Lohardaga

रांची लोहरदगा टोरी रेल लाइन के कोयल नदी पुल में दरार के बाद ट्रेनों का परिचालन बंद

#लोहरदगा #रेलवे_अपडेट : बालू उठाव और कटाव बना नुकसान का मुख्य कारण – क्षतिग्रस्त पिलरों की मरम्मत जल्द होगी।

रांची-लोहरदगा-टोरी रेल लाइन के कोयल नदी स्थित रेलवे ब्रिज संख्या 115 में दरार आने के बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन फिलहाल बंद कर दिया गया है। मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ लोहरदगा पहुंचे और मौके पर पुल का विस्तृत निरीक्षण किया। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए इरगांव हॉल्ट तक मेमू ट्रेन और कनेक्टिंग बस सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इस घटना ने नदी से हो रहे बालू उठाव और कटाव के कारण रेल संरचना पर पड़ रहे असर को उजागर किया है।

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  • पुल के पिलर संख्या 4 और 5 में आई दरार के बाद परिचालन रोका गया।
  • दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र ने किया स्थल निरीक्षण।
  • सबसे पहले पिलर संख्या 5 की मरम्मत करने का निर्देश।
  • 15 फरवरी 2026 तक सॉइल टेस्टिंग का काम होगा पूरा।
  • मार्च के अंत तक ट्रेन सेवा बहाल करने का लक्ष्य।
  • मरम्मत के सभी कार्य मई 2026 तक पूरे होने की संभावना।

रांची-लोहरदगा-टोरी रेल लाइन झारखंड की महत्वपूर्ण रेल लाइनों में गिनी जाती है। इसी रेलखंड के कोयल नदी पर बने पुराने रेलवे पुल के दो पिलरों में अचानक दरार देखे जाने के बाद सुरक्षा कारणों से ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। परिचालन बंद होने से रोज यात्रा करने वाले सैकड़ों यात्रियों के सामने असुविधा उत्पन्न हो गई है। रेलवे ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल तकनीकी समीक्षा प्रारंभ कर दी है।

महाप्रबंधक का दो घंटे तक चला निरीक्षण

मंगलवार की सुबह दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र विशेष स्पीक कोच से लोहरदगा स्टेशन पहुंचे। उनके साथ इंजीनियरिंग विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद थे। महाप्रबंधक सीधे कोयल नदी पर बने रेलवे ब्रिज तक पहुंचे और लगभग दो घंटे तक पुल के अलग-अलग हिस्सों का बारीकी से मुआयना किया।

निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पुल के पिलर संख्या 4 और 5 में संरचनात्मक कमजोरी आई है। महाप्रबंधक ने तकनीकी टीम से चर्चा करते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए मरम्मत कार्य तेज गति से और वैज्ञानिक तरीके से किया जाए।

महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र ने कहा: “कोयल नदी पुल के पिलरों में आई दरार को गंभीरता से लिया गया है। सबसे पहले पिलर संख्या 5 की मरम्मत की जाएगी। इसके बाद अन्य पिलरों को चरणबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जाएगा।”

पिलरों की जैकेटिंग और पाइलिंग से होगी मजबूती

रेलवे के अभियंताओं के अनुसार पुल के क्षतिग्रस्त पिलर संख्या 4, 5, 6 और 7 को जैकेटिंग और पाइलिंग तकनीक के माध्यम से मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए तीन-चार अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो 24 घंटे लगातार काम करेंगी। स्टील गार्डर के सहारे अस्थायी परिचालन शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द ट्रेन सेवा बहाल हो सके।

महाप्रबंधक ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता में किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। पुल की पूरी संरचना का सॉइल टेस्टिंग, हाइड्रोलॉजिकल स्टडी और लोड टेस्ट के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

15 फरवरी तक पूरा होगा सॉइल टेस्टिंग

रेलवे ने पुल के आसपास की मिट्टी और नदी के बहाव का वैज्ञानिक परीक्षण कराने का फैसला किया है। बताया गया कि 15 फरवरी 2026 तक सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्य योजना तैयार होगी। महाप्रबंधक ने कहा कि पूरी कोशिश रहेगी कि मार्च के अंतिम सप्ताह तक इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन पुनः प्रारंभ हो जाए।

