
#खलारी #रांची #मजदूर_आंदोलन : सुरक्षा में अनदेखी और शोषण के विरोध में यूनियन ने घेराव का निर्णय लिया।
रांची जिले के खलारी क्षेत्र में मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर एक बड़ा आंदोलन सामने आ रहा है। राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (इंटक) के बैनर तले असंगठित मजदूरों ने 31 जनवरी को मधुकान कंपनी के डकरा कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है। यह कदम सीसीएल एनके एरिया अंतर्गत केडीएच में चल रहे साइलो प्रोजेक्ट के दौरान मजदूरों की सुरक्षा में कथित लापरवाही और शोषण के विरोध में उठाया गया है, जिसे लेकर मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
- राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (इंटक) के बैनर तले घेराव का निर्णय।
- 31 जनवरी को मधुकान कंपनी के डकरा कार्यालय का घेराव।
- सीसीएल एनके एरिया, केडीएच साइलो प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप।
- हाल के दिनों में एक मजदूर की मौत और एक के गंभीर रूप से घायल होने का मामला।
- प्रशासन को आंदोलन की सूचना, मजदूरों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील।
रांची जिले के खलारी थाना क्षेत्र अंतर्गत डकरा में मजदूर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। असंगठित मजदूरों ने राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (इंटक) के बैनर तले 31 जनवरी को मधुकान कंपनी के डकरा कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। मजदूरों का कहना है कि सीसीएल के एनके एरिया अंतर्गत केडीएच में चल रहे साइलो प्रोजेक्ट में उनसे लगातार जोखिम भरा कार्य कराया जा रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कंपनी गंभीर नहीं है।
साइलो प्रोजेक्ट में सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप
ज्ञात हो कि केडीएच में कोयला ढुलाई व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से साइलो प्रोजेक्ट (कोल हैंडलिंग प्लांट) का निर्माण कार्य चल रहा है। इस बड़े प्रोजेक्ट का कार्य मधुकान कंपनी द्वारा किया जा रहा है। मजदूरों का आरोप है कि इतने बड़े और जोखिम भरे निर्माण कार्य के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।
मजदूरों का कहना है कि न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं और न ही कार्यस्थल पर आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
मजदूरों की बैठक में लिया गया आंदोलन का निर्णय
घेराव को लेकर मंगलवार को भूतनगर, डकरा में असंगठित मजदूरों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अशोक सिंह ने की, जबकि मजदूर नेता अब्दुल्ला अंसारी विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में मजदूरों ने एक स्वर में कंपनी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए मजदूर नेता अब्दुल्ला अंसारी ने कहा—
अब्दुल्ला अंसारी ने कहा: “इतने बड़े प्रोजेक्ट में काम हो रहा है, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। कंपनी मजदूरों से जोखिम भरा काम तो ले रही है, लेकिन सुरक्षा उपकरण और मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जो बेहद चिंताजनक है।”
दुर्घटनाओं का हवाला देकर जताई चिंता
अब्दुल्ला अंसारी ने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि सुरक्षा में लापरवाही का नतीजा जानलेवा साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक मजदूर की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो चुकी है। वहीं 9 जनवरी 2026 को कार्य के दौरान ऊंचाई से गिरने से एक अन्य मजदूर का पैर टूट गया।
उन्होंने कहा कि ये घटनाएं इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि कंपनी मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम करा रही है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं।
ज्ञापन लेने से इनकार का आरोप
मजदूरों ने आरोप लगाया कि आंदोलन से पहले कंपनी प्रबंधन को ज्ञापन सौंपने की कोशिश की गई, लेकिन मधुकान कंपनी द्वारा घेराव से संबंधित ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद यूनियन की ओर से मजबूरन नोटिस को कंपनी कार्यालय के बाहर चिपकाया गया।
यूनियन का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी दे दी गई है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे और मजदूर अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रख सकें।
31 जनवरी को घेराव में शामिल होने की अपील
बैठक के दौरान मजदूर नेता ने सभी मजदूरों से 31 जनवरी को डकरा स्थित मधुकान कंपनी कार्यालय के घेराव में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल कुछ मजदूरों का नहीं, बल्कि सभी श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सवाल है।
बैठक में सलामत अंसारी, अमजद खान, अशोक सिंह, मुमताज अंसारी, विजय सिंह, संतोष सिन्हा, जगमोहन भगत, जयदीप कुमार, रामप्रसाद तुरी, नसीम अंसारी, मनोज यादव, रमेश प्रसाद, मऊदीन अंसारी, नईम अंसारी, रियाज अंसारी, जुलफान अंसारी, आसिफ अंसारी सहित कई मजदूर उपस्थित थे।
मजदूरों का सवाल: जान की कीमत पर क्यों काम?
मजदूरों का कहना है कि वे काम से पीछे नहीं हटना चाहते, लेकिन सुरक्षित कार्यस्थल उनका अधिकार है। उनका आरोप है कि लाभ कमाने की होड़ में कंपनी मजदूरों की जान को नजरअंदाज कर रही है। यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, तो दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

न्यूज़ देखो: मजदूर सुरक्षा पर गंभीर सवाल
खलारी क्षेत्र में प्रस्तावित यह घेराव मजदूर सुरक्षा और कॉरपोरेट जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बड़े प्रोजेक्ट में बार-बार हो रही दुर्घटनाएं प्रशासन और प्रबंधन दोनों की भूमिका पर सवालिया निशान लगाती हैं। अब देखना होगा कि कंपनी और प्रशासन मजदूरों की मांगों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित श्रम ही सच्चा विकास
विकास तभी सार्थक है, जब मजदूर सुरक्षित हों और उनके अधिकारों का सम्मान हो। इस खबर को साझा करें, ताकि मजदूर सुरक्षा से जुड़े मुद्दे व्यापक स्तर पर सामने आएं। अपनी राय कमेंट में दें और जागरूकता फैलाने में सहयोग करें।




