
#आनंदपुर #पश्चिमी_सिंहभूम #मारंगबुरु_पूजा : परंपरा निभाते हुए पुरुषों ने विधिवत अनुष्ठान किया।
आनंदपुर प्रखंड के अंबेडकर बस्ती में ग्रामीणों ने मारंगबुरु की पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न की। सांपु नाला किनारे रैनुगोड़ा में पुरुष सदस्यों ने विधिवत अनुष्ठान कर बलि दी और सामूहिक रूप से अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। पूजा के बाद प्रसाद वितरण हुआ और गाजे-बाजे के साथ सभी घर लौटे। यह आयोजन पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।
- अंबेडकर बस्ती, आनंदपुर में मारंगबुरु पूजा आयोजित।
- सांपु नाला किनारे रैनुगोड़ा में विधिवत अनुष्ठान व बलि।
- सभी पुरुष सदस्यों की सक्रिय भागीदारी।
- पूजा पश्चात प्रसाद ग्रहण और गाजे-बाजे संग वापसी।
- पुजारी शिला हरिजन सहित कई ग्रामीण उपस्थित।
आनंदपुर प्रखंड स्थित अंबेडकर बस्ती में मारंगबुरु की पूजा परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न की गई। इस अवसर पर बस्ती के पुरुष सदस्य एकत्रित होकर सांपु नाला किनारे रैनुगोड़ा पहुंचे, जहां विधिवत पूजा-अर्चना कर बलि दी गई। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया और गाजे-बाजे के साथ सभी श्रद्धालु अपने-अपने घर लौटे।
परंपरा और आस्था का संगम
ग्रामीणों के अनुसार यह पूजा वर्षों से चली आ रही पारंपरिक मान्यता का हिस्सा है। मारंगबुरु को ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है और समुदाय की सुख-शांति के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है। पूजा स्थल पर धार्मिक विधि-विधान का पालन करते हुए सभी अनुष्ठान संपन्न किए गए।
पुजारी शिला हरिजन ने कहा:
“मारंगबुरु की यह पूजा हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित परंपरा है, जिसे हम आज भी पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाते हैं।”
उन्होंने बताया कि यह आयोजन सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है और इसमें अंबेडकर बस्ती के सभी पुरुष सदस्य सक्रिय रूप से योगदान देते हैं।
सांपु नाला किनारे हुआ अनुष्ठान
पूजा का आयोजन सांपु नाला के किनारे स्थित रैनुगोड़ा में किया गया। ग्रामीणों ने निर्धारित स्थल पर एकत्र होकर पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना की। अनुष्ठान के दौरान बलि भी दी गई, जिसे धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
पूजा संपन्न होने के बाद सभी ग्रामीणों ने वहीं प्रसाद ग्रहण किया। वातावरण गाजे-बाजे की धुन से गूंज उठा और श्रद्धालु उत्साहपूर्वक अपने घरों को लौटे।
सामूहिक सहभागिता रही विशेष
इस आयोजन में बस्ती के कई प्रमुख ग्रामीण उपस्थित रहे। मौके पर राकेश भट्ट, अर्जुन मुखी, मिटकु मुखी, अजय मुखी, किसन मुखी, छूनकु मुखी, आशिक मुखी, सुखदेव मुखी समेत अन्य ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया।
ग्रामीणों ने बताया कि यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। सामूहिक रूप से आयोजित इस कार्यक्रम से आपसी भाईचारे और परंपराओं के संरक्षण को बल मिलता है।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
मारंगबुरु पूजा आदिवासी और स्थानीय परंपराओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत है। ऐसी पूजा-अर्चनाएं ग्रामीण समाज में सामूहिकता और पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखने का माध्यम बनती हैं। पूर्वजों द्वारा स्थापित परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में ऐसे आयोजनों की अहम भूमिका होती है।
ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और सामुदायिक भावना को मजबूत करने में सहायक होते हैं। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है।
न्यूज़ देखो: परंपरा से जुड़ाव और सामूहिक एकता का संदेश
आनंदपुर की यह पूजा दर्शाती है कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है। पूर्वजों की परंपराओं को निभाने की प्रतिबद्धता सामाजिक एकता को मजबूत करती है। ऐसे आयोजन स्थानीय संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि इन परंपराओं का सम्मान और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखें, एकता को मजबूत बनाएं
हमारी परंपराएं ही हमारी पहचान हैं। यदि हम उन्हें संजोकर रखेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहेंगी। सामूहिक आयोजनों से समाज में विश्वास और भाईचारा बढ़ता है।
आइए, अपनी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का संकल्प लें।
आपके क्षेत्र में भी ऐसी पारंपरिक पूजा होती है?
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सक्रिय रहें, अपनी विरासत पर गर्व करें और समाज को जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं।



