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टीएसपीसी सब जोनल कमांडर अनीश अंसारी की गोली मारकर हत्या, हजारीबाग के गेरुआ नदी बालू घाट पर वर्चस्व संघर्ष का संदेह

#हजारीबाग #टीएसपीसीहत्या – गेरुआ नदी के काले कारोबार में खून की होली, मंगलवार रात 10:30 बजे हुई वारदात
  • हजारीबाग के केरेडारी थाना क्षेत्र में टीएसपीसी कमांडर की हत्या
  • बालू घाट पर हुई 3 राउंड फायरिंग, ट्रैक्टर चालक और मजदूर मौके से भागे
  • मृतक अनीश अंसारी पर थे कई आपराधिक मामले दर्ज
  • घटना के बाद पुलिस ने इलाके में की सघन घेराबंदी और जांच शुरू
  • स्थानीय लोग: गेरुआ नदी क्षेत्र उग्रवादी गतिविधियों और अवैध खनन के लिए कुख्यात

बालू घाट पर रात में गूंजीं गोलियां, इलाके में मची सनसनी

हजारीबाग, झारखंड – जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र अंतर्गत गेरुआ नदी बालू घाट पर टीएसपीसी (तृतीय प्रस्तुति समिति) उग्रवादी संगठन के सब जोनल कमांडर अनीश अंसारी की मंगलवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई।
वारदात रात 10:30 बजे के करीब हुई जब घाट पर बालू लोडिंग का काम चल रहा था।

तीन गोलियों की आवाज और भगदड़

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक तीन राउंड गोली चलने की आवाज आई, जिससे ट्रैक्टर चालक और मजदूर घबरा कर मौके से भाग गए
कुछ ही मिनटों में घटना स्थल सुनसान हो गया
सूचना मिलते ही केरेडारी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की घेराबंदी करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा

पुलिस: वर्चस्व की लड़ाई का संकेत

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हत्या के पीछे उग्रवादी संगठन के आंतरिक वर्चस्व संघर्ष या अवैध बालू कारोबार को लेकर विवाद हो सकता है।
अनीश अंसारी, जो कि रांची जिले के बुढ़मू थाना क्षेत्र का निवासी था, लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है और उस पर कई संगीन मामले दर्ज हैं।

क्षेत्र में दहशत, अवैध खनन का गढ़ बना गेरुआ

स्थानीय लोगों का कहना है कि गेरुआ नदी का इलाका लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों, अवैध खनन और बालू माफिया के प्रभाव में रहा है
यहां आए दिन फायरिंग, धमकी और वसूली की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन प्रशासनिक सख्ती का असर न के बराबर दिखता है।

पुलिस अधीक्षक हजारीबाग ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, और अज्ञात हमलावरों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज व खुफिया तंत्र को सक्रिय किया गया है
आसपास के इलाकों में कॉम्बिंग ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है।

न्यूज़ देखो: बालू के नीचे दबा कानून, उगाही और हिंसा का जाल

‘न्यूज़ देखो’ सवाल पूछता है — कब तक बालू घाटों पर खून बहेगा?
हजारीबाग के गेरुआ नदी जैसा इलाका जहां खनन की आड़ में हिंसा और उग्रवाद फल-फूल रहे हैं, वहां प्रशासनिक नियंत्रण जरूरी है।
टीएसपीसी जैसे संगठन इसी अवैध कारोबार की छाया में पलते हैं, और जब आपसी टकराव होता है तो गोलियों की आवाज पूरे समाज को हिला देती है
हम वादा करते हैं — ऐसी हर खबर की तह तक जाएंगे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब जरूरी है सख्ती और पारदर्शिता

उग्रवाद और अवैध खनन की इस जड़ से छुटकारा पाने के लिए स्थानीय प्रशासन को तकनीकी निगरानी, लाइसेंसिंग की पारदर्शिता, और स्थानीय लोगों के रोजगार के वैकल्पिक साधन मुहैया कराने होंगे।
आप क्या सोचते हैं इस बारे में? अपनी राय साझा करें और आवाज़ बनें बदलाव की।

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