
#खूंटी #उलगुलानशहीदमेला : डोम्बारी बुरू में शहादत की धरती पर आदिवासी संघर्ष और एकजुटता का संदेश।
खूंटी जिले के डोम्बारी बुरू में उलगुलान शहीद मेला 2026 का आयोजन जिला प्रशासन और मेला समिति के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में कृषि एवं पशुपालन सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की शामिल हुईं और भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थल बिरसा मुंडा के अनुयायियों और ब्रिटिश सेना के बीच हुए ऐतिहासिक संघर्ष की स्मृति का प्रतीक है। आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज के त्याग, बलिदान और वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया गया।
- डोम्बारी बुरू उलगुलान शहीद मेला 2026 का आयोजन।
- कृषि एवं पशुपालन मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की रहीं मुख्य अतिथि।
- भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित।
- बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा को किया गया सम्मानित।
- अर्जुन मुंडा, राम सूर्य मुंडा, नमन विक्सल कोंगाड़ी सहित कई प्रमुख मौजूद।
खूंटी जिले के ऐतिहासिक स्थल डोम्बारी बुरू में आयोजित उलगुलान शहीद मेला 2026 आदिवासी समाज के संघर्ष, त्याग और बलिदान की जीवंत स्मृति बनकर सामने आया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आदिवासी समाज के लोग एकत्र हुए। मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की ऐतिहासिक लड़ाई को याद करने का सशक्त मंच बना।
डोम्बारी बुरू शहादत की ऐतिहासिक भूमि
डोम्बारी बुरू को आदिवासी इतिहास में शहादत की भूमि के रूप में जाना जाता है। यही वह स्थल है, जहां ब्रिटिश सेना और पुलिस तथा भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ था। इस संघर्ष में अनेक आदिवासियों ने अपने प्राण न्योछावर किए और जल, जंगल व जमीन की रक्षा के लिए बलिदान दिया।
आज भी डोम्बारी बुरू आदिवासी समाज के लिए संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक है, जहां हर आयोजन इतिहास से सीख लेकर वर्तमान और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर देता है।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने दी श्रद्धांजलि
उलगुलान शहीद मेला 2026 में कृषि एवं पशुपालन सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की विशेष रूप से शामिल हुईं। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके संघर्ष को नमन किया।
इस अवसर पर मंत्री ने बिरसा मुंडा के वंशज श्री सुखराम मुंडा को सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने इसे अपने लिए सौभाग्य का क्षण बताया।
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा:
“यह स्थल शहादत की मिसाल और आदिवासी समाज के संघर्ष का प्रतीक है। इसके सामने मैं खुद को बहुत छोटा महसूस करती हूँ। मुंडा समाज के संघर्ष, त्याग और बलिदान को शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है, इसे केवल महसूस किया जा सकता है।”
जल जंगल जमीन की लड़ाई आज भी जारी
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि डोम्बारी बुरू की धरती पहले भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए खून से लथपथ हुई है और आज भी यह संघर्ष जारी है।
उन्होंने कहा:
“अगर आज भी जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए शहादत देनी पड़े, तो हमारा सिर तैयार है।”
यह वक्तव्य आदिवासी समाज के भीतर संघर्ष की भावना और अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
शिक्षा को बताया सबसे बड़ा हथियार
अपने संबोधन में शिल्पी नेहा तिर्की ने आदिवासी समाज के भविष्य के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी जरूरत आदिवासी समाज के बीच शिक्षा की अलख जगाने की है।
मंत्री ने कहा:
“शिक्षित समाज से ही बड़ा बदलाव संभव है। हमें समाज को बांटने वाली ताकतों से सचेत रहते हुए सामूहिकता और एकजुटता के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।”
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा को अपनाकर अपने अधिकारों और इतिहास की रक्षा करें।
कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
डोम्बारी बुरू में आयोजित इस शहीद मेले में कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, विधायक राम सूर्य मुंडा, विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला सहित कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।
इसके अलावा बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा, दुर्गावती जी, बिरसाइत समाज के प्रतिनिधि और डोम्बारी बुरू में शहीद परिवारों के परिजन भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
शहीद परिवारों को मिला सम्मान
कार्यक्रम के दौरान शहीद परिवारों के परिजनों की उपस्थिति ने आयोजन को भावनात्मक बना दिया। शहीदों के बलिदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज जो अधिकार और पहचान आदिवासी समाज को मिली है, वह इन्हीं शहादतों का परिणाम है।
डोम्बारी बुरू में आयोजित यह मेला नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने और संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बना।
आदिवासी एकजुटता का संदेश
पूरे कार्यक्रम के दौरान एकजुटता और सामूहिक संघर्ष का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज को विभाजनकारी ताकतों से सतर्क रहकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी।
डोम्बारी बुरू की धरती ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तभी वह अपने अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

न्यूज़ देखो: इतिहास से सीख और भविष्य की राह
डोम्बारी बुरू का उलगुलान शहीद मेला केवल अतीत को याद करने का आयोजन नहीं, बल्कि वर्तमान संघर्षों को दिशा देने का मंच है। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के वक्तव्यों ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा और एकजुटता ही आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत है। जनप्रतिनिधियों और समाज के बीच यह संवाद आने वाले समय में नीतिगत फैसलों को भी प्रभावित कर सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शहादत की विरासत से सशक्त भविष्य की ओर
डोम्बारी बुरू की शहादत हमें याद दिलाती है कि अधिकारों की रक्षा बलिदान और एकता से होती है।
आज जरूरत है कि इतिहास से प्रेरणा लेकर शिक्षा और संगठन के माध्यम से समाज को मजबूत बनाया जाए।
आप इस आयोजन और इसके संदेश को कैसे देखते हैं, अपनी राय जरूर साझा करें।
खबर को आगे बढ़ाएं ताकि उलगुलान की यह चेतना हर घर तक पहुंचे और आदिवासी समाज की आवाज और मजबूत हो सके।



