एनएसएस के तहत संत तुलसीदास महाविद्यालय रेहला ने शुरू किया सामुदायिक जागरूकता अभियान, बच्चों को दिया स्वच्छता का संदेश

एनएसएस के तहत संत तुलसीदास महाविद्यालय रेहला ने शुरू किया सामुदायिक जागरूकता अभियान, बच्चों को दिया स्वच्छता का संदेश

author Ram Niwas Tiwary
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#रेहला #पलामू : विद्यालय स्तर पर स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ।

पलामू जिले के रेहला में संत तुलसीदास महाविद्यालय द्वारा एनएसएस कार्यक्रम के तहत सामुदायिक जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। यह कार्यक्रम राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय मायापुर में आयोजित हुआ, जहां बच्चों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, एनएसएस स्वयंसेवकों और विद्यालय प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी रही। यह पहल विद्यार्थियों में स्वच्छ आदतों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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  • संत तुलसीदास महाविद्यालय रेहला द्वारा एनएसएस कार्यक्रम की शुरुआत।
  • कार्यक्रम का आयोजन राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय मायापुर में किया गया।
  • अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने की।
  • संचालन एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी राकेश शुक्ला द्वारा किया गया।
  • बच्चों को स्वच्छता और स्वस्थ दिनचर्या के प्रति किया गया जागरूक।

पलामू जिले के रेहला क्षेत्र में संत तुलसीदास महाविद्यालय की ओर से राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के अंतर्गत सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालय स्तर से ही बच्चों और समाज को स्वच्छता, स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम का आयोजन राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय मायापुर परिसर में किया गया, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी राकेश शुक्ला ने संभाली। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बच्चों को स्वच्छता के महत्व को सरल भाषा में समझाया और दैनिक जीवन में साफ-सफाई अपनाने के लिए प्रेरित किया।

स्वच्छता से ही स्वस्थ समाज का निर्माण

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में कई बीमारियों का मुख्य कारण गंदगी और अस्वच्छ वातावरण है। यदि हम अपने आसपास साफ-सफाई नहीं रखते हैं, तो बीमारियां तेजी से फैलती हैं और इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा: “स्वच्छता केवल आदत नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की पहली शर्त है। साफ-सफाई से हम कई गंभीर बीमारियों से खुद को और अपने परिवार को बचा सकते हैं।”

बच्चों को बताया गया कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें, जैसे हाथ धोना, साफ पानी पीना, आसपास कचरा न फैलाना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना, जीवन को बेहतर बना सकती हैं।

विद्यार्थियों को बेहतर दिनचर्या अपनाने की सीख

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को यह भी समझाया गया कि स्वच्छता केवल विद्यालय या घर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर भी इसकी जिम्मेदारी सभी की होती है। वक्ताओं ने कहा कि यदि विद्यार्थी आज से ही स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो भविष्य में एक स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।

इस अवसर पर बच्चों को अपनी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाने, समय पर उठने, नियमित पढ़ाई करने, साफ कपड़े पहनने और संतुलित भोजन करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

शिक्षकों और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

कार्यक्रम में राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय मायापुर के प्रधानाध्यापक कामेश्वर राम सहित कई शिक्षकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का भी स्थान है।

इस दौरान डॉ श्याम मिश्रा, डॉ सुनील यादव, रंजन दुबे, टीपी तिवारी, संजय पांडे, दिलीप चौबे, सुनील कुमार देव, प्रकाश पांडे, जितेंद्र पाठक, दिनेश कुमार शाह सहित अन्य शिक्षकों ने भी बच्चों को स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस स्वयंसेवकों की भूमिका भी सराहनीय रही। स्वयंसेवक विवेकानंद, अजीत कुमार, मुकेश कुमार, रोशन कुमार सहित अन्य स्वयंसेवकों ने बच्चों के साथ संवाद कर उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक किया और उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि साफ-सफाई अपनाना क्यों जरूरी है।

स्वयंसेवकों ने बच्चों को यह भी बताया कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।

सामुदायिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

संत तुलसीदास महाविद्यालय द्वारा शुरू किया गया यह सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आने वाले दिनों में अन्य विद्यालयों और क्षेत्रों तक भी पहुंचाया जाएगा। महाविद्यालय प्रबंधन का मानना है कि यदि बच्चों को सही समय पर सही जानकारी दी जाए, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों से यह अपील की गई कि वे स्वच्छता का संदेश अपने घर, मोहल्ले और गांव तक पहुंचाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

न्यूज़ देखो: स्वच्छता से बदलाव की शुरुआत

एनएसएस के तहत आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि शैक्षणिक संस्थान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। बच्चों के माध्यम से समाज में स्वच्छता का संदेश पहुंचाना एक दूरगामी सोच को दर्शाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पहल का असर जमीन पर कितना व्यापक रूप से दिखता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

स्वच्छ सोच से स्वस्थ भविष्य

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Written by

बिश्रामपुर, पलामू

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