
#गढ़वा #वाहन_जांच : बाजार और आसपास के इलाकों में सामान्य आवाजाही के दौरान पुलिस जांच से आमजन परेशान।
गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र में सोमवार को की गई वाहन जांच को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। बाजार और आसपास के इलाकों में बिना किसी स्पष्ट सूचना या विशेष अभियान के वाहनों को रोके जाने से आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है कि कम दूरी के लिए जा रहे वाहनों से भी बार-बार कागजात मांगे गए। इस स्थिति ने पुलिस की जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- मेराल थाना क्षेत्र में सोमवार को वाहन जांच से आमजन परेशान।
- बिना किसी विशेष सूचना या अभियान के वाहनों को रोके जाने का आरोप।
- एक किलोमीटर के भीतर जाने वाले लोगों से भी पूछताछ और कागजात जांच।
- स्थानीय नागरिकों में पुलिस के प्रति असंतोष बढ़ने की बात सामने आई।
- प्रशासन से नियमसम्मत और पारदर्शी जांच की मांग।
मेराल थाना क्षेत्र में सोमवार को उस समय असहज स्थिति बन गई, जब स्थानीय बाजार और आसपास के इलाकों में पुलिस द्वारा अचानक वाहन जांच शुरू की गई। रोजमर्रा के काम से निकलने वाले नागरिकों और वाहन चालकों को बिना किसी स्पष्ट कारण के रोके जाने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि वे केवल एक किलोमीटर के भीतर ही जा रहे थे, फिर भी उन्हें रोककर कागजात दिखाने को कहा गया।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, न तो किसी विशेष जांच अभियान की पूर्व सूचना दी गई थी और न ही किसी आपात स्थिति की जानकारी सार्वजनिक की गई थी। ऐसे में अचानक शुरू हुई जांच ने आम लोगों को असमंजस में डाल दिया। बाजार क्षेत्र में खरीदारी या दैनिक कार्यों से निकलने वाले लोग देर तक पुलिस जांच में फंसे रहे।
बिना ठोस कारण के जांच का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस द्वारा की जा रही यह वाहन जांच बिना किसी ठोस कारण के थी। वाहन चालकों से टैक्स, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य कागजात मांगे गए, जबकि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या विशेष सुरक्षा अलर्ट की जानकारी नहीं दी गई थी। लोगों का कहना है कि यदि कोई विशेष अभियान होता या किसी घटना को लेकर सतर्कता बरती जा रही होती, तो वे सहयोग के लिए तैयार रहते।
स्थानीय निवासी जियाउल मुस्तफा और जितेंद्र कुमार ने बताया कि इस तरह की जांच से आम नागरिकों को मानसिक और समय की परेशानी होती है। उनका कहना है कि पुलिस को जांच के दौरान स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि लोगों को यह समझ में आए कि उन्हें क्यों रोका जा रहा है।
आम जनता में बढ़ता असंतोष
ग्रामीणों और बाजारवासियों का कहना है कि बार-बार इस तरह की जांच से पुलिस के प्रति असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का मानना है कि पुलिस का काम सुरक्षा देना है, लेकिन बिना वजह रोक-टोक से आम जनता में भय और नाराजगी दोनों पैदा होती हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए, न कि सामान्य नागरिकों को परेशान करना चाहिए।
स्थानीय व्यापारियों ने भी अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि बाजार क्षेत्र में अचानक वाहन जांच से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ता है। कई बार लोग जांच से बचने के लिए बाजार आने से कतराने लगते हैं।
नियमों के तहत जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वाहन जांच नियमों के तहत, पारदर्शी और स्पष्ट उद्देश्य के साथ की जाए। नागरिकों का कहना है कि पुलिस यदि किसी विशेष अभियान के तहत जांच कर रही है, तो इसकी सूचना पहले दी जानी चाहिए या कम से कम मौके पर स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जांच क्यों की जा रही है।
लोगों ने यह भी मांग की कि छोटी दूरी के लिए जाने वाले स्थानीय नागरिकों के साथ लचीला रवैया अपनाया जाए, ताकि उन्हें बेवजह परेशानी न हो। ग्रामीणों का मानना है कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय से ही कानून व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
पुलिस और जनता के बीच संवाद की जरूरत
स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए पुलिस और जनता के बीच संवाद आवश्यक है। यदि पुलिस समय-समय पर लोगों को यातायात नियमों और जांच प्रक्रिया की जानकारी दे, तो गलतफहमियां कम हो सकती हैं। बिना संवाद के की गई कार्रवाई अक्सर विवाद और नाराजगी को जन्म देती है।
प्रशासन से अपेक्षा
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मेराल थाना क्षेत्र में की जा रही वाहन जांच की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी प्रकार की जांच स्पष्ट कारण, नियम और जनहित को ध्यान में रखकर ही की जाए। लोगों का कहना है कि पुलिस का सहयोग करना उनका कर्तव्य है, लेकिन इसके लिए जांच प्रक्रिया भी न्यायसंगत और पारदर्शी होनी चाहिए।
न्यूज़ देखो: पारदर्शिता से ही बनेगा भरोसा
मेराल थाना क्षेत्र की यह स्थिति पुलिस और आम जनता के बीच भरोसे की अहमियत को दर्शाती है। बिना स्पष्ट कारण की गई कार्रवाई जहां असंतोष बढ़ाती है, वहीं पारदर्शी और नियमबद्ध प्रक्रिया सहयोग को मजबूत करती है। प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग नागरिक, जवाबदेह व्यवस्था
सुरक्षा और सुविधा दोनों का संतुलन जरूरी है। वाहन जांच पर आपकी क्या राय है? अपनी बात कमेंट में रखें, खबर साझा करें और जिम्मेदार व्यवस्था के लिए चर्चा को आगे बढ़ाएं।