नए पुल निर्माण की भी बनेगी योजना

दक्षिण पूर्व रेलवे अब कोयल नदी में नए आधुनिक रेलवे पुल के निर्माण को लेकर भी योजना पर काम करेगा। अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान पुल काफी पुराना है और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नया पुल बनाना जरूरी है। इसके लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

रेल परिचालन बंद होने के कारण यात्रियों को राहत देने के लिए महाप्रबंधक ने कई अहम घोषणाएं की हैं। लोहरदगा स्टेशन से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित इरगांव हॉल्ट तक मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन किया जाएगा। लोहरदगा से इरगांव तक यात्रियों को बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उन्हें ज्यादा परेशानी न हो।

इसके अलावा लोहरदगा से टोरी के लिए कनेक्टिंग ट्रेन की सुविधा भी शुरू की जाएगी। फिलहाल रांची से लोहरदगा के बीच एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। रेलवे प्रशासन ने कहा कि यह अस्थायी कदम है और मरम्मत पूरा होते ही नियमित सेवा बहाल कर दी जाएगी।

बालू उठाव और कटाव बना नुकसान का मुख्य कारण

निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने यह भी कहा कि कोयल नदी से लगातार हो रहे बालू उठाव और कटाव के कारण पुल के पिलरों को नुकसान पहुंचा है। नदी के तल में बदलाव आने से पिलरों की नींव कमजोर हुई, जिसके चलते दरारें उत्पन्न हुईं। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से भी इस दिशा में समन्वय बनाकर काम करने की बात कही है।

सिटी डीएसपी रमन ने कहा: “रेलवे पुल में आई तकनीकी खराबी को लेकर पुलिस प्रशासन रेलवे के साथ समन्वय कर रहा है। यात्रियों की सुरक्षा और शांति व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

मरम्मत कार्य पर खर्च और समय सीमा

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस घटना के बाद मरम्मत कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। मई 2026 तक सभी पिलरों की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। मार्च के अंत तक अस्थायी रूप से परिचालन प्रारंभ करने और उसके बाद स्थायी समाधान लागू करने की योजना है। रेलवे का कंप्यूटर इनफार्मेशन सिस्टम ठीक से काम कर रहा है, लेकिन पुल क्षेत्र में बिजली व्यवस्था बाधित हुई है, जिसे दुरुस्त करने का प्रयास चल रहा है।

स्थानीय जन प्रतिक्रिया

लोहरदगा और पलामू क्षेत्र के यात्रियों में इस खबर के बाद चिंता देखी जा रही है। रोज कामकाज और पढ़ाई के लिए रांची जाने वाले लोगों को विशेष रूप से परेशानी हो रही है। हालांकि रेलवे द्वारा बस सेवा और कनेक्टिंग ट्रेन की घोषणा से उन्हें कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

चुनौतियां और आगे की राह

रेलवे महाप्रबंधक ने कहा कि पुल की मरम्मत के दौरान आने वाली चुनौतियों को तकनीकी टीम की मदद से दूर किया जाएगा। सभी एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कार्य तेज गति से और योजनाबद्ध तरीके से हो।

न्यूज़ देखो: यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम

यह खबर बताती है कि रेलवे संरचनाओं की नियमित मॉनिटरिंग कितनी जरूरी है। बालू उठाव के कारण पुल को हुए नुकसान ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन से आधारभूत ढांचे पर क्या असर पड़ता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मरम्मत कार्य कितनी जल्दी पूरा होता है और नया पुल निर्माण की योजना कब धरातल पर उतरती है। यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना रेलवे का सराहनीय कदम है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सजग यात्रा और नागरिक जिम्मेदारी का समय

रेल यात्रियों को चाहिए कि वे रेलवे द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और वैकल्पिक बस सेवा का सहयोगपूर्वक उपयोग करें।
नदी से बालू उठाव जैसे विषयों पर स्थानीय प्रशासन को भी गंभीर पहल करनी होगी।
आप भी इस खबर को साझा करें ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें कि नए पुल का निर्माण कितना जरूरी है।
रेलवे की इस पहल पर सुझाव दें और सकारात्मक चर्चा का हिस्सा बनें।
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