Palamau

कर्ज के दबाव में युवक ने लिया दुखद फैसला, परिवार में मातम छाया

#पलामू #सामाजिक_संकट : कर्ज के बोझ तले युवक ने फांसी लगाकर जीवन समाप्त किया।

छतरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कुंडौली टोला खोंगा में रविवार सुबह 35 वर्षीय चंदन परहिया अपने घर में फांसी के फंदे से मृत पाए गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कर्ज व मानसिक तनाव के कारण मौत की संभावना पर जांच कर रही है। घटना से परिवार और पूरे गांव में शोक का माहौल है। इस मामले ने ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन को भी चिंतित कर दिया है।

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  • घटना ग्राम कुंडौली टोला खोंगा, छतरपुर में रविवार सुबह हुई।
  • मृतक चंदन परहिया, उम्र 35 वर्ष, घर में फांसी के फंदे से लटका पाया गया।
  • परिवार में पत्नी संजू देवी और पाँच बच्चे—तीन पुत्रियां काजल, पूजा, सीमा और दो पुत्र राजा व नीरज।
  • मृतक पर 4–5 फाइनेंस एवं बैंक कंपनियों के कर्ज का दबाव था।
  • पुलिस एसआई रविंद्र तिवारी के नेतृत्व में जांच कर रही है।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का स्पष्ट विवरण सामने आएगा।

छतरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कुंडौली टोला खोंगा में रविवार सुबह एक दुखद और सनसनीखेज घटना हुई। 35 वर्षीय चंदन परहिया को उनके घर में फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया। यह दृश्य देखकर परिवार और गांव के लोग सकते में आ गए। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। एसआई रविंद्र तिवारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

घटना का विवरण और परिवार की स्थिति

परिजनों ने बताया कि संजू देवी, पत्नी, शनिवार को मायके गई थीं। चंदन परहिया उन्हें छोड़कर शाम सात बजे घर लौटे। परिवार में पांच बच्चे हैं—तीन पुत्रियां काजल कुमारी (16), पूजा कुमारी (14), सीमा कुमारी (13), और दो पुत्र राजा कुमार (10), नीरज कुमार (8)। तीनों बेटियाँ दादा झरी बैगा के साथ सो रही थीं, जबकि दोनों बेटे उसी कमरे में सोए थे, जहां पिता मौजूद थे। बच्चों ने सुबह उठकर पिता को फंदे से झूलते देखा और शोर मचाया।

ग्रामीणों ने बताया कि दंपती के बीच किसी प्रकार का पारिवारिक विवाद नहीं था। हालांकि, मृतक पर कई फाइनेंस और बैंक कंपनियों का कर्ज था, जिससे मानसिक दबाव बढ़ा। यह संभव है कि कर्ज और परिवार की जिम्मेदारी के तनाव ने इस कदम के लिए प्रेरित किया हो।

ग्रामीण राजेश यादव ने कहा: “चंदन हमेशा मेहनती और मिलनसार था, लेकिन कर्ज के दबाव में वह परेशान रहता था। इस दुखद घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है।”

पुलिस कार्रवाई और जांच

एसआई रविंद्र तिवारी ने बताया कि पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज चुकी है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के अलावा किसी अन्य संभावित कारण की जांच भी की जा रही है।

एसआई रविंद्र तिवारी ने कहा: “हम पूरी गंभीरता से मामले की जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारण स्पष्ट होंगे और किसी भी संदेहास्पद पक्ष की पहचान की जाएगी।”

पुलिस के अनुसार, परिवार के अन्य सदस्यों और ग्रामीणों से भी पूछताछ की जा रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कर्ज और मानसिक तनाव से जुड़े सभी पहलुओं की जांच हो और आवश्यक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएँ।

समाज और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की खबर मिलते ही संजू देवी मायके से ससुराल आईं। पति का शव देखकर वह बेसुध हो गईं। पूरे गांव में शोक का माहौल है। पड़ोसी, रिश्तेदार और स्थानीय लोग परिवार के पास पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

गांव की मुखिया शोभा देवी ने कहा: “इस दुखद घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। हम परिवार के साथ खड़े हैं और प्रशासन से जल्द समाधान की अपील करते हैं।”

स्थानीय प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। पंचायत और पुलिस दोनों मिलकर परिवार को सहारा देने के उपाय कर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

कर्ज और मानसिक स्वास्थ्य का सामाजिक पहलू

यह घटना केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि कर्ज और मानसिक दबाव के कारण सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में वित्तीय तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

समाजसेवी डॉ. रीता कुमारी ने कहा: “कर्ज के दबाव में कई बार लोग इसी तरह का कदम उठा लेते हैं। यह समय है कि हम मानसिक स्वास्थ्य, वित्तीय परामर्श और सामाजिक समर्थन की व्यवस्था मजबूत करें।”

न्यूज़ देखो: कर्ज और मानसिक तनाव की सामाजिक चुनौती

चंदन परहिया की आत्महत्या इस बात को स्पष्ट करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय और मानसिक संकट परिवारों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। यह घटना प्रशासन, सामाजिक संगठन और समुदाय को सतर्क करती है कि वे लोगों को समय रहते सहायता और परामर्श उपलब्ध कराएँ। क्या स्थानीय प्रशासन कर्ज और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति स्थायी योजना बना पाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाएँ

हमारे आसपास के लोगों की मानसिक स्थिति और वित्तीय दबाव को समझना और समय रहते मदद करना बहुत जरूरी है। समाज के रूप में हमें ध्यान देना होगा कि किसी भी परिवार का सहारा टूट न पाए। अपने पड़ोसियों, मित्रों और रिश्तेदारों की भावनाओं और समस्याओं को समझें। संवेदनशील बने रहें, किसी की मदद करें। अपने विचार साझा करें, खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनें।

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Niranjan Kumar

छतरपुर, पलामू

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