#ठेठईटांगर #स्वास्थ्य_लापरवाही : मरीज की मौत के बाद ग्रामीणों ने अस्पताल व्यवस्था पर सवाल उठाए।
ठेठईटांगर रेफरल अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। परिजनों ने चिकित्सक पर समय पर इलाज नहीं देने का आरोप लगाया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन डॉ सुन्दर मोहन समद ने जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ बैठक कर जांच व कार्रवाई का आश्वासन दिया।
- सिमडेगा खैरन टोली निवासी मोहम्मद इमरान की इलाज के दौरान मौत।
- परिजनों ने ठेठईटांगर रेफरल अस्पताल के चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया।
- सिविल सर्जन डॉ सुन्दर मोहन समद ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
- ग्रामीणों ने अस्पताल में 24 घंटे चिकित्सक उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
- झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की।
- बैठक में कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
ठेठईटांगर रेफरल अस्पताल में मंगलवार को एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने आरोप लगाया कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने के बावजूद चिकित्सक समय पर नहीं पहुंचे, जिसके कारण मरीज की जान चली गई। घटना के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताया और जिम्मेदार चिकित्सक पर कार्रवाई की मांग उठाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ सुन्दर मोहन समद ने अस्पताल पहुंचकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की तथा पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
मरीज की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पतालों के बीच दौड़ते रहे परिजन
मिली जानकारी के अनुसार सिमडेगा खैरन टोली निवासी लगभग 62 वर्षीय मोहम्मद इमरान की मंगलवार सुबह अचानक तबीयत खराब हो गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए आस्था अस्पताल सिमडेगा लेकर पहुंचे, जहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।
इसके बाद परिजन एम्बुलेंस के माध्यम से मरीज को राउरकेला ले जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पंडरीपानी के आसपास मरीज की स्थिति और गंभीर हो गई। स्थिति बिगड़ते देख परिजन तत्काल मरीज को लेकर रेफरल अस्पताल ठेठईटांगर पहुंचे और चिकित्सक को बुलाने की मांग करने लगे।
समय पर चिकित्सक नहीं पहुंचने का आरोप
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद कई बार चिकित्सक को बुलाया गया, लेकिन समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। इसी बीच मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
मरीज की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश बढ़ गया और अस्पताल परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय पर चिकित्सकीय सुविधा मिल जाती तो शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
सिविल सर्जन ने की बैठक, कार्रवाई का दिया भरोसा
घटना की सूचना मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ सुन्दर मोहन समद अस्पताल पहुंचे और जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों तथा स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में ग्रामीणों ने अस्पताल की अव्यवस्था और चिकित्सकों की अनुपलब्धता को लेकर नाराजगी जताई।
सिविल सर्जन डॉ सुन्दर मोहन समद ने कहा: “पूरे मामले की जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।”
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी कि रेफरल अस्पताल में 24 घंटे चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने उठाए सवाल
बैठक में मौजूद झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की व्यवस्था में सुधार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति चिंता का विषय है और आम लोगों को समय पर इलाज नहीं मिलना बेहद गंभीर मामला है।
झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने कहा: “लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और रेफरल अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, दवा और आपातकालीन सुविधा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
इस बैठक में प्रखण्ड विकास पदाधिकारी नूतन मिंज, अंचलाधिकारी कमलेश उरांव, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजेश कुमार, डॉ अभिषेक राज, झामुमो केंद्रीय सदस्य नोवास केरकेट्टा, झामुमो जिला उपाध्यक्ष रितेश बड़ाईक, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष असफाक आलम, वार्ड पार्षद मो असजद, मोहम्मद कयूम, राजा आलम, मोहम्मद तहसीन, मो अरशद, मिथिलेश कुमार पंडिए, विक्रम सिंह, बलराम कुमार साहू सहित अन्य ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अस्पताल की समस्याओं को विस्तार से रखा और स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की मांग दोहराई। लोगों ने कहा कि रेफरल अस्पताल होने के बावजूद यहां कई बार मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे लोगों में भय और असंतोष बढ़ रहा है।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
ठेठईटांगर रेफरल अस्पताल की यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। अस्पतालों में समय पर चिकित्सकों की उपलब्धता और आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि लापरवाही के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि लोगों का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था पर बना रहे। अब देखने वाली बात होगी कि जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग क्या ठोस कदम उठाता है।
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जागरूक समाज ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत
ग्रामीण इलाकों में मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था हर नागरिक का अधिकार है। समय पर इलाज और जिम्मेदार चिकित्सा सेवा से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। ऐसे मामलों में समाज की जागरूकता और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण होती है।

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