चंदवा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत, महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

चंदवा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत, महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

author Ravikant Kumar Thakur
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#चंदवा #वटसावित्रीव्रत : सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

लातेहार जिले के चंदवा नगर क्षेत्र में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। विभिन्न पूजा स्थलों पर पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ व्रत और पूजन संपन्न हुआ। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

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  • चंदवा नगर क्षेत्र में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
  • सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना की।
  • महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और सोलह श्रृंगार के साथ पूजा की।
  • पूजा स्थलों पर भक्तिमय गीत और मंगल ध्वनि से माहौल गूंज उठा।
  • उप प्रमुख अश्विनी मिश्र ने व्रत के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बताया।

लातेहार जिले के चंदवा नगर क्षेत्र में शुक्रवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा, आस्था और उत्साह के वातावरण में मनाया गया। सुबह से ही महिलाओं में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। नगर के विभिन्न पूजा स्थलों पर सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा स्थलों पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भक्ति गीतों तथा मंगल ध्वनि से गूंजता रहा।

विभिन्न स्थलों पर संपन्न हुई पूजा

चंदवा नगर क्षेत्र के थाना परिसर, थाना टोली देवी मंडप रोड, सरोज नगर हाई स्कूल के समीप तथा बायपास रोड स्थित जीएस फार्मा के पास स्थित वट वृक्षों के नीचे बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की।

महिलाएं पारंपरिक परिधान, शादी का जोड़ा और सोलह श्रृंगार कर पूजा स्थल पहुंचीं और विधि-विधान से व्रत और पूजन संपन्न किया।

वट वृक्ष की परिक्रमा कर बांधा धागा

पूजा के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर धागा बांधा और अखंड सौभाग्य की कामना की।

महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर पर्व की खुशियां साझा कीं। इस दौरान पारंपरिक गीतों और पूजा-अर्चना से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

धार्मिक महत्व पर प्रकाश

नगर मंदिर के पुजारी सह चंदवा के उप प्रमुख अश्विनी मिश्र ने वट सावित्री व्रत के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

अश्विनी मिश्र ने कहा: “भारतीय संस्कृति में वट वृक्ष को दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। यह व्रत पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।”

उन्होंने बताया कि यह पर्व माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से प्रेरित है, जो वैवाहिक निष्ठा और समर्पण का संदेश देता है।

वट वृक्ष का सांस्कृतिक महत्व

अश्विनी मिश्र ने कहा कि वट अर्थात बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इसकी गहरी जड़ें और लंबी आयु स्थिरता, अमरता और समर्पण का प्रतीक हैं।

महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और समृद्धि का आशीर्वाद मांगती हैं।

महिलाओं में दिखा उत्साह

पूरे नगर क्षेत्र में महिलाओं के बीच विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिली। कई महिलाओं ने परिवार की खुशहाली और सुखमय जीवन के लिए विशेष प्रार्थना की।

पर्व के अवसर पर महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का भी परिचय दिया।

सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक

वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह पर्व वैवाहिक जीवन में विश्वास, समर्पण और प्रेम को मजबूत करने का संदेश देता है।

चंदवा में इस पर्व का आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी प्रतीक बना।

न्यूज़ देखो: परंपरा, आस्था और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत उत्सव

चंदवा में श्रद्धाभाव से मनाया गया वट सावित्री व्रत यह दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में पारिवारिक संबंधों और परंपराओं का कितना गहरा महत्व है। महिलाओं की आस्था और सहभागिता ने इस पर्व को और भी विशेष बना दिया।

ऐसे पर्व समाज में सांस्कृतिक जुड़ाव, पारिवारिक एकता और परंपराओं के संरक्षण का संदेश देते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संस्कृति और परंपराओं को संजोना हमारी जिम्मेदारी

भारतीय पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने का माध्यम भी हैं। परिवार, प्रेम और समर्पण की भावना ही समाज को मजबूत बनाती है।

आइए, अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।

सजग रहें, संस्कृति से जुड़े रहें और सामाजिक एकता को मजबूत बनाएं। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और भारतीय परंपराओं की खूबसूरती को आगे बढ़ाएं।

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Written by

चंदवा, लातेहार

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