्रशासन और जनता ने मिलकर जिम्मेदारी निभाई।
न्यूज़ देखो: सड़क सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल
सिमडेगा में आयोजित यह मैराथन बताती है कि सड़क सुरक्षा अभियान तभी सफल हो सकते हैं जब प्रशासन और समाज एक साथ आगे आएं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने संदेश को मजबूती दी है। अब जरूरत है कि ऐसे आयोजनों का प्रभाव रोजमर्रा के व्यवहार में भी दिखे। सवाल यह है कि क्या लोग इस जागरूकता को लंबे समय तक अपनाए रखेंगे? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित जीवन का संकल्प
सड़क पर एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार को प्रभावित कर सकती है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और गति सीमा का पालन करना कोई बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजनों से मिली प्रेरणा को अपने दैनिक जीवन में उतारना ही सच्ची भागीदारी है।
अब समय है कि हम खुद से शुरुआत करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।







