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केतार प्रखंड की बदहाल सड़कों पर उफन पड़ा ग्रामीणों का गुस्सा: प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग

#गढ़वा #केतार : बतोकला और शिजुईया टोला की जर्जर सड़कें बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी
  • केतार प्रखंड के बतोकला और शिजुईया टोला की सड़कें पूरी तरह जर्जर।
  • कीचड़ और गड्ढों से भरी सड़क पर चलना भी मुश्किल।
  • ग्रामीण राज गुप्ता ने सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीर, दिखाई सड़क की सच्चाई।
  • स्थानीय लोग बोले — मुखिया और जनप्रतिनिधि सिर्फ वोट के समय आते हैं।
  • ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सड़क मरम्मत की मांग की।

गढ़वा जिले के केतार प्रखंड के बतोकला और शिजुईया टोला की सड़कें इस कदर खराब हो चुकी हैं कि लोगों के लिए रोजमर्रा का आना-जाना भी मुश्किल बन गया है। बारिश के बाद सड़कों पर कीचड़ और गड्ढों का आलम ऐसा है कि वाहन तो दूर, पैदल चलना भी चुनौती बन गया है। लोग मजबूरी में अपनी साइकिल और मोटरसाइकिल को कीचड़ में घसीटते हुए ले जाते हैं।

सोशल मीडिया पर उठा आक्रोश

ग्रामीण राज गुप्ता ने सोशल मीडिया पर सड़क की स्थिति को उजागर करते हुए लिखा —

“हमारे गांव में कुछ इस प्रकार रोड है जिस पर न मुखिया का ध्यान जाता है, न विधायक का। बस वोट लेने के समय आते हैं और चिकनी-चिकनी बातें कर चले जाते हैं।”

उन्होंने फेसबुक पर जो तस्वीर साझा की है, उसमें एक युवक अपनी साइकिल को कीचड़ में फंसे रास्ते से खींचता नजर आ रहा है। तस्वीर ने ग्रामीणों की वर्षों पुरानी परेशानी को उजागर कर दिया है और अब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।

जनप्रतिनिधियों से नाराज हैं ग्रामीण

स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक शिकायत की, मगर अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेताओं के बड़े-बड़े वादे हवा में उड़ जाते हैं और काम के समय सब गायब हो जाते हैं। इस वजह से अब लोगों में आक्रोश और निराशा दोनों है।

सड़क निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे। लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल जाने और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भारी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं।

न्यूज़ देखो: जनता की आवाज़ अब प्रशासन तक पहुँचे

केतार की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम इलाकों की कहानी है जहाँ मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी आम हो चुकी है। अब समय है कि प्रशासन ऐसे मुद्दों को गंभीरता से ले और ग्रामीणों को राहत देने के लिए त्वरित कार्रवाई करे।

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गांव की सड़कों की यह स्थिति सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि जनजीवन से जुड़ा सवाल है। अब जरूरत है कि हम सब मिलकर इस मुद्दे पर आवाज उठाएँ ताकि विकास के दावे जमीनी हकीकत में बदलें। अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को शेयर कर ग्रामीण आवाज़ को मजबूत बनाएं।

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