
#गढ़वा #पुण्यतिथि_स्मरण : बिहार झारखंड की राजनीति के कद्दावर नेता लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती के योगदान को लोगों ने किया याद।
भवनाथपुर के पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही के पिता और बिहार झारखंड की राजनीति में कद्दावर पहचान रखने वाले पूर्व मंत्री स्वर्गीय लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती की पुण्यतिथि पर गढ़वा और भवनाथपुर क्षेत्र में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुए। समर्थकों और जनप्रतिनिधियों ने उनके जीवन और जनसेवा को स्मरण किया।
- स्वर्गीय लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती की आज मनाई जा रही पुण्यतिथि।
- वर्ष 1969 में बिहार विधानसभा के लिए विधायक निर्वाचित हुए थे।
- झारखंड गठन के बाद छह माह तक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
- उनके पुत्र भानु प्रताप शाही ने तीन बार भवनाथपुर से विधायक बनकर विरासत संभाली।
- सोशल मीडिया पर समर्थकों ने उनकी तस्वीरें साझा कर दी श्रद्धांजलि।
- जनप्रतिनिधियों ने उनके जीवन को सादगी और संघर्ष का प्रतीक बताया।
गढ़वा जिले के भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ पूरे झारखंड और पूर्ववर्ती बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पूर्व मंत्री स्वर्गीय लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर भवनाथपुर, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों में उनके समर्थक, शुभचिंतक तथा सामाजिक कार्यकर्ता भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
राजनीति में संघर्ष से बनी बड़ी पहचान
स्वर्गीय देहाती का राजनीतिक जीवन बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। वे उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने जमीनी स्तर से उठकर अपनी काबिलियत और जनसेवा की भावना के बल पर राजनीति में ऊँचा मुकाम हासिल किया। वर्ष 1969 में बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे। उस समय भवनाथपुर और पलामू प्रमंडल का यह इलाका बिहार राज्य का हिस्सा हुआ करता था।
उनके विधायक बनने के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिली। ग्रामीण परिवेश से आने वाले लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती ने हमेशा आम जनता की समस्याओं को विधानसभा के पटल पर मजबूती से रखा। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी बुनियादी जरूरतों पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। यही कारण है कि आज भी पुराने लोग उन्हें एक जनप्रिय और कर्मठ नेता के रूप में याद करते हैं।
झारखंड के पहले स्वास्थ्य मंत्रियों में रहे शामिल
वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का गठन होने के बाद भी स्वर्गीय देहाती ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। झारखंड सरकार के शुरुआती दौर में उन्हें लगभग छह माह तक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में सेवा देने का अवसर मिला। उनके इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्यकाल को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की नींव मजबूत करने के लिए स्मरण किया जाता है।
स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की सोच पर काम किया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधारने, अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और गरीब मरीजों को बेहतर इलाज दिलाने को लेकर उन्होंने कई योजनाओं पर पहल की थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि उन्हें लंबे समय तक इस पद पर कार्य करने का अवसर मिलता तो झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था और भी सशक्त हो सकती थी।
परिवार ने आगे बढ़ाई उनकी जनसेवा की परंपरा
स्वर्गीय लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती की राजनीतिक और सामाजिक विरासत को उनके पुत्र भानु प्रताप शाही ने पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया। भानु प्रताप शाही भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं और झारखंड सरकार में वे भी स्वास्थ्य मंत्री के पद पर कार्य कर चुके हैं।
पिता से मिली सीख और संस्कार के कारण भानु प्रताप शाही ने भी हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी। स्थानीय समर्थक बताते हैं कि देहाती परिवार का नाम क्षेत्र में केवल राजनीति के लिए नहीं, बल्कि सेवा और सहयोग के लिए भी जाना जाता है। लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती ने अपने जीवनकाल में समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का काम किया था, जिसका प्रभाव उनके परिवार और समर्थकों पर स्पष्ट दिखाई देता है।
सोशल मीडिया पर भी किया जा रहा स्मरण
आज की पुण्यतिथि के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर स्वर्गीय देहाती की तस्वीरें और पुराने संस्मरण साझा कर रहे हैं। समर्थक उन्हें याद करते हुए लिख रहे हैं कि उनका जीवन आम जनता के लिए समर्पित रहा। कई लोगों ने उनके साथ बिताए पलों का जिक्र करते हुए कहा कि वे बेहद सरल स्वभाव के व्यक्ति थे और हर जरूरतमंद की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे।
युवा पीढ़ी भी उनके बारे में पढ़कर और सुनकर प्रेरणा ले रही है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि ऐसे महान नेताओं की स्मृतियों को डिजिटल माध्यम से संजोना बेहद जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने क्षेत्र के इतिहास और नेतृत्व से परिचित हो सकें।
सादगी और जनसेवा का प्रतीक रहा जीवन
पुण्यतिथि के अवसर पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती का जीवन सादगी, ईमानदारी, संघर्ष और जनसेवा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कभी भी पद को महत्व नहीं दिया, बल्कि जनता की सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म माना।
स्थानीय नेताओं ने बताया कि स्वर्गीय देहाती हमेशा गांवों में घूम-घूम कर लोगों से सीधा संवाद करते थे। उनकी समस्याओं को सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। वे मानते थे कि राजनीति का असली उद्देश्य जनता के जीवन को बेहतर बनाना है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का दौर
हालांकि यह स्मरण मुख्य रूप से व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर हो रहा है, फिर भी कई स्थानों पर छोटे-छोटे श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों में लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
समर्थकों ने कहा कि स्वर्गीय देहाती ने जिस तरह से कठिन परिस्थितियों में भी क्षेत्र के विकास के लिए काम किया, वह आज के जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी सीख है।

न्यूज़ देखो: नेताओं की स्मृतियां समाज की धरोहर
स्वर्गीय लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती जैसे नेता किसी एक परिवार या दल के नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर होते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर उमड़ी यह श्रद्धांजलि बताती है कि जनता आज भी सच्चे सेवकों को दिल से याद रखती है। ऐसे अवसर हमें प्रेरणा देते हैं कि राजनीति में सेवा भाव सबसे ऊपर होना चाहिए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जनसेवा की राह पर चलने का संकल्प लें
पुण्यतिथि के ये अवसर केवल श्रद्धांजलि देने भर के लिए नहीं होते।
यह हमें अपने क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को समझने का मौका देते हैं।
आज के युवाओं को स्वर्गीय देहाती के संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सादगी, ईमानदारी और जनहित की सोच को अपनाकर ही समाज आगे बढ़ेगा।
सभी समुदायों के बीच समरसता और भाईचारे को मजबूत करना जरूरी है।
स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सामूहिक पहल होनी चाहिए।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें। स्वर्गीय लाल हेमेंद्र प्रताप देहाती के जीवन से जुड़ी कोई स्मृति आपके पास हो तो हमें लिख भेजें और इस समाचार को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें, ताकि प्रेरणा का यह संदेश दूर-दूर तक पहुंचे।






