#तोरपा #अनुमंडल_मांग : विधानसभा में क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक पहुंच को लेकर उठी महत्वपूर्ण आवाज
- तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने विधानसभा में बानो व तोरपा को अनुमंडल बनाने की मांग उठाई।
- बानो प्रखंड सिमडेगा मुख्यालय से करीब 65 किमी दूरी पर स्थित।
- तोरपा प्रखंड खूंटी जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर।
- लंबी दूरी के कारण ग्रामीणों को प्रशासनिक कार्यों में हो रही भारी परेशानी।
- अनुमंडल का दर्जा मिलने से सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान होने की बात कही।
झारखंड विधानसभा में क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक सुविधा को लेकर तोरपा विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुदीप गुड़िया ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड तथा खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड को अनुमंडल का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा कि दोनों क्षेत्रों के लोगों को सरकारी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। विधायक ने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और विकास की गति तेज होगी।
विधानसभा में क्षेत्रीय समस्याओं को रखा प्रमुखता से
विधायक सुदीप गुड़िया ने सदन में अपने वक्तव्य के दौरान कहा कि बानो और तोरपा दोनों ही प्रखंड भौगोलिक दृष्टि से बड़े और जनसंख्या की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इसके बावजूद इन्हें अब तक अनुमंडल का दर्जा नहीं मिल पाया है, जिससे स्थानीय लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय तक बार-बार जाना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि यह स्थिति ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए समय और आर्थिक दोनों दृष्टि से परेशानी का कारण बनती है।
दूरी बनी बड़ी प्रशासनिक बाधा
सदन में दिए गए अपने वक्तव्य में विधायक ने बताया कि बानो प्रखंड सिमडेगा जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित है। वहीं तोरपा प्रखंड खूंटी जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर है।
उन्होंने कहा कि इतनी लंबी दूरी तय कर प्रशासनिक सेवाएं प्राप्त करना ग्रामीण जनता के लिए बेहद कठिन हो जाता है, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों के लिए यह और भी चुनौतीपूर्ण है।
अनुमंडल बनने से मिलेंगी कई सुविधाएं
विधायक ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यदि बानो और तोरपा को अनुमंडल का दर्जा दिया जाता है तो क्षेत्र में प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा।
अनुमंडल बनने से अंचल, न्यायालय, पुलिस, राजस्व एवं अन्य विभागीय सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे आम जनता को तत्काल राहत मिलेगी।
साथ ही सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति
विधायक सुदीप गुड़िया ने यह भी कहा कि प्रशासनिक इकाई का विस्तार केवल सुविधा ही नहीं, बल्कि विकास का आधार भी होता है।
अनुमंडल बनने से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दोनों प्रखंड अनुमंडल बनने की सभी आवश्यक अहर्ताओं को पूरा करते हैं, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जनता की लंबे समय से रही है मांग
स्थानीय स्तर पर बानो और तोरपा को अनुमंडल बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया है।
विधायक ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मांग नहीं बल्कि जनसुविधा और सुशासन से जुड़ा विषय है, जिसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
न्यूज़ देखो: प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से ही सशक्त होगा ग्रामीण झारखंड
बानो और तोरपा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को अनुमंडल का दर्जा देने की मांग प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। यदि सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे न केवल प्रशासनिक पहुंच बढ़ेगी बल्कि क्षेत्रीय संतुलित विकास को भी मजबूती मिलेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आपकी आवाज ही विकास की असली ताकत है
क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर जागरूक रहना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
स्थानीय सुविधाओं के लिए उठाई गई आवाज बदलाव की दिशा तय करती है।
आप भी अपने क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर सजग रहें।
इस खबर को साझा करें और अपनी राय जरूर दें कि क्या बानो और तोरपा को अनुमंडल का दर्जा मिलना चाहिए?